जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा लंबित टारगेटेड मामलों (Targeted Cases) के निस्तारण के लिए जारी कार्ययोजना को लेकर दी बार एसोसिएशन, जयपुर ने बड़ा फैसला लिया है।
एसोसिएशन ने अपने सदस्यों और अधिवक्ताओं से 31 अगस्त 2026 को न्यायिक कार्य से विरत रहने का आह्वान किया है।
यानी दी बार एसोसिएशन जयपुर ने न्यायिक कार्य बहिष्कार का ऐलान किया है।

बार एसोसिएशन की ओर से जारी सूचना के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर की ओर से 11 अगस्त को सभी जिला न्यायालयों को जारी किए गए पत्र में लक्षित प्रकरणों के निस्तारण के लिए कार्य योजना (Phase-VI) निर्धारित की गई है।
5 वर्ष पुराने मामलों के निस्तारण का दबाव
योजना के तहत प्रारंभ में 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने मामलों के निस्तारण पर जोर दिया गया था।
हाईकोर्ट ने अब इसमें पांच वर्ष से अधिक पुराने मामलों को भी शामिल किया है।
बार एसोसिएशन इसी फैसले का विरोध जता रही है। बार के अनुसार अधीनस्थ न्यायालयों में मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया के दौरान न्याय की गुणवत्ता और न्याय प्रणाली के बुनियादी मानदंडों की अनदेखी की आशंका बनी हुई है।
एसोसिएशन का कहना है कि लंबित मामलों के त्वरित निस्तारण के प्रयासों के बीच वकीलों के निजी और पेशेवर जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसी मुद्दे को लेकर एसोसिएशन ने विरोध स्वरूप 31 अगस्त को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सोमेश चंद शर्मा और महासचिव उमेश चौधरी की ओर से जारी सूचना में सभी सदस्यों और अधिवक्ताओं से इस निर्णय में सहयोग करने की अपील की गई है।
चूरू, झुंझुनूं और सीकर में भी विरोध, न्यायिक कार्य बहिष्कार
हाईकोर्ट के इस आदेश का विरेाध जयपुर बार ही नहीं बल्कि चूरू, झुंझुनूं और सीकर जिलों के अधिवक्ता भी विरोध कर रहे हैं.
इन तीनों जिलों के वकील 27 के बाद अब 31 अगस्त को भी न्यायिक कार्य से अलग रहेंगे.
जबकि 31 अगस्त को जिला कलेक्टर के माध्यम से योजना को वापस लेने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।

