राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में आयोजित हुआ “Learning Legal Skills from the Best” विषय व्याख्यान
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर की ओर से अधिवक्ताओं के कौशल विकास और विधिक ज्ञान को सशक्त बनाने के उद्देश्य से राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ के ऑडिटोरियम में “Learning Legal Skills from the Best” विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया।
राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ जज जस्टिस फरजंद अली इस व्याख्यानमाला के मुख्य अतिथी और वक्ता रहें.

व्याख्यान में मौजूद सैकड़ो अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए जस्टिस फरजन्द अली ने कहा कि अधिवक्ता का पेशा केवल दलीलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अनुशासन, निरंतर अध्ययन और समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
उन्होंने अधिवक्ताओं को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि “Work is Worship” का सिद्धांत अपनाकर ही विधि क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने युवा अधिवक्ताओं से विशेष रूप से आग्रह किया कि वे पेशे की गरिमा बनाए रखते हुए ईमानदारी और समर्पण के साथ कार्य करें।
जस्टिस फरजंद अली ने अपने व्याख्यान में हाल ही में लागू हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के मूलभूत प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि बदलते कानूनों की गहराई से समझ आज के अधिवक्ताओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि नए कानूनों का सतत अध्ययन और न्यायालय में अद्यतन विधिक प्रावधानों के आधार पर प्रभावी तर्क प्रस्तुत करना ही एक सफल अधिवक्ता की पहचान है।

एक नई शुरूआत
कार्यक्रम की शुरुआत में जस्टिस फरजन्द अली का एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत द्वारा पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया।
एसोसिएशन के महासचिव डॉ. अरुण कुमार झाझड़िया ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि अधिवक्ताओं के अकादमिक और व्यावसायिक कौशल को मजबूत करने के लिए एसोसिएशन लगातार प्रशिक्षण और व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह उदावत ने अपने स्वागत उद्बोधन में कहा कि वरिष्ठ न्यायाधीशों के अनुभव और मार्गदर्शन से अधिवक्ताओं को व्यावहारिक ज्ञान मिलता है, जो उनके पेशेवर जीवन में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है।
उन्होंने कहा कि एसोसिएशन भविष्य में भी अधिवक्ताओं के कौशल विकास के लिए ऐसे शैक्षणिक कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित करती रहेगी, जिससे बार और बेंच के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके।
व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्न-उत्तर सत्र कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा। इस दौरान अधिवक्ताओं ने न्यायिक प्रक्रिया, नए कानूनों की व्याख्या, पेशेवर नैतिकता और न्यायालयीन कार्यप्रणाली से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जिनका जस्टिस फरजन्द अली ने विस्तार से उत्तर देते हुए अधिवक्ताओं को व्यावहारिक सुझाव दिए।

उन्होंने कहा कि सफलता का सबसे बड़ा सूत्र निरंतर अध्ययन, कठोर परिश्रम और सकारात्मक सोच है।
इस अवसर पर एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शीतल कुम्भट, सहसचिव डॉ. मिलाप चोपड़ा, कोषाध्यक्ष रघुवीर सिंह भाटी, पुस्तकालय सचिव कोमल आर. वर्मा तथा कार्यकारिणी सदस्य डॉ. अक्षया शुक्ला, अनुपम गोपाल व्यास, कृष्णकांत व्यास, आकांक्षा चौधरी, नंदीपना गहलोत और विरम सिंह राजपुरोहित सहित बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता, बड़ी संख्या में अधिवक्ता, न्यायिक अधिकारी और एडवोकेट क्लर्क्स उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विधि क्षेत्र में लगातार सीखना ही सफलता की कुंजी है।