जयपुर। राजस्थान की न्यायपालिका में इन दिनों चल रहे विवादों के बीच अब बूंदी की कथित 324 बीघा कृषि भूमि से जुड़ा एक पुराना विवाद सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
वायरल सामग्री में इस जमीन को लेकर वर्षों से चल रहे मुकदमों, न्यायिक अधिकारियों के तबादलों और कथित प्रभाव के संबंध में कई गंभीर दावे किए गए हैं।
सोशल मीडिया पर अलग-अलग अधिवक्ताओं के ग्रुप में एक अधिवक्ता और एक पूर्व न्यायिक अधिकारी ने इस सामग्री को शेयर भी किया है।
हालांकि, वायरल सामग्री में लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दस्तावेज के अनुसार मामला बूंदी जिले की हिंडोली तहसील के रेन गांव स्थित 324 बीघा कृषि भूमि से जुड़ा है।
इसमें दावा किया गया है कि वर्ष 2004 में जमीन के संबंध में संविदा के पालन का मुकदमा दायर हुआ था और बाद के वर्षों में परिवार के सदस्यों के बीच बिक्री पत्र और निष्पादन की कार्यवाही को लेकर विवाद खड़ा हुआ।
वायरल हुए दस्तावेज में एक पक्ष द्वारा कथित धोखाधड़ी के आधार पर न्यायालयीन कार्यवाही को चुनौती देने का भी हवाला दिया गया है।
मुकदमे की सुनवाई और हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
वायरल सामग्री के मुताबिक विवादित बिक्री पत्र को चुनौती देते हुए बूंदी की अदालत में दीवानी वाद दायर किया गया।
एक पक्ष द्वारा वाद खारिज करने के लिए ऑर्डर 7 रूल 11 सीपीसी के तहत आवेदन पेश किया गया, जिसे एडीजे-2 बूंदी ने 19 मई 2025 को खारिज कर दिया।
इसके बाद राजस्थान हाईकोर्ट में सिविल रिवीजन याचिका दायर की गई, जिस पर निचली अदालत की कार्यवाही स्थगित करते हुए पक्षकारों को नोटिस जारी किए जाने का उल्लेख है।
वायरल पोस्ट में एक्टिंग चीफ जस्टिस को लेकर भी दावा
सोशल मीडिया पर प्रसारित दस्तावेज का सबसे संवेदनशील हिस्सा राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़ा है।
इसमें दावा किया गया है कि जून 2026 में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और रजिस्ट्रार विजिलेंस बूंदी पहुंचे थे और वहां संबंधित पक्ष की पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मुलाकात कराई गई थी।
सामग्री में इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए गए हैं और तस्वीरें भी प्रकाशित की गई हैं।
हालांकि, सामग्री में इन मुलाकातों के उद्देश्य या किसी कथित न्यायिक हस्तक्षेप को साबित करने वाला कोई आधिकारिक निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसलिए इन दावों को तथ्य के रूप में स्थापित नहीं माना जा सकता।
तबादलों को लेकर भी उठाए सवाल
वायरल सामग्री में कुछ न्यायिक अधिकारियों के तबादलों का उल्लेख करते हुए उन्हें इस विवाद से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
दस्तावेज में तत्कालीन बूंदी एडीजे और जिला न्यायाधीश के तबादलों के साथ-साथ एक हाईकोर्ट जज की पत्नी के स्थानांतरण का भी जिक्र है।
ये सभी दावे वायरल सामग्री की व्याख्या और आरोपों के रूप में प्रस्तुत किए गए हैं, न कि किसी जांच एजेंसी या न्यायिक आदेश के निष्कर्ष के तौर पर।
31 अगस्त को फिर हाईकोर्ट में सुनवाई
सामग्री के अनुसार, बदले हुए रोस्टर के तहत संबंधित मामला 31 अगस्त 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकलपीठ में सूचीबद्ध है।
कुल मिलाकर, ‘बूंदी की 324 बीघा जमीन’ को लेकर वायरल यह कहानी ऐसे समय सामने आई है, जब राजस्थान की न्यायपालिका को लेकर पहले से ही कई सवाल और विवाद चर्चा में हैं।
लेकिन वायरल सामग्री में किए गए गंभीर आरोपों की आधिकारिक जांच या स्वतंत्र पुष्टि सामने आना अभी बाकी है। ऐसे में आरोपों और तथ्यों के बीच अंतर करना बेहद जरूरी है।
इस मामले में किसी भी पक्ष की प्रतिक्रिया या कोई भी जवाब प्राप्त होने पर इस समाचार में सम्मिलित किया जाएगा।
गौरतलब हैं सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लिखे गए पत्र में कई दावे किए गए थे. जिस पर फिलहाल सीजेआई सूर्यकांत ने कॉलेजियम के समक्ष रखे जाने की बात कही हैं.
