जयपुर। राज्य उपभोक्ता आयोग से बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान को बड़ी राहत देते हुए कोटा जिला उपभोक्ता आयोग के 26 दिसंबर 2025 के उस आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें सलमान खान को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने हस्ताक्षरों के नमूने देने के आदेश दिए गए थे.
राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायिक सदस्य निर्मल सिंह मेड़तवाल और सदस्य जय गौत्तम की खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक जिला आयोग कोटा के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
अभिनेता सलमान खान और राजश्री की ओर से दायर कि गयी रिवीजन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए आयोग ने ये आदेश दिया हैं.
ब्रांड एंबेसडर हैं सलमान
गौरतलब हैं कि राजश्री पान मसाला के विज्ञापन को लेकर जिला उपभोक्ता आयोग, कोटा में एक परिवाद दायर कर आरोप लगाया गया था कि ‘केसर युक्त इलायची’ और ‘केसर युक्त पान मसाला’ के नाम पर जनता को भ्रामक विज्ञापन के माध्यम से गुमराह किया जा रहा है।
इस मामले में सलमान खान ब्रांड एंबेसडर होने के चलते सलमान खान को भी पक्षकार बनाया गया.
इसी परिवाद में सलमान खान के वकील द्वारा पेश वकालतनामे और जवाब पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर आपत्ति जताई गई थी।
हस्ताक्षर की जांच के लिए तलब
परिवादी की मांग पर जिला उपभोक्ता आयोग ने सलमान खान के हस्ताक्षरों की एफएसएल जांच कराने का आदेश देते हुए उन्हें स्वयं उपस्थित होकर हस्ताक्षर का नमूना देने के आदेश दिए थे।
इस आदेश को चुनौती देते हुए राजश्री पान मसाला कंपनी और सलमान खान की ओर से राज्य उपभोक्ता आयोग में रिवीजन याचिका दायर की गई।
परिवादी उपभोक्ता नहीं
राज्य आयोग में सुनवाई के दौरान सलमान खान और कंपनी की ओर से दलील दी गई कि यह परिवाद पोषणीय (मेंटेनेबल) नहीं है।
अधिवक्ताओं ने कहा कि परिवाद दायर करने वाला व्यक्ति स्वयं उपभोक्ता नहीं है, बल्कि उसने स्वीकार किया है कि वह यह मामला जनहित में लेकर आया है।
जबकि उपभोक्ता आयोग का दायरा उपभोक्ताओं के व्यक्तिगत अधिकारों और हितों की रक्षा तक सीमित है।
ऐसे में जिला उपभोक्ता आयोग को पहले परिवाद की पोषणीयता पर निर्णय करना चाहिए था, न कि सीधे हस्ताक्षर जांच जैसे आदेश पारित करने चाहिए थे।
इसके अलावा यह भी तर्क दिया गया कि जिस विज्ञापन को पान मसाला का विज्ञापन बताया जा रहा है, वह वास्तव में सिल्वर कोटेड इलायची से संबंधित है, न कि पान मसाले से।
इसलिए विज्ञापन को लेकर लगाए गए आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत हैं।
4 लाख रूपऐं किलो
परिवादी इंद्रमोहन सिंह की ओर से आरोप लगाया गया था कि केसर की कीमत करीब 4 लाख रुपये प्रति किलो होती है, ऐसे में 5 रुपये के पाउच में ‘केसर युक्त’ उत्पाद बेचने का दावा भ्रामक है।
परिवाद में यह भी कहा गया कि ऐसे विज्ञापनों से युवा वर्ग पान मसाले के सेवन की ओर आकर्षित हो रहा है, जिससे कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने सभी दलीलों को सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग, कोटा के आदेश पर रोक लगाते हुए मामले को आगे की सुनवाई के लिए राज्य उपभोक्ता आयोग की सर्किट बेंच, कोटा को स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं।