टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् का 17 वां राष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न, समापन समारोह में न्याय व्यवस्था को मज़बूत बनाने का प्रस्ताव पारित

Resolution Adopted to Strengthen India’s Justice Delivery System at AIBC National Convention

जोधपुर/बालोतरा। अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् का 17 वां राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को अपने तीसरे और अंतिम दिन देश की न्याय व्यवस्था को सुदृढ़ करने के महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित करने के साथ ही संपन्न हुआ.

शुक्रवार को शुरू हुए इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में 6 तकनीकि सत्रों का आयोजन किया गया हैं.

इन तकनीकी सत्रों में हुए विचार विमर्श के आधार पर समापन समारोह में विशेष प्रस्ताव पारित किया गया. प्रस्ताव में न्यायिक ढांचे से जुड़ी वर्तमान चुनौतियों पर गहन मंथन करते हुए समयबद्ध न्यायिक नियुक्तियों को अत्यंत आवश्यक बताया गया।

अधिवेशन में देशभर से आए अधिवक्ताओं, विधि विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने अपने-अपने अनुभव साझा किए।

चर्चा के दौरान सर्वसम्मति से यह निष्कर्ष निकाला गया कि देश की न्यायपालिका में जजों की भारी कमी और नियुक्तियों में लगातार हो रही देरी के कारण न्याय व्यवस्था पर गंभीर दबाव बना हुआ है।

निष्कर्ष में यह भी कि देशभर के हाईकोर्ट सहित अधीनस्थ अदालतों में बड़ी संख्या में पद रिक्त पड़े हैं, जिससे मामलों के निस्तारण में अत्यधिक देरी हो रही हैं.

प्रस्ताव में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई कि अदालतों में लंबित मामलों की बढ़ती संख्या का सबसे अधिक दुष्प्रभाव आम नागरिकों पर पड़ रहा है।

प्रस्ताव में कहा गया कि विशेष रूप से गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग वर्षों तक न्याय के इंतजार में संघर्ष करने को मजबूर हैं। यह स्थिति न केवल न्याय तक समान पहुंच के अधिकार को प्रभावित करती है, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त त्वरित न्याय के मूल सिद्धांत के भी प्रतिकूल है.

अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद् ने अपने प्रस्ताव में स्पष्ट किया कि समय पर न्यायिक पदों को न भरना संस्थागत दक्षता को कमजोर करता है। इससे कानून के शासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और न्यायपालिका की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिपह्न लगता है।

प्रस्ताव के अनुसार परिषद् का मत है कि यदि न्यायपालिका को सशक्त और प्रभावी बनाए रखना है, तो न्यायिक शक्ति का संरक्षण और संवर्धन अनिवार्य है।

प्रस्ताव के माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकारों से यह मांग की गई कि वे अदालतों में रिक्त पदों को शीघ्र भरने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाएं।

इसके साथ ही न्यायिक नियुक्तियों की प्रक्रिया को पारदर्शी, समयबद्ध और सुचारु बनाने पर भी जोर दिया गया।

अधिवेशन में यह भी कहा गया कि सशक्त न्याय व्यवस्था लोकतंत्र की रीढ़ होती है। प्रत्येक नागरिक को सुलभ, प्रभावी और समय पर न्याय मिल सके, इसके लिए सभी संवैधानिक संस्थाओं को सामूहिक जिम्मेदारी निभानी होगी।

सबसे अधिक लोकप्रिय