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इंदौर में दूषित जल मामले के बाद जयपुर में प्रतिदिन 8–10 दूषित जल की शिकायतें, राज्य मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

Jaipur Reports 8–10 Daily Contaminated Water Complaints After Indore Incident; State Human Rights Commission Takes Cognizance
दैनिक नवज्योति में प्रकाशित रिपोर्ट पर आयोग चेयरमैन जस्टिस जी. आर. मूलचंदानी ने लिया संज्ञान, 16 फरवरी तक सरकार को पालना रिपोर्ट पेश करने का आदेश

जयपुर। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने मध्यप्रदेश के इंदौर में दूषित जल आपूर्ति से हुई मौतों और कई लोगों के बीमार पड़ने की घटना को देखते हुए जयपुर सहित राज्य के कई शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में दूषित पानी की शिकायतों को लेकर संज्ञान लिया है।

आयोग ने राज्य सरकार, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग, प्रदेश के सभी संभागीय आयुक्तों, जिला कलेक्टरों, स्थानीय निकायों और संबंधित अभियंताओं को निर्देश दिए हैं कि वे विशेष अभियान चलाकर पेयजल स्रोतों, पाइपलाइनों और टैंकों की गहन जांच कराएं।

मानवाधिकार आयोग के चेयरमैन जस्टिस जी. आर. मूलचंदानी ने संज्ञान लेते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं केवल चेतावनी नहीं, बल्कि प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय हैं।

आयोग ने माना कि दूषित जल से जुड़ी घटनाएं मानव संवेदनाओं को झकझोरने वाली हैं और यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।

आयोग ने जयपुर के परकोटा क्षेत्र, झोटवाड़ा, मुरलीपुरा, सोडाला, सुषीलपुरा और महेशनगर से मिल रही लगातार दूषित पेयजल की शिकायतों को गंभीरता से लिया है।

आयोग ने कहा कि दूषित जल के लिए सीवर चैंबर के ओवरफ्लो, पुरानी और क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों में लीकेज, कम दबाव के दौरान गंदे पानी का पाइपों में प्रवेश और बिना जांच के टैंकरों से पानी की आपूर्ति जैसे कारण प्रमुख रहे।

मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया कि दूषित जल का सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य पर पड़ता है। इसके सेवन से टायफाइड, पीलिया, हैजा, पेचिश, डायरिया और अन्य संक्रामक रोग फैलते हैं।

आयोग ने कहा कि लंबे समय तक दूषित पानी पीने से किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर भी गंभीर प्रभाव पड़ता है। यह स्थिति न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट को जन्म देती है, बल्कि जीवन के अधिकार का भी उल्लंघन करती है।

आयोग ने यह भी कहा कि जल की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए क्लोरीनेशन, फ्लशिंग और नियमित सैंपल जांच जैसी प्रक्रियाएं केवल कागजों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

प्रतिदिन 8 से 10 शिकायतें

आयोग द्वारा लिए गए संज्ञान में कहा गया कि जयपुर शहर की 40 लाख से अधिक आबादी में से लगभग 6 लाख पंजीकृत पेयजल उपभोक्ता हैं, और जयपुर में दूषित पानी की 8 से 10 शिकायतें प्रतिदिन फील्ड स्तर पर दर्ज हो रही हैं।

1 जनवरी 2026 तक शहर के विभिन्न क्षेत्रों से दूषित पानी की लगभग 15 औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं।

इनमें से 12 शिकायतों में यह तथ्य सामने आया कि सीवर चैंबर ओवरफ्लो, पाइपलाइन लीकेज और क्षतिग्रस्त लाइनों के कारण घरों में दूषित पानी की आपूर्ति हुई।

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