जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल के पदभार संभालने के बाद बीता करीब एक महीना फैसलों, प्रशासनिक बदलावों, संवाद और अपनी अलग कार्यशैली के कारण चर्चा में रहा है।
आम नागरिक की तरह ट्रेन से सफर करने से लेकर बार सदस्यों से तत्काल बातचीत, साथी न्यायाधीशों के साथ अनौपचारिक चर्चा और सुबह साढ़े दस बजे से शाम साढ़े चार बजे तक अदालत में मौजूद रहने तक—मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली के कई पहलू न्यायिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
अवकाश के दिनों में भी जरूरी और त्वरित मामलों की सुनवाई से लेकर देर रात तक आदेश जारी होने तक, उनके शुरुआती कार्यकाल के एक माह में न्यायिक कार्य को प्राथमिकता देने की शैली साफ तौर पर दिखाई दी है।
पहले महीने में कई अहम प्रशासनिक फैसले
मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभालने के बाद हाईकोर्ट प्रशासन में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
पूर्ववर्ती कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश से जुड़े विवादों के दौरान चर्चा में रहे अधिकारियों के तबादलों से लेकर रजिस्ट्री में व्यापक प्रशासनिक बदलाव तक, कई फैसलों ने न्यायिक गलियारों में खासा ध्यान खींचा।
इन फैसलों के बीच जयपुर और जोधपुर पीठ के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश भी दिखाई दी।
न्यायाधीशों की संख्या, काम के बंटवारे और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर लंबे समय से चर्चा में रहे मुद्दों के बीच नए मुख्य न्यायाधीश के सामने दोनों पीठों के बीच संतुलन कायम करना महत्वपूर्ण चुनौती रही है।
जयपुर-जोधपुर के जजों के तबादलों पर भी बड़ा कदम
जयपुर और जोधपुर के न्यायाधीशों के तबादलों को लेकर सामने आए विरोध के बीच पहले किए गए कुछ न्यायाधीशों के तबादलों को समाप्त कर उन्हें फिर से जयपुर और जोधपुर भेजे जाने का निर्णय भी चर्चा में रहा।
इस फैसले को दोनों पीठों के बीच संतुलन और न्यायिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सामान्य करने की दिशा में उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
छुट्टी के दिन भी अदालतें, देर रात तक जारी हुए आदेश
मुख्य न्यायाधीश के शुरुआती कार्यकाल में ऐसे मौके भी आए, जब अवकाश के बावजूद अदालतों में न्यायिक कार्य हुआ।
रविवार और रामदेव जयंती के अवकाश के दौरान भी जरूरी मामलों की सुनवाई की गई और देर रात तक मामलों में आदेश एवं फैसले जारी किए गए।
न्यायिक कार्य को लेकर इस तरह की तत्परता को अदालत के कामकाज को प्राथमिकता देने की उनकी शैली से जोड़कर देखा जा रहा है।
अदालत के समय में कार्यक्रमों से दूरी, न्यायिक कार्य पर फोकस
मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि अदालत के निर्धारित समय के दौरान होने वाले कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखने पर जोर दिया गया, ताकि न्यायिक कार्य प्रभावित न हो।
सुबह करीब साढ़े दस बजे से शाम साढ़े चार बजे तक अदालत में मौजूद रहना और न्यायिक कार्य पर पूरा फोकस बनाए रखना उनके शुरुआती कार्यकाल की प्रमुख विशेषताओं में शामिल रहा है।
सादगी का संदेश-जयपुर से जोधपुर ट्रेन से सफर
इन प्रशासनिक और न्यायिक फैसलों के बीच मुख्य न्यायाधीश का जयपुर से जोधपुर ट्रेन से सफर भी खासा चर्चा में रहा।
संवैधानिक पद पर होने के बावजूद ट्रेन से आम नागरिक की तरह यात्रा करने के इस कदम को उनकी सादगी और सहजता से जोड़कर देखा गया।
न्यायिक गलियारों में यह भी चर्चा रही कि उन्होंने औपचारिकता से अलग आम लोगों के बीच सहज तरीके से यात्रा कर एक अलग संदेश दिया।
बार से तत्काल संवाद, साथी जजों से अनौपचारिक बातचीत
मुख्य न्यायाधीश की कार्यशैली का एक प्रमुख पहलू तत्काल संवाद भी रहा है। बार सदस्यों से बातचीत हो या साथी न्यायाधीशों के साथ अनौपचारिक चर्चा—उनकी शैली में संवाद को विशेष महत्व मिलता दिखाई दे रहा है।
बार और न्यायपालिका के बीच संवाद को लेकर भी उनकी सहज शैली अधिवक्ताओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।
कवि-लेखकों की छाया, संबोधन से लेकर फैसलों तक अलग अंदाज
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल की एक और छवि अधिवक्ताओं के बीच चर्चा में है—साहित्य और कविताओं से जुड़ी उनकी शैली।
सामूहिक संबोधन के दौरान प्रसिद्ध कवियों और लेखकों की कविताओं तथा उनकी पंक्तियों का उल्लेख कर वे अपनी बात को अलग अंदाज में रखते हैं।
उनकी यह शैली अधिवक्ताओं के बीच पसंद की जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि यह साहित्यिक छाप केवल उनके सार्वजनिक संबोधनों तक सीमित नहीं है।
उनके न्यायिक फैसलों में भी महात्मा गांधी सहित विभिन्न महान साहित्यकारों और विचारकों के कथनों का उल्लेख देखने को मिलता है। फैसलों में इस तरह के संदर्भ उनकी विशिष्ट न्यायिक शैली की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं।
जजमेंट से लेकर अपीलों की रफ्तार तक दिखा असर
मुख्य न्यायाधीश के शुरुआती एक महीने में जजमेंट की रफ्तार भी चर्चा में रही है। करीब 20 कार्यदिवस के दौरान उनकी पीठ ने जोधपुर—जयपुर में एक दर्जन से अधिक रिपोर्टेबल जजमेंट दिए है।
इसके साथ ही लंबे समय से लंबित कई फुल बेंच मामलों को भी सुनवाई के लिए नियत किया गया है।
इससे यह संकेत मिलता है कि न्यायिक कार्य के साथ लंबित महत्वपूर्ण मामलों को गति देने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
अब जोधपुर मुख्य पीठ में नियमित सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश के पदभार संभालने के करीब एक माह का समय पूरा होने जा रहा है।
अब सोमवार से वे राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्य पीठ में नियमित सुनवाई करेंगे।
ऐसे में जयपुर में शुरुआती एक महीने के दौरान प्रशासनिक और न्यायिक स्तर पर लिए गए फैसलों के बाद अब जोधपुर मुख्य पीठ में उनकी नियमित उपस्थिति पर भी न्यायिक जगत की नजर रहेगी।
पहला महीना-फैसले, बदलाव, संवाद और अलग कार्यशैली
पदभार संभालने के बाद बीते करीब एक महीने के घटनाक्रम को देखें तो जस्टिस संजय के. अग्रवाल की कार्यशैली में न्यायिक कार्य को प्राथमिकता, प्रशासनिक बदलाव, जयपुर-जोधपुर के बीच संतुलन, तत्काल संवाद और सादगी प्रमुख रूप से दिखाई देते हैं।
एक ओर ट्रेन से आम नागरिक की तरह सफर, बार से तत्काल बातचीत और साथी न्यायाधीशों के साथ अनौपचारिक संवाद उनकी सहज कार्यशैली को सामने लाता है, तो दूसरी ओर अदालत में पूरा समय देना, अवकाश के दिन जरूरी मामलों की सुनवाई, देर रात तक आदेश और तेजी से रिपोर्टेबल जजमेंट देना उनके न्यायिक कामकाज की गति को दर्शाता है।
वहीं, सार्वजनिक संबोधनों और न्यायिक फैसलों में कवियों, लेखकों और महापुरुषों की पंक्तियों का इस्तेमाल उनकी शैली को अन्य पहलुओं से अलग बनाता है।
अब आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शुरुआती एक महीने में लिए गए इन प्रशासनिक और न्यायिक फैसलों का राजस्थान हाईकोर्ट की कार्यप्रणाली, जयपुर-जोधपुर के बीच संतुलन, लंबित मामलों की सुनवाई और न्यायपालिका के प्रति आम जनता के भरोसे पर कितना स्थायी प्रभाव पड़ता है।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि राजस्थान हाईकोर्ट के नए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय के. अग्रवाल का पहला महीना फैसलों, बदलावों, संवाद, साहित्यिक अंदाज और तेज न्यायिक कार्यशैली के कारण खासा चर्चा में रहा है।