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Breaking News| RTI का बड़ा खुलासा: ‘बांग्लादेशी घुसपैठियों’ पर चुनाव आयोग के पास नहीं कोई डेटा,

ECI Says No Data on Bangladeshi Infiltrators in Voter List: RTI Reveals Major Gap

जयपुर/नई दिल्ली। देश की वोटर लिस्ट और कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर दायर एक आरटीआई आवेदन में बड़ा खुलासा सामने आया है।

चुनाव आयोग (ECI) ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि उसके पास देशभर में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों से जुड़ा कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।

आरटीआई में पूछे गए अहम सवाल-जैसे SIR (Special Intensive Revision) में घुसपैठियों का रिकॉर्ड, कितने लोगों को वापस भेजा गया, और कितनों के खिलाफ FIR दर्ज हुई-इन सभी पर आयोग ने जानकारी होने से ही इनकार कर दिया।

चुनाव आयोग (ECI) ने कई अहम सवालों पर सीधा जवाब देने के बजाय इसे “स्पष्टीकरण की मांग” बताते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया है। आयोग का कहना है कि ऐसी मांगें सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(एफ) के तहत “सूचना” की परिभाषा में नहीं आतीं।

फरवरी 2026 में दिए गए इस जवाब पर जोधपुर के आरटीआई कार्यकर्ता ऐयाज अहमद ने अपील दायर की.

क्या था पूरा मामला?

जोधपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता ऐयाज अहम ने सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत 1995 से 2025 तक की वोटर लिस्ट, SIR प्रक्रिया, और कथित बांग्लादेशी/पाकिस्तानी घुसपैठियों के नाम व उनके खिलाफ कार्रवाई से जुड़ी जानकारी मांगी थी।

आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया था कि तकनीकी गड़बड़ियों के चलते लाखों वैध नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं और BLO (Booth Level Officer) स्तर पर भारी दबाव है।

आयोग का जवाब: “यह सूचना नहीं, स्पष्टीकरण है”

चुनाव आयोग ने अपने जवाब में साफ कहा—

मांगी गई अधिकतर जानकारी “स्पष्टीकरण/राय” की श्रेणी में आती है, RTI Act की धारा 2(एफ) के तहत ऐसी जानकारी देने का प्रावधान नहीं है, इसलिए इन प्रश्नों पर कोई ठोस डेटा या रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया जा सकता

घुसपैठियों पर सवाल-कोई रिकॉर्ड नहीं!

सबसे बड़ा खुलासा: घुसपैठियों पर ‘नो डेटा’

देशभर में कथित बांग्लादेशी घुसपैठियों को लेकर आयोग का सीधा जवाब “ऐसी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।”

यह बयान उस समय आया है जब चुनावी राजनीति में यह मुद्दा बार-बार जोर-शोर से उठता रहा है।

वोटर लिस्ट और तकनीकी गड़बड़ी पर भी चुप्पी

आवेदन में वोटर लिस्ट से नाम कटने, तकनीकी खामियों और BLO की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। लेकिन आयोग ने इन सवालों को भी “व्याख्या/स्पष्टीकरण” बताकर जवाब देने से किनारा कर लिया।

आवेदन में यह भी पूछा गया था कि तकनीकी खामियों के कारण वोटर लिस्ट से नाम कटने और BLO पर पड़ रहे दबाव की जिम्मेदारी किसकी है। इस पर भी आयोग ने सीधे जवाब देने से बचते हुए इसे “व्याख्या/स्पष्टीकरण” का मामला बताया।

सिर्फ लिंक देकर निपटाया मामला

एक बिंदु पर आयोग ने 24 जून 2025 के एक पुराने पत्र और वेबसाइट लिंक का हवाला देते हुए जानकारी देखने को कहा, लेकिन विस्तृत जवाब देने से परहेज किया।

अपील का रास्ता खुला

आयोग ने आवेदक को सलाह दी है कि यदि वह जवाब से संतुष्ट नहीं है तो प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास अपील कर सकता है।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

राजस्थान हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मजोज गहलोत के मुताबिक, RTI के तहत “सूचना” और “स्पष्टीकरण” के बीच की यह सीमा अक्सर विवाद का कारण बनती है। लेकिन इतने बड़े सार्वजनिक हित के मुद्दों पर डेटा न होना या न देना गंभीर सवाल खड़े करता है।

जब चुनावों में घुसपैठ और वोटर लिस्ट का मुद्दा बार-बार उठता है, तो क्या उसके समर्थन में कोई आधिकारिक डेटा मौजूद नहीं है?

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