टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

वरिष्ठ अधिवक्ता भरत व्यास बने राजस्थान के नए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल

जयपुर, 19 सितंबर।

राजस्थान हाईकोर्ट के डेज़िगने​टेड सीनियर एडवोकेट और राज्य सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे भरत व्यास को राजस्थान का नया एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) नियुक्त किया गया है। भरत व्यास 1 अक्टूबर 2025 से अगले तीन वर्षों तक इस पद का कार्यभार संभालेंगे।

कैबिनेट की अपॉइंटमेंट्स कमेटी (ACC) की ओर से मंजूरी मिलने के बाद शुक्रवार देर शाम उनकी नियुक्ति का आदेश जारी किया गया।

वर्तमान में राजस्थान के एएसजी पद पर सीनियर एडवोकेट आर. डी. रस्तोगी कार्यरत हैं। वे 2014 से लगातार पाँच बार इस पद पर बने रहे, लेकिन उनका कार्यकाल आगामी 30 सितंबर को समाप्त हो जाएगा।

भरत व्यास की नियुक्ति पर विधि जगत में खुशी की लहर है। राजस्थान सहित देशभर से न्यायिक क्षेत्र से जुड़ी हस्तियाँ उन्हें बधाई और शुभकामनाएँ दे रही हैं।

निर्वतमान एएसजी आर. डी. रस्तोगी सहित राजस्थान हाईकोर्ट के कई जज, सीनियर एडवोकेट, बार संगठनों के प्रतिनिधि और न्यायिक अधिकारी लगातार उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं.

चार दशक का अनुभव

वरिष्ठ अधिवक्ता भरत व्यास राजस्थान के प्रतिष्ठित वरिष्ठ अधिवक्ता में शामिल हैं जो वर्ष 1984 से लगातार राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर और जोधपुर पीठ में प्रैक्टिस कर रहे हैं.

उन्होने अपने 40 वर्ष से अधिक के पेशेवर जीवन में न्यायिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.

भरत व्यास वर्ष 1999 से 2003 तक राजस्थान हाईकोर्ट में भारत सरकार के सहायक सॉलिसिटर जनरल रह चुके हैं.

वर्ष 2003 से 2008 तक वसुंधरा राजे सरकार में राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे है।.

वर्तमान बीजेपी सरकार के साथ ही उन्हे 12 फरवरी 2024 से राजस्थान में अतिरिक्त महाधिवक्ता नियुक्त किया गया.

इसके साथ 1999 से 2017 तक विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) और अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) के स्थायी अधिवक्ता रहे हैं.

जयपुर विकास प्राधिकरण के लिए भरत व्यास 1994 से 2008 तक स्थायी अधिवक्ता रहे हैं.

वही भरत व्यास ने राजस्थान वित्त निगम (RFC), राजस्थान औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO), एमडीएस विश्वविद्यालय अजमेर, जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी, महात्मा गांधी मेडिकल साइंसेज यूनिवर्सिटी जयपुर, जयपुर विद्युत वितरण निगम (JVVNL) सहित कई संस्थाओं के​ लिए भी प्रतिनिधित्व किया हैं.

9500 से अधिक मुकदमें

भरत व्यास अब तक 9500 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं, जिनमें परिवहन, भूमि अधिग्रहण, दुर्घटना दावे, राजस्व, किराया नियंत्रण, सेवा मामलों और सार्वजनिक खरीद से जुड़े मुद्दे प्रमुख हैं.

एक अधिवक्ता के रूप में भरत व्यास ने अपना दायरा सिर्फ राजस्थान हाईकोर्ट तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, देश के एक दर्जन से अधिक हाईकोर्ट, सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT), राजस्थान प्रशासनिक ट्रिब्यूनल, डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल, उपभोक्ता विवाद आयोग, फैमिली कोर्ट, लेबर कोर्ट और एनसीएलटी (NCLT) में भी उन्होने लंबे समय तक पैरवी की हैं.

जोधपुर से जयपुर

जोधपुर में जन्में भरत व्यास की प्राथमिक शिक्षा जोधपुर में ही हुई.

जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय से उन्होने बी.कॉम, एलएल.बी. की डिग्री हासिल की.

अपने करियर के शुरुआती दौर में भरत व्यास ने वरिष्ठ अधिवक्ता एम.एम. व्यास, आर.आर. व्यास तथा राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एम.आर. काला के साथ प्रेक्टिस कर चुके हैं.

राज्य की सभी विश्वविद्यालयों में विधि स्नातक पाठ्यक्रम में टॉपर रहने पर वर्ष 1984 में उन्हे के.एन. वांचू स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया.

अरूण जेटली टीम के रहे सदस्य

भरत व्यास महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन के भामाशाह पुरस्कार से भी सम्मानित हो चुके हैं.

अधिवक्ता के रूप में पंजीकृत होने के बाद भरत व्यास अधिकांश समय जयपुर में ही रहे.

भरत व्यास को पूर्व वित्तमंत्री अरूण जेटली के कोर टीम का सदस्य माना जाता हैं. भरत व्यास एक लंबे समय तक अरूण जेटली के अधिवक्ता टीम में ​शामिल रहें.

सबसे अधिक लोकप्रिय