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बार वर्सेज बेंच : माह के अंतिम कार्यदिवस पर हाईकोर्ट ने जारी की महत्वपूर्ण मामलों की सूची, जोधपुर के दोनों बार एसोसिएशनों ने बहिष्कार के लिए अधिवक्ताओं से की अपील

Bar vs Bench: Jodhpur Bar Associations Call for Boycott as Rajasthan High Court Lists Important Cases on Last Working Day

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में एक बार फिर बार और बेंच के बीच टकराव की स्थिति बनती जा रही है।

एक ओर हाईकोर्ट प्रशासन ने माह के अंतिम कार्यदिवस 27 फरवरी को सुनवाई के लिए महत्वपूर्ण मामलों की सूची जारी कर दी है, तो दूसरी ओर मुख्यपीठ जोधपुर के दोनों प्रमुख बार संगठनों ने अधिवक्ताओं से पूर्ण न्यायिक कार्य बहिष्कार की अपील कर दी है।

Rajasthan High Court Lawyers’ Association और Rajasthan High Court Advocates’ Association ने संयुक्त रूप से अपील जारी कर मुख्यपीठ में प्रैक्टिस कर रहे अधिवक्ताओं से माह के अंतिम कार्यदिवस पर स्वैच्छा से न्यायिक कार्य का बहिष्कार करने का आह्वान किया है।

दोनों संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पिछले 49 वर्षों से जारी है और एकीकृत मुख्यपीठ की मांग को लेकर यह प्रतीकात्मक विरोध हर माह के अंतिम कार्यदिवस पर किया जाता है।

49 वर्षों से जारी है आंदोलन

बार एसोसिएशनों के अध्यक्ष रणजीत जोशी और दिलीपसिंह उदावत के अनुसार, राजस्थान के एकीकरण के समय यह तय किया गया था कि राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जोधपुर में होगी और न्यायिक दृष्टि से इसे विशेष महत्व प्राप्त रहेगा।

वर्ष 1977 में हाईकोर्ट के विभाजन से संबंधित निर्णय के बाद जोधपुर की जनता और अधिवक्ताओं ने इसका जोरदार विरोध किया था।

उसी विरोध की निरंतरता में प्रत्येक माह के अंतिम कार्यदिवस पर अधिवक्ता स्वैच्छिक रूप से न्यायालयों में अनुपस्थित रहकर अपनी मांग दोहराते हैं।

एसोसिएशनों का कहना है कि न्यायालयों के विभाजन या कार्यों के स्थानांतरण से जोधपुर की न्यायिक पहचान और ऐतिहासिक महत्व प्रभावित होता है।

उनका तर्क है कि जोधपुर केवल एक शहर नहीं, बल्कि राजस्थान की न्यायिक राजधानी के रूप में स्थापित रहा है और इस स्थिति को कमजोर करने वाले किसी भी प्रयास का विरोध किया जाएगा।

One Side Celebration, Other Side Protest: Lawyers Continue 49-Year Judicial Boycott at Rajasthan High Court Jodhpur
File Photo: Lawyers staging a symbolic judicial boycott at the heritage building of Rajasthan High Court, Jodhpur, demanding a unified High Court system.

27 फरवरी को रहेगा स्वैच्छिक बहिष्कार

दोनों बार एसोसिएशनों के अध्यक्षों और महासचिवों द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस में अधिवक्ताओं से अपील की गई है कि वे 27 फरवरी 2026 को अदालतों में उपस्थिति दर्ज न कराएं और आंदोलन को सफल बनाने में सहयोग दें। इसे पूर्णतः स्वैच्छिक कार्यक्रम बताया गया है।

बार पदाधिकारियों ने कहा है कि जब तक एकीकृत हाईकोर्ट की मांग पर स्पष्ट और संतोषजनक समाधान नहीं निकलता, तब तक यह मासिक प्रतीकात्मक विरोध जारी रहेगा।

महत्वपूर्ण मामलों की सूची

Rajasthan High Court Advocates’ Association के महासचिव विजय चौधरी कहते हैंं कि विवाद की अहम वजह यह है कि पिछले कुछ समय से हाईकोर्ट प्रशासन विशेष रूप से माह के अंतिम कार्यदिवस पर महत्वपूर्ण और गंभीर श्रेणी के मामलों की सूची जारी कर रहा है।

अधिवक्ताओं का आरोप है कि पहले इस दिन अपेक्षाकृत कम महत्वपूर्ण मामलों को सूचीबद्ध किया जाता था, लेकिन हाल में जमानत, अंतरिम राहत और अन्य गंभीर मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है।

सोशल मीडिया पर भी इस सूची को लेकर दोनों बार एसोसिएशन अधिवक्ताओं के निशाने पर हैं। कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं, जिन्होंने जयपुर पीठ की स्थापना के विरोध में इस मासिक बहिष्कार की शुरुआत की थी, ने इसे जोधपुर मुख्यपीठ को कमजोर करने की रणनीति करार दिया है।

नई बेंचों को लेकर आशंका

Rajasthan High Court Lawyers’ Association के महासचिव अरूण झांझड़िया कहते हैं कि कई अधिवक्ताओं के बीच यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि यदि आंदोलन को धीरे-धीरे कमजोर किया गया तो भविष्य में बीकानेर और उदयपुर में नई बेंचों के गठन का रास्ता प्रशस्त किया जा सकता है।

इसी आशंका के चलते बार एसोसिएशन पर दबाव बढ़ा है कि वे आंदोलन को और सशक्त रूप में जारी रखें।

जनवरी माह के अंतिम कार्यदिवस पर भी महिला अधिवक्ताओं ने विरोध प्रदर्शन कर अपनी मंशा जाहिर की थी, जिससे स्पष्ट है कि इस मुद्दे को लेकर बार के भीतर व्यापक समर्थन मौजूद है।

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