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भ्रष्टाचार के आरोपी पूर्व RAS भंवरलाल मेहरड़ा को पदोन्नति देने के आदेश, सिविल सेवा अधिकरण का बड़ा फैसला

Rajasthan Civil Services Tribunal Orders Promotion of Former RAS Officer Accused of Corruption

जयपुर, 7 नवंबर 2025

राजस्थान सिविल सेवा अधिकरण RCSAT ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए भ्रष्टाचार के आरोपी रहे पूर्व RAS अधिकारी भंवरलाल मेहरड़ा को निर्धारित तिथि से पदोन्नति सहित समस्त परिणामिक लाभ प्रदान करने के आदेश दिए हैं।

अधिकरण के अध्यक्ष विकास सीतारामजी भाले और सदस्य पूनम दरगन की पीठ ने यह आदेश भंवरलाल मेहरड़ा की ओर से दायर याचिका पर दिया है।

भ्रष्टाचार के आरोपों में निलंबन के बाद बहाल किए गए भंवरलाल मेहरड़ा की पदोन्नति की फाइल को सीलबंद लिफाफे में रखा गया है।

अधिकरण ने अब इस मामले में भंवरलाल मेहरड़ा के पदोन्नति परिणाम को सीलबंद लिफाफे से निकालकर घोषित करने के आदेश दिए हैं।

अधिकरण ने कहा है कि मेहरड़ा को 1 अप्रैल 2021 से आरएएस हायर सुपरटाइम स्केल पर सभी परिणामिक लाभों सहित पदोन्नति प्रदान की जाए।

इसके साथ ही, कार्मिक विभाग को तीन माह की अवधि में इस आदेश का पालन करने के भी आदेश दिए हैं।

मेहरड़ा की दलील

भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित हो चुके भंवरलाल मेहरड़ा की ओर से अधिवक्ता देवकृष्ण पुरोहित और मनीष सिंह तोमर ने पीठ के समक्ष दलील पेश करते हुए कहा कि —

अपीलार्थी मेहरड़ा को 1 अप्रैल 2021 की स्थिति में RAS हायर सुपरटाइम स्केल के पद पर पदोन्नति मिलनी चाहिए थी।

निलंबन के कारण उनके पदोन्नति परिणाम को “सीलबंद लिफाफे” में रख दिया गया था।

विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) द्वारा की गई अनुशंसा को खोला नहीं गया, जबकि उनके विरुद्ध कोई विभागीय जांच लंबित नहीं है और न ही अदालत द्वारा अब तक आरोप तय किए गए हैं।

अपीलार्थी के अधिवक्ता देवकृष्ण पुरोहित ने कहा कि मेहरड़ा को राजनीतिक व प्रशासनिक कारणों से झूठा फंसाया गया था।

अधिवक्ता ने कहा कि अधिकरण के पूर्व आदेश के तहत मेहरड़ा को निलंबन से बहाल किया जा चुका था और न ही कोई आपराधिक या विभागीय जांच लंबित है। इसके बावजूद विभाग ने उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं दिया।

अधिवक्ता ने अधिकरण को बताया कि अपीलार्थी भंवरलाल मेहरड़ा बाद में हरदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर में रजिस्ट्रार पद पर कार्यरत रहते हुए सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें उनकी सेवा अवधि में मिलने वाले पदोन्नति लाभों से वंचित रखा गया।

सिंघवी और श्रीवास्तव का उदाहरण

अधिवक्ता ने दलील दी कि राज्य सरकार के परिपत्र दिनांक 4 जून 2008 के अनुसार, यदि कोई अधिकारी निलंबन से बहाल हो जाता है, तो उसे पदोन्नति का हक प्राप्त होता है।

अधिवक्ता ने आईएएस अधिकारी अशोक कुमार सिंघवी और रविशंकर श्रीवास्तव का उदाहरण रखते हुए कहा कि दोनों को लंबित आपराधिक मामलों के बावजूद पदोन्नति दी गई थी।

सरकार का विरोध

राज्य सरकार की ओर से राजकीय अधिवक्ता मनीष सिंह तोमर ने अपील का विरोध करते हुए कहा कि चूंकि भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में मामला लंबित है, इसलिए पदोन्नति हेतु सीलबंद लिफाफा तभी खोला जा सकता है जब अदालत का अंतिम निर्णय आ जाए।

अधिकरण का आदेश

दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अधिकरण ने सुप्रीम कोर्ट के Union of India vs K.V. Jankiraman (1991 SCC 109) फैसले का हवाला देते हुए कहा कि –

“यदि कोई अधिकारी निलंबन से बहाल हो जाता है और उसके विरुद्ध न तो कोई विभागीय जांच लंबित है, न ही उसे दोषसिद्ध ठहराया गया है, तो सीलबंद लिफाफे में रखी गई पदोन्नति अनुशंसा को खोला जाना चाहिए।”

अधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि विभागीय पदोन्नति समिति के समक्ष मामला दोबारा रखने की आवश्यकता नहीं है; संबंधित प्राधिकारी सीधे लिफाफा खोलकर परिणाम घोषित कर सकता है।

अधिकरण की खंडपीठ ने कहा कि जब अपीलार्थी के विरुद्ध कोई विभागीय या आपराधिक कार्यवाही लंबित नहीं थी, तो उन्हें पदोन्नति का लाभ न देना न्यायसंगत नहीं है।

अधिकरण ने कार्मिक विभाग को तीन माह में मेहरड़ा को पदोन्नति के साथ सभी परिणामिक लाभ — जैसे वेतन, पेंशन, भत्ते आदि देने के आदेश दिए हैं।

भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार

भंवरलाल मेहरड़ा को राजस्व मंडल, अजमेर में सदस्य पद पर कार्य करते समय भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2021 में गिरफ्तार किया था।

एसीबी ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 7 और 8 सहित भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी व 201 के तहत आरोपी बनाया था।

मेहरड़ा को 11 अप्रैल 2021 को गिरफ्तार कर लिया गया था और 48 घंटे से अधिक न्यायिक हिरासत में रहने के कारण उन्हें राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के अंतर्गत निलंबित कर दिया गया।

बाद में, 28 जून 2023 को राज्य सरकार ने उन्हें निलंबन से बहाल कर दिया।

भंवरलाल मेहरड़ा बाद में हरदेव जोशी पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, जयपुर में रजिस्ट्रार पद पर कार्यरत रहते हुए सेवानिवृत्त हो चुके हैं।

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