जयपुर/जोधपुर, 29 अक्टूबर
राजस्थान की न्यायपालिका के इतिहास में आज का दिन एक यादगार अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।
29 अक्टूबर 2021 को पद ग्रहण करने वाली राजस्थान हाईकोर्ट की वरिष्ठ जज जस्टिस रेखा बोराणा ने आज चार वर्ष का न्यायिक कार्यकाल पूर्ण किया है। उनका कार्यकाल 1 दिसंबर 2035 तक है।
यह न केवल जस्टिस रेखा बोराणा के व्यक्तिगत जीवन में समर्पण और निष्ठा का प्रतीक है, बल्कि राजस्थान की न्यायिक परंपरा में महिला सशक्तिकरण का प्रतीक भी है।
पहली महिला जज
देश की आज़ादी और राजस्थान के गठन के बाद 1949 में स्थापित हुए राजस्थान हाईकोर्ट में अधिवक्ता कोटे से जज नियुक्त होने वाली पहली महिला न्यायाधीश के रूप में जस्टिस रेखा बोराणा का नाम दर्ज है।
जस्टिस रेखा बोराणा की नियुक्ति से पहले राजस्थान की न्यायपालिका में मूल राजस्थान से न्यायिक कोटे से 5 महिला जजों की नियुक्ति हो चुकी थी,
लेकिन अधिवक्ता कोटे से किसी महिला का चयन करने में न्यायपालिका को लगभग 7 दशक लग गए।
जस्टिस रेखा बोराणा की नियुक्ति ने राजस्थान की न्यायपालिका में वाकई एक नए अध्याय की शुरुआत की है, क्योंकि उनके बाद से हर बार राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम एक महिला का नाम ज़रूर भेज रहा है।
जस्टिस रेखा बोराणा के बाद जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की नियुक्ति ने राजस्थान की महिला अधिवक्ताओं के लिए न्यायिक क्षेत्र में प्रवेश की राह और भी आसान कर दी है.
अब महिला अधिवक्ताओं में यह उम्मीद बनी है कि उनकी उम्मीदवारी को गंभीरता से देखा जाएगा।
RAS की नौकरी छोड़कर न्यायपालिका का रास्ता
2 दिसंबर 1972 को जोधपुर में जन्मी जस्टिस रेखा बोराणा ने जोधपुर से ही बी.ए. और एल.एल.एम. की डिग्री हासिल की।
वर्ष 1997 में उनका चयन राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) में हुआ था, परंतु उन्होंने प्रशासनिक सेवा छोड़कर न्यायिक पेशे को चुना -यह एक ऐसा निर्णय था जिसने उन्हें प्रदेश की न्यायपालिका के उच्चतम शिखर तक पहुँचाया।
नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने अधिवक्ता के रूप में जोधपुर जिला अदालत और राजस्थान हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की.
दीवानी मामलों में वर्षों तक प्रैक्टिस की और अरबिट्रेशन (विवाद समाधान) मामलों में विशेषज्ञता हासिल की।
जस्टिस रेखा बोराणा राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर की पहली महिला महासचिव भी रही हैं।
वे राजस्थान सरकार की अतिरिक्त महाधिवक्ता (Additional Advocate General) के रूप में भी कार्य कर चुकी हैं।
उन्हें 8 जनवरी 2019 को इस पद पर नियुक्त किया गया था और जज नियुक्त होने तक उन्होंने यह दायित्व निभाया।
चार महिला जज
राजस्थान हाईकोर्ट में वर्तमान में 4 महिला जज कार्यरत हैं -अधिवक्ता कोटे से जस्टिस रेखा बोराणा और जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी, जबकि न्यायिक अधिकारी कोटे से जस्टिस शुभा मेहता और जस्टिस संगीता शर्मा शामिल हैं.
राजस्थान की न्यायपालिका में एक ही समय में महिलाओं के प्रतिनिधित्व का यह सर्वोत्तम काल कहा जा सकता है।
हाईकोर्ट में स्वीकृत 50 पदों में से मात्र 4 महिला जज होना अनुपातिक रूप से भले ही कम है, लेकिन इतिहास को देखते हुए यह आंकड़ा गर्व का विषय कहा जा सकता है.
क्योंकि लंबे समय तक महिला जजों की नियुक्ति अनुपात के अनुसार कभी पूरी नहीं हो पाई.
वर्तमान समय में अधिवक्ता और न्यायिक कोटे से 2-2 महिला जज होना उन युवा महिला अधिवक्ताओं के लिए बेहद प्रेरणादायक है जो संघर्ष के बाद इस पेशे में अपनी जगह बना रही हैं।
कुल 14 महिला जज
29 अगस्त 1949 को राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना से लेकर अब तक, वर्तमान में कार्यरत 39 जजों सहित कुल 243 जजों की नियुक्ति हो चुकी है।
इन 243 में से महिला जजों की संख्या मात्र 14 रही है. इन 14 में दूसरे हाईकोर्ट से तबादले के माध्यम से आई महिला जजों के नाम भी शामिल हैं।
इनमें से 3 महिला जज पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और 1 महिला जज गुजरात हाईकोर्ट से व अन्य हाईकोर्ट से 2 तबादले के बाद राजस्थान हाईकोर्ट में नियुक्त हुईं.
जस्टिस सबीना पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से तबादले के बाद 11 अप्रैल 2016 को राजस्थान हाईकोर्ट में नियुक्त हुई थीं।
अब तक अधिवक्ता कोटे से मूल राजस्थान हाईकोर्ट की केवल 2 महिला अधिवक्ताओं की ही जज के रूप में नियुक्ति हुई है —
जस्टिस रेखा बोराणा और जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी।
राजस्थान हाईकोर्ट की अब तक की 14 महिला जज
- जस्टिस कांता भटनागर — 26 सितंबर 1978 से 14 जून 1992
- जस्टिस मोहिनी कपूर — 13 जुलाई 1985 से 17 नवंबर 1995
- जस्टिस ज्ञान सुधा मिश्रा – 21 अप्रेल 1994 से 13 जुलाई 2008 तक
- जस्टिस मीना वी. गोंबर — 19 सितंबर 2009 से 30 जुलाई 2013
- जस्टिस निशा गुप्ता — 28 अप्रैल 2011 से 12 सितंबर 2015
- जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी — 17 फरवरी 2011 से 8 फरवरी 2016
- जस्टिस जयश्री ठाकुर — 5 जनवरी 2015 से 5 अक्टूबर 2016
- जस्टिस कुमारी निर्मलजीत कौर — 9 जुलाई 2012 से 20 नवंबर 2018
- जस्टिस सबीना — 11 अप्रैल 2016 से 7 अक्टूबर 2021
- जस्टिस प्रभा शर्मा — 6 मार्च 2020 से 4 नवंबर 2020
- जस्टिस रेखा बोराणा — 28 अक्टूबर 2021 से निरंतर
- जस्टिस शुभा मेहता — 6 जून 2022 से निरंतर
- जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी — 16 जनवरी 2023 से निरंतर
- जस्टिस संगीता शर्मा — 23 जुलाई 2025 से निरंतर
शीतल मिर्धा की नियुक्ति का इंतजार
राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम द्वारा 2023 में अधिवक्ता कोटे से जिन नामों की सिफारिश की गई थी,
उनमें सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देने की बात कही गई थी, लेकिन 14 नामों में से केवल एक महिला नाम भेजा गया था।
2024 में राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम ने सकारात्मक कदम बढ़ाते हुए दो महिलाओं —
अधिवक्ता शीतल मिर्धा और डीजे संगीता शर्मा — के नामों की सिफारिश की।
राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम ने अधिवक्ता कोटे से शीतल मिर्धा का नाम हाईकोर्ट जज के लिए सुप्रीम कोर्ट को भेजा था।
लंबे इंतजार के बाद सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 5 मार्च 2025 को अधिवक्ता शीतल मिर्धा के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेज दी।
8 माह बीत जाने के बाद भी अधिवक्ता शीतल मिर्धा की नियुक्ति का इंतजार जारी है. केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा राजस्थान के लिए की गई अन्य सभी सिफारिशें मंजूर कर लीं,
लेकिन केवल अधिवक्ता शीतल मिर्धा का नाम पिछले 8 महीनों से कानून मंत्रालय में लंबित है. अगस्त में शीतल मिर्धा के नाम की फाइल अपडेट हुई थी, लेकिन अब तक नियुक्ति वारंट जारी नहीं हो पाया है.
दशकों लगे नियुक्ति में
1950 में सुप्रीम कोर्ट के नए रूप में गठन के बाद पहली महिला न्यायाधीश मिलने में चार दशक का वक्त लगा.
6 अक्टूबर 1989 वो ऐतिहासिक दिन रहा जब जस्टिस फातिमा बीवी को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया था.
लेकिन सुप्रीम कोर्ट में वकील कोटे से किसी महिला के न्यायाधीश बनने में 68 साल का वक्त लगा…
वर्ष 2018 में वकील कोटे से जस्टिस इंदु मल्होत्रा को जज नियुक्त किया गया था.
राजस्थान हाईकोर्ट को भी पहली महिला जज मिलने में करीब 39 साल का वक्त लगा.
राजस्थान हाईकोर्ट की स्थापना के करीब चार दशक बाद 1978 में पहली महिला जज के रूप में जस्टिस कांता भटनागर की नियुक्ति कि गयी थी.
राजस्थान हाईकोर्ट कि स्थापना के 7 दशक तक मात्र 5 महिला जजो को न्यायिक कोटे से जज नियुक्त किया गया था.
अधिवक्ता कोटे से नियुक्ति की शुरूआत जस्टिस रेखा बोराणा की नियुक्ति से ही हुई.
उम्मीद…
राष्टपिता महात्मा गांधी ने कहा था जिस बात को हम खुद पर लागू नही करते उस पर दूसरो को उपदेश नही दे सकते……
न्यायपालिका को हम इस नजरिये से नही तौल सकते लेकिन ये भी एक कडवा सच है कि न्याय की सर्वोच्च संस्थाओं में अब भी महिलाओं को सम्मान की दरकार है.
उम्मीद है कि आने वाले समय में इन संस्थाओं में भी महिलाओं की भागीदारी बढेगी.