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कभी कंप्यूटर का भी देश में विरोध हुआ था, आज एआई का विरोध हो रहा है, लेकिन टेक्नोलॉजी रुकेगी नहीं, 21वीं सदी भारत की है और भारत इसका नेतृत्व करेगा-केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल

India Will Lead the 21st Century, Technology Cannot Be Stopped: Union Law Minister Arjun Ram Meghwal at National Cyber Security Conference

रालसा की राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा कॉन्फ्रेंस का समापन, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने दिया डिजिटल नेतृत्व का संदेश

जयपुर। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल ने कहा कि किसी भी टेक्नोलॉजी को रोका नहीं जा सकता और टेक्नोलॉजी या कोई भी नई सुविधा अपने साथ आशंकाएं भी लाती हैं। दुनिया में 2020 के बाद एआई ने इंडस्ट्री 4.0 की शुरुआत कर दी है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स का दौर आ गया है। साइबर अपराध से डरने की नहीं, उससे लड़ने और व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत नेतृत्व करेगा, इसकी भविष्यवाणी स्वामी विवेकानंद ने 1893 में ही शिकागो प्रवास के दौरान कर दी थी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आज वैश्विक परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। यूरोप और अमेरिका आर्थिक व राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं। ऐसे में एशिया के नेतृत्व की चर्चा तेज है और भारत उसमें अग्रिम पंक्ति में खड़ा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि “21वीं सदी एशिया की होगी और भारत उसका नेतृत्व करेगा। हमें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना है। चुनौतियों को स्वीकार करना ही भारत की परंपरा है।”

कॉन्फ्रेस का समापन समारोह

कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से आयोजित तीन दिवसीय साइबर सुरक्षा कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह को संबोधित करते हुए ये बात कही है।

केन्द्रीय कानून मंत्री अर्जूनराम मेघवाल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुए समापन समारोह में राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और राजस्थान हाईकोर्ट के सीनियर मोस्ट जज जस्टिस पुष्पेन्द्रसिंह भाटी सहित हाईकोर्ट के अधिकांश जज मौजूद रहें.

समारोह में मौजूद राजस्थान न्यायपालिका के 300 से ज्यादा जजों और न्यायिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि सरकार, समाज, ब्यूरोक्रेसी और न्यायपालिका—चारों स्तंभ यदि समन्वय के साथ आगे बढ़ें तो साइबर युग की हर चुनौती का समाधान संभव है।

उन्होंने कॉन्फ्रेंस की तारीफ करते हुए कहा कि यह कॉन्फ्रेंस केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि बदलते डिजिटल भारत की दिशा तय करने वाला मंच है।

हर बदलाव का विरोध, लेकिन प्रगति नहीं रुकी

केंद्रीय मंत्री ने तकनीकी विकास की ऐतिहासिक यात्रा को रेखांकित करते हुए कहा कि दुनिया में स्टीम इंजन आने पर 1760 में इंडस्ट्री 1.0 की शुरुआत हुई थी। बिजली आने पर 19वीं सदी में इंडस्ट्री 2.0 और 1960 के बाद कंप्यूटर और सूचना प्रौद्योगिकी से इंडस्ट्री 3.0 की शुरुआत हुई।

कानून मंत्री ने कहा कि अब यह यात्रा 2020 के बाद इंडस्ट्री 4.0 है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, 3D प्रिंटिंग, ब्लॉकचेन और इंटरनेट ऑफ थिंग्स का दौर शामिल है।

कानून मंत्री ने कहा कि “हर दौर में आशंकाएं उठीं, विरोध हुआ, लेकिन तकनीक कभी नहीं रुकी, क्योंकि वह नागरिकों की सुविधा बढ़ाती है।”

साइबर अपराध: सुविधा के साथ बढ़ती चुनौती

कानून मंत्री ने चेतावनी दी कि डिजिटल सुविधाओं के साथ अपराध के तरीके भी बदले हैं। उन्होंने कहा कि आज इन्वेस्टमेंट स्कैम, केवाईसी फ्रॉड, डिजिटल अरेस्ट, फिशिंग कॉल, ऑनलाइन जॉब ऑफर ठगी और फर्जी पेमेंट मैसेज जैसे अपराध छोटे शहरों तक पहुंच चुके हैं।

लेकिन कानून मंत्री ने यह भी कहा कि “साइबर अपराध का हौवा खड़ा करने की जरूरत नहीं है, लेकिन जागरूकता, प्रशिक्षण और सख्त कानून की जरूरत है।”

केवल निचले स्तर के पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देना पर्याप्त नहीं होगा। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को भी टेक्नोलॉजी की गहराई समझनी होगी।

कानून मंत्री ने संकेत दिया कि जैसे कॉमर्शियल कोर्ट ने व्यापारिक विवादों के समाधान में तेजी लाई, वैसे ही भविष्य में विशेष साइबर कोर्ट की आवश्यकता भी महसूस की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कोविड काल में भारत ने दुनिया को मानवता और सहयोग का संदेश दिया। अंतरिक्ष, रक्षा और डिजिटल गवर्नेंस में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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