टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

जस्टिस विक्रम नाथ ने लॉन्च की एडवोकेट जयंत मोहन की किताब ‘Gods and Maharajas’, धार्मिक अधिकारों से जुड़े पुराने मुकदमों पर हुई चर्चा

Supreme Court Justice Vikram Nath Launches ‘Gods and Maharajas’, Discusses Historic Religious Rights Disputes

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ ने नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम में एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड जयंत मोहन की किताब ‘Gods and Maharajas’ का विमोचन किया।

कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राणा मुखर्जी और सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष देवव्रत भी शामिल हुए। इसका आयोजन सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के बुक क्लब ‘Flipping Pages’ ने किया था।

इस दौरान किताब में शामिल विषयों और धार्मिक अधिकारों से जुड़े कानूनी पहलुओं पर चर्चा हुई। कानूनी विशेषज्ञों ने आजादी से पहले के दौर में धार्मिक अधिकारों और मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े विवादों पर विचार साझा किए।

12 लेखों में पुराने कानूनी विवादों की पड़ताल

‘Gods and Maharajas’ में 12 लेख शामिल हैं। इनमें एक सदी से भी पुराने व्यक्तिगत और धार्मिक अधिकारों से जुड़े विवादों और उन पर अदालतों के फैसलों की पड़ताल की गई है।

इन मामलों के जरिए समझाया गया है कि धार्मिक अधिकारों और मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े विवादों पर अदालतों ने किस तरह विचार किया और क्या फैसले दिए।

नाथद्वारा, कामाख्या मंदिर और पारसनाथ से जुड़े विवादों पर चर्चा

किताब के विमोचन के बाद आयोजित चर्चा में नाथद्वारा और कामाख्या मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े मुकदमों पर बात हुई।

इसके साथ ही जैन समुदाय के पवित्र तीर्थस्थल पारसनाथ पहाड़ी से जुड़े विवादों पर भी चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने बताया कि इन मामलों में धार्मिक आस्था और मंदिरों के प्रबंधन से जुड़े सवालों पर अदालतों ने किस तरह विचार किया।

संविधान के अनुच्छेद 25 और पूजा के अधिकार पर मंथन

इस दौरान चर्चा में संविधान के अनुच्छेद 25 के दायरे और धार्मिक आस्था से जुड़े अधिकारों पर इसके असर को भी समझा गया।

अनुच्छेद 25 नागरिकों को धर्म मानने, उसका पालन करने और उसका प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है। हालांकि, यह स्वतंत्रता सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता, स्वास्थ्य और संविधान के अन्य प्रावधानों के अधीन है।

विशेषज्ञों ने चर्चा की कि धार्मिक स्थलों और पूजा के अधिकार से जुड़े विवादों में इस अनुच्छेद 25 की क्या भूमिका रही है।

सबरीमाला और कामाख्या मंदिर के मामलों के अनुभव साझा किए

वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कामाख्या मंदिर के प्रबंधन और सबरीमाला मंदिर में एक विशेष आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश से जुड़े मामलों में पैरवी के अपने अनुभव साझा किए।

चर्चा में वरिष्ठ अधिवक्ता राणा मुखर्जी, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (SCAORA) के अध्यक्ष देवव्रत, एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अनु श्रीवास्तव और किताब के लेखक जयंत मोहन भी शामिल हुए।

वकीलों में पढ़ने-लिखने की आदत को बढ़ावा देने पर जोर

वकीलों में पढ़ने-लिखने की संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर

सीनियर एडवोकेट राणा मुखर्जी ने बुक क्लब शुरू करने के विचार पर बात की। उन्होंने कहा कि वकीलों को किताबें और लेख पढ़ने के साथ-साथ लिखने के लिए भी प्रोत्साहित करना जरूरी है।

उन्होंने मौजूदा तकनीक-आधारित माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में पढ़ने-लिखने के लिए समय निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में कानूनी विषयों पर किताबों और लेखों के जरिए चर्चा की पहल अहम है।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन के अध्यक्ष देवव्रत ने युवा वकीलों और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड की ओर से आयोजित पुस्तक चर्चा और समीक्षा कार्यक्रमों को प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा कि ऐसी पहल कानूनी पेशे से जुड़े लोगों के ज्ञान और समझ को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।

लेखक जयंत मोहन के पुस्तक पर हस्ताक्षर सत्र और किताब में उठाए गए कानूनी मुद्दों पर प्रतिभागियों के बीच चर्चा के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

सबसे अधिक लोकप्रिय