तिजारा नगर पालिका चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले राम अवतार सैनी ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका, पार्षदों को वोट देने से रोकने और पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने के आरोप
जयपुर। राजस्थान के तिजारा नगर परिषद चेयरमैन चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
चुनाव से पहले करीब 18 निर्वाचित पार्षदों को कथित रूप से तिजारा से बाहर ले जाकर हरियाणा के पंचकूला के पास एक स्थान पर बंधक बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ में याचिका दायर की गई है।
एडवोकेट पुनित सिंघवी के जरिए यह याचिका तिजारा नगर परिषद के वार्ड संख्या 33 से निर्वाचित पार्षद और चेयरमैन पद के उम्मीदवार राम अवतार सैनी की ओर से दायर की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि उनके समर्थन वाले करीब 18 पार्षदों को इस उद्देश्य से तिजारा से बाहर ले जाया गया कि वे चेयरमैन चुनाव में मतदान के लिए निर्धारित स्थान तक नहीं पहुंच सकें।
याचिका में यह भी कहा गया है कि इन पार्षदों में सात महिलाएं शामिल हैं।
जस्टिस अनुप कुमार ढंड की विशेष एकलपीठ थेाड़ी देर में मामले पर सुनवाई करेगी.
चुनाव आज, सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बैठक
याचिका के अनुसार तिजारा नगर परिषद के चेयरमैन पद का चुनाव 21 सितंबर 2026 को निर्धारित किया गया था। इसके लिए बैठक का समय सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक तय किया गया है।
याचिकाकर्ता का दावा है कि नगर परिषद के निर्वाचित पार्षदों में उनके समर्थन में स्पष्ट बहुमत है। याचिका में भाजपा समर्थित प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुभाष सैनी को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
पंचकूला के पास पार्षदों को रोके जाने का आरोप
याचिका में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा गया है कि करीब 18 पार्षदों को हिमाचल प्रदेश से ट्रेनिंग कैंप से लौटते समय तिजारा के पास से कथित तौर पर ले जाया गया और पंचकूला, हरियाणा के पास एक स्थान पर रोके रखा गया।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि इनमें से कुछ पार्षदों ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर स्वयं को एक अज्ञात स्थान पर रखे जाने और वहां से स्वतंत्र रूप से जाने में असमर्थ होने की बात कही।
याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि पार्षदों पर अपनी राजनीतिक निष्ठा बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। इन वीडियो रिकॉर्डिंग को पेन ड्राइव के माध्यम से अदालत के समक्ष पेश करने की बात याचिका में कही गई है।
पुलिस में शिकायत, FIR दर्ज नहीं होने का आरोप
याचिका के अनुसार राम अवतार सैनी ने 21 सितंबर 2026 को सुबह करीब 4:30 बजे तिजारा थाना प्रभारी को लिखित शिकायत दी।
शिकायत में FIR दर्ज करने, कथित रूप से रोके गए पार्षदों को मुक्त कराने तथा उन्हें मतदान करने की अनुमति देने की मांग की गई। याचिका में दावा किया गया है कि शिकायत के बावजूद FIR दर्ज नहीं की गई और तत्काल कार्रवाई नहीं हुई।
याचिकाकर्ता ने स्वयं और अन्य पार्षदों के लिए पुलिस सुरक्षा की भी मांग की है। याचिका में आशंका जताई गई है कि जो पार्षद अभी स्वतंत्र हैं, उन्हें भी मतदान स्थल तक पहुंचने से रोका जा सकता है।
विधायक बाबा बालकनाथ सहित 10 लोगों को बनाया पक्षकार
याचिका में तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ और चेयरमैन पद के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार सुभाष सैनी सहित राज्य सरकार, पुलिस अधिकारियों, जिला प्रशासन, राज्य निर्वाचन आयोग और निर्वाचन अधिकारी को पक्षकार बनाया गया है।
हालांकि, इन सभी के खिलाफ लगाए गए आरोप याचिकाकर्ता के दावे हैं और इनका न्यायिक निर्धारण होना बाकी है।
याचिका में इन्हे बनाया पक्षकार
याचिका में विधायक बाबा बालकनाथ के साथ ही राज्य के गृहसचिव, प्रमुख सचिव एलएसजी, राज्य निर्वाचन आयुक्त, डीजीपी, जिला कलेक्टर खैरथल तिजारा, एसएचओ तिजारा , रिटर्निग अधिकारी तिजारा नगर पालिका और चैयरमेन पद के प्रत्याशी सुभाष सैनी को भी मामले में पक्षकार बनाया गया हैं.
हाईकोर्ट से चुनाव स्थगित करने सहित कई मांगें
याचिका में राजस्थान हाईकोर्ट से मांग की गई है कि कथित रूप से रोके गए पार्षदों को मुक्त कराने और उन्हें सुरक्षित रूप से मतदान स्थल तक पहुंचाने के लिए पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने तिजारा नगर परिषद चेयरमैन का चुनाव तब तक स्थगित करने की मांग की है, जब तक संबंधित पार्षद स्वतंत्र होकर बैठक में शामिल होकर मतदान करने की स्थिति में न आ जाएं।
याचिका में राज्य निर्वाचन आयोग से स्वतंत्र पर्यवेक्षक नियुक्त करने और चुनाव प्रक्रिया की पूरी वीडियोग्राफी कराने की मांग भी की गई है।
याचिका में चुनाव की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट के समक्ष तर्क दिया है कि यदि निर्वाचित पार्षदों का एक बड़ा हिस्सा मतदान से बाहर रहता है, तो चेयरमैन का चुनाव स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से नहीं हो सकेगा। याचिका में चुनाव आयोग की संवैधानिक भूमिका और पार्षदों के मतदान के अधिकार का भी उल्लेख किया गया है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक है और इसी आधार पर अवकाश के दिन तत्काल सुनवाई के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।
