टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

हम वित्त सचिव को कोर्ट नहीं बुलाना चाहते, लेकिन हम विचार कर सकते हैं…

No Funds for Cyber Crime Control: Rajasthan High Court Gives Government 15 Days to Arrange Infrastructure

साइबर अपराध नियंत्रण के लिए विभागों को जारी नहीं किया जा रहा रहा फंड, हाईकोर्ट ने दी वित्त सचिव को चेतावनी

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जयपुर पीठ ने राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा है कि साइबर अपराध नियंत्रण के लिए आवश्यक संसाधनों और तकनीकी ढांचे की व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए।

हाईकोर्ट ने अपने पूर्व आदेशों की पालना में वित्तीय व्यवस्थाएं नहीं करने पर कहा कि फिलहाल अदालत वित्त विभाग के सचिव को तलब नहीं करना चाहती, लेकिन यदि आवश्यक धनराशि उपलब्ध नहीं कराई गई तो उन्हें कोर्ट में बुलाने पर विचार किया जाएगा।

यह टिप्पणी जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने दो आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान की है।

गौरतलब है कि जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने ही 27 नवंबर 2025 को एक रिपोर्टेबल फैसले के जरिए राज्य में साइबर अपराधों के नियंत्रण को लेकर विस्तृत आदेश जारी किया था।

इस आदेश में जस्टिस रवि चिरानिया ने राजस्थान में साइबर सुरक्षा के लिए 34 बिंदुओं पर आदेश दिया था।

पढ़िए 27 नवंबर 2025 का रिपोर्टेबल जजमेंट: “DG साइबर बना, लेकिन सिस्टम नहीं”: राजस्थान हाईकोर्ट का Digital Arrest पर ऐतिहासिक निर्णय, राजस्थान में साइबर सुरक्षा के लिए 34 बिंदूओ पर आदेश

कोर्ट में पेश हुए आला अधिकारी

शुक्रवार को मामले की सुनवाई के दौरान गृह विभाग, साइबर क्राइम शाखा, अभियोजन विभाग और एफएसएल के कई वरिष्ठ अधिकारी अदालत में उपस्थित हुए और उन्होंने अदालत को अब तक की प्रगति से अवगत कराया।

जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में पेश हुए अधिकारियों से जब जवाब तलब किया गया तो अदालत ने पाया कि साइबर अपराध से निपटने के लिए आवश्यक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर, सॉफ्टवेयर और मानवबल की उपलब्धता में वित्तीय बाधाएं सामने आ रही हैं।

अधिकारियों ने हाईकोर्ट को बताया कि संबंधित विभागों द्वारा वित्त विभाग से आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराने के लिए पत्राचार किया गया है, लेकिन अभी तक पूरी व्यवस्था नहीं हो सकी है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता/ जीए राजेश चौधरी ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि हाईकोर्ट के आदेशो की पालना में कई कदम उठाए गए हैं.

15 दिन का समय, विस्तृत हलफनामा करना होगा दाखिल

हाईकोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए आवश्यक संपूर्ण व्यवस्था समयबद्ध तरीके से विकसित की जाए और इसके लिए विभाग आपसी समन्वय से कार्य करें।

हाईकोर्ट ने इस संबंध में संबंधित विभागों को 15 दिन का समय देते हुए विस्तृत शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है, जिसमें यह स्पष्ट रूप से बताया जाए कि अब तक कौन-कौन से कदम उठाए गए हैं, आगे क्या कार्रवाई प्रस्तावित है और निर्देशों के पूर्ण अनुपालन में कितना समय लगेगा।

अदालत ने यह भी कहा कि यदि अगली सुनवाई तक आवश्यक धनराशि उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो वित्त विभाग के सचिव को भी तलब किया जा सकता है।

मजबूत इको-सिस्टम करें विकसित

हाईकोर्ट ने यह भी अपेक्षा व्यक्त की कि गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, महानिदेशक (साइबर) तथा अभियोजन और एफएसएल विभाग के अधिकारी अपने स्तर पर सक्रिय पहल करते हुए राज्य में साइबर अपराधों से निपटने के लिए एक मजबूत और आधुनिक इको-सिस्टम विकसित करें।

इसमें तकनीकी ढांचे के साथ-साथ प्रशिक्षित मानवबल और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी शामिल है।

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 23 फरवरी 2026 तय की है, जिसमें विभागों द्वारा प्रस्तुत अनुपालन रिपोर्ट पर विचार किया जाएगा।

सबसे अधिक लोकप्रिय