जयपुर। राजस्थान में बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती-2021 को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद आखिरकार निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
शनिवार, 4 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने ने बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि SI भर्ती 2021 रद्द ही रहेगी।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले पर मुहर लगा दी हैं. गौरतलब हैं कि जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को अपने फैसले में एसआई भर्ती 2021 को रद्द कर दिया था.
खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले पर मुहर लगाते हुए जनहित याचिका के पार्ट को हटा दिया हैं.
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एसपी शर्मा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार और चयनित अभ्यर्थियों द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए एकलपीठ के फैसले को बरकरार रखा।
हालांकि खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए एकलपीठ द्वारा राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के सदस्यों के खिलाफ लिए गए स्वप्रेरित प्रसंज्ञान (सुओ मोटू) को रद्द कर दिया।
पेपर लीक और अनियमितताओं पर हाईकोर्ट सख्त
इस मामले की जड़ में SI भर्ती परीक्षा में कथित पेपर लीक, धांधली और बड़े पैमाने पर अनियमितताएं थीं।
एकलपीठ ने 28 अगस्त 2025 को इन गंभीर आरोपों को सही मानते हुए पूरी भर्ती प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया था।
कोर्ट ने अपने उस फैसले में कहा था कि यदि भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो पूरी प्रक्रिया को निरस्त करना ही न्यायसंगत होगा। यही कारण था कि भर्ती को पूरी तरह रद्द कर दिया गया था।
ढाई महीने बाद आया अंतिम फैसला
खंडपीठ ने इस मामले में सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 19 जनवरी 2026 को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। करीब ढाई महीने के इंतजार के बाद शनिवार को यह अहम निर्णय सुनाया गया।
सरकार और चयनित अभ्यर्थियों ने एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए तर्क दिया था कि पूरी भर्ती को रद्द करना हजारों अभ्यर्थियों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा पास की थी।
लेकिन खंडपीठ ने इन दलीलों को पर्याप्त नहीं माना और एकलपीठ के फैसले को सही ठहराया।
अचयनित अभ्यर्थियों के अधिवक्ता हरेन्द्र नील के अनुसार मामले में आरपीएससी सदस्यों के खिलाफ टिप्पणीयों को हाईकोर्ट ने नहीं हटाया हैं..
हालांकि,खंडपीठ ने एकलपीठ के उस हिस्से को निरस्त कर दिया, जिसमें RPSC के सदस्यों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लिया गया था।
खंडपीठ का मानना था कि इस मामले में आयोग के सदस्यों के खिलाफ सीधे तौर पर ऐसी कार्रवाई उचित नहीं थी। इस निर्णय से RPSC के अधिकारियों और सदस्यों को बड़ी राहत मिली है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था मामला
इस पूरे प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का भी दखल रहा। एकलपीठ के फैसले के बाद 8 सितंबर 2025 को डिवीजन बेंच ने अंतरिम आदेश देते हुए भर्ती रद्द करने पर रोक लगा दी थी।
इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां 24 सितंबर 2025 को शीर्ष अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। सुप्रीम कोर्ट ने चयनित अभ्यर्थियों की फील्ड पोस्टिंग पर रोक लगा दी और यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच को निर्देश दिया था कि वह तीन महीने के भीतर इस मामले की सुनवाई पूरी करे।
अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका
खंडपीठ के इस अंतिम फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि SI भर्ती 2021 पूरी तरह रद्द रहेगी। इससे उन हजारों अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है, जो चयनित होकर नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे।
दूसरी ओर, वे अभ्यर्थी जिन्होंने शुरू से ही भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का आरोप लगाया था, इस फैसले को अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं।
भविष्य की भर्ती प्रक्रिया पर असर
यह फैसला केवल SI भर्ती 2021 तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य की सभी भर्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है।
सरकार और भर्ती एजेंसियों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है कि वे परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह निष्पक्ष और सुरक्षित बनाएं, अन्यथा ऐसे कठोर निर्णय सामने आ सकते हैं।
सीबीआई के अधिवक्ता संजय महला के अनुसार विस्तृत फैसले में कई चौकाने वाली बाते सामने आ सकती हैं.
