जोधपुर। बार काउंसिल ऑफ राजस्थान के आगामी चुनाव को लेकर हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है।
चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और विवादों से मुक्त बनाने के लिए अब मतदान केंद्र (बूथ) के अंदर मोबाइल फोन, कैमरा या किसी भी प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
यह निर्णय पहली बार लागू किया गया है और इसे बार काउंसिल चुनाव के इतिहास में एक महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम माना जा रहा है।
कमेटी द्वारा जारी विस्तृत निर्देशों में साफ कहा गया है कि कोई भी मतदाता बूथ के अंदर मोबाइल, कैमरा या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेकर प्रवेश नहीं करेगा। यह नियम सभी मतदाताओं और प्रत्याशियों पर समान रूप से लागू होगा।
क्यों लिया गया इतना सख्त फैसला?
बार काउंसिल चुनाव हमेशा से अधिवक्ताओं के बीच प्रतिष्ठा, प्रभाव और प्रतिनिधित्व का अहम मंच रहा है।
लेकिन पिछले कुछ वर्षों में हुए बार चुनावों को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें सबसे बड़ी चिंता मतदान की गोपनीयता को लेकर थी।
सूत्रों के अनुसार, वर्तमान चुनाव समिति इस बार चुनाव को पूरी तरह निष्पक्ष और विवाद-मुक्त कराने के लिए विशेष रूप से सतर्क है।
आशंका जताई जा रही थी कि कुछ मतदाता वोट डालने के बाद अपने मत का प्रमाण देने के लिए मोबाइल से फोटो या वीडियो बना सकते हैं।
इसके बाद वे संबंधित प्रत्याशियों को यह दिखाकर कि उन्होंने किसे वोट दिया है, बदले में लाभ या प्रलोभन प्राप्त कर सकते हैं। इस तरह की गतिविधियां चुनाव की पारदर्शिता और स्वतंत्रता को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती हैं।
इतना ही नहीं, ऐसी संभावनाओं को लेकर चुनाव समिति को कुछ शिकायतें भी प्राप्त हुई थीं।
इन्हीं इनपुट्स और आशंकाओं को ध्यान में रखते हुए हाई-पावर्ड इलेक्शन कमेटी ने यह सख्त निर्णय लिया है।
समिति का स्पष्ट उद्देश्य है कि हर वोट पूरी तरह गोपनीय रहे और किसी भी प्रकार का दबाव, लालच या प्रलोभन मतदाता के निर्णय को प्रभावित न कर सके।
यह प्रवृत्ति न केवल चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती थी, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी कमजोर करती है।
इसी कारण इस बार समिति ने स्पष्ट रूप से तय किया है कि वोटिंग प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह का डिजिटल सबूत बनाना पूरी तरह रोका जाए।
पहली बार लागू हुआ नियम
बार काउंसिल चुनाव के इतिहास में यह पहली बार है जब इतने स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।
निर्देशों के अनुसार, मतदान केंद्र के अंदर कोई भी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस ले जाना पूरी तरह प्रतिबंधित होगा, नियमों का उल्लंघन करने पर तत्काल कार्रवाई की जा सकती है और चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि पर सख्त रोक रहेगी।
सिर्फ मोबाइल ही नहीं, इन पर भी सख्ती
कमेटी के दिशा-निर्देश केवल मोबाइल और कैमरे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे चुनावी माहौल को नियंत्रित और निष्पक्ष बनाने के लिए कई अन्य सख्त नियम भी लागू किए गए हैं।
उम्मीदवार और एजेंट पर रोक
किसी भी उम्मीदवार का पोलिंग एजेंट बूथ के अंदर प्रवेश नहीं कर सकेगा।
मतदान केंद्र के भीतर किसी भी प्रकार की गतिविधि पर सख्त निगरानी रहेगी।
200 गज के दायरे में प्रचार बैन
मतदान के दिन बूथ के 200 गज के दायरे में किसी भी प्रकार का प्रचार प्रतिबंधित रहेगा। बैनर, पोस्टर, टेंट या प्रचार सामग्री लगाने की अनुमति नहीं होगी।
प्रलोभन पर सख्त रोक
उम्मीदवार या उनके समर्थक मतदाताओं को कोई उपहार, भोजन या पेय पदार्थ नहीं दे सकेंगे। किसी भी प्रकार का लालच या प्रलोभन देने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गड़बड़ी पर सख्त एक्शन
चुनाव समिति ने निर्देशों में स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी बूथ पर गड़बड़ी या हस्तक्षेप की शिकायत मिलती है, तो उस बूथ का मतदान रद्द किया जा सकता है। संबंधित उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
इतना ही नहीं, यदि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद भी यह पाया जाता है कि किसी उम्मीदवार ने गंभीर अनियमितता की है, तो उसकी जीत भी रद्द की जा सकती है।
अधिवक्ताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस फैसले को लेकर अधिवक्ताओं के बीच सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कई वरिष्ठ वकीलों ने इसे “समय की मांग” बताया है और कहा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक स्वच्छ और निष्पक्ष बनेगी।
हालांकि, कुछ अधिवक्ताओं का यह भी मानना है कि इस नियम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था और सख्त पालन सुनिश्चित करना जरूरी होगा।
निष्पक्ष चुनाव की दिशा में बड़ा कदम
अधिवक्ता अनिल चौधरी के अनुसार यह फैसला बार काउंसिल चुनाव में पारदर्शिता और विश्वसनीयता को नई मजबूती देगा। इस फैसले से मतदान की गोपनीयता पूरी तरह सुरक्षित रहेगी और मतदाता बिना किसी दबाव के स्वतंत्र रूप से वोट डाल सकेंगे।
अनिल चौधरी, पूर्व अध्यक्ष, दी बार एसोसिएशन, जयपुर
लोकतांत्रिक मूल्य मजबूत
“नो मोबाइल, नो कैमरा” का यह सख्त नियम न केवल चुनावी पारदर्शिता को बढ़ाएगा, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत करेगा।
मनोज गहलोत, पूर्व महासचिव, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन, जोधपुर
