हाईकोर्ट ने कहा हर अपराधी का भविष्य होता है, हमें कम्युनिटी सर्विस को सुधार का एक अंग बनाना होगा। राज्य सरकार-रालसा को कम्युनिटी सर्विस स्कीम बनाने का आदेश, हर आरोपी की बनेगी “सोशल रिपोर्ट”
जयपुर। देश की आपराधिक न्याय व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला फैसला राजस्थान हाईकोर्ट ने सुनाया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा— “हर अपराधी का भविष्य होता है”, और इसी सिद्धांत को आधार बनाते हुए पहली बार जमानत के साथ कम्युनिटी सर्विस (सामुदायिक सेवा) को अनिवार्य शर्त के रूप में लागू किया।
जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकल पीठ द्वारा सुनाया गया यह फैसला न केवल दो आरोपियों को जमानत देने तक सीमित है, बल्कि पूरे देश में न्याय की सोच और सजा के स्वरूप को बदलने वाला माना जा रहा है।
हाईकोर्ट ने इस फैसले में साफ कहा है कि अब न्याय प्रणाली का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि अपराधी का सुधार और समाज में पुनर्वास भी है।
जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली की एकल पीठ ने Waris Alias Lahaki और Usman Alias Andha की ओर से दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद रिपोर्टेबल जजमेंट देते हुए यह फैसला दिया है।
30 दिन में कुल 150 पौधे लगाने की सर्विस
राजस्थान हाईकोर्ट ने ATM मशीन को तोड़कर चोरी करने के दो आरोपियों को जमानत देते हुए एक माह तक निरंतर कम्युनिटी सर्विस यानी सामाजिक सेवा करने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों को जमानत देते हुए आदेश दिया कि वे जमानत मिलने के 7 दिन बाद अगले 30 दिन तक रोज कम से कम 5 पेड़ लगाकर उन पौधों को रोज पानी देंगे।
हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि 30 दिन तक रोज 5 पौधे यानी प्रत्येक आरोपी कुल 150 पौधे लगाएगा, उन्हें पानी देगा और फिर उसकी फोटो-वीडियो की रिकॉर्डिंग भी करेगा।
आरोपी को ये फोटो और वीडियो संबंधित पुलिस थाने में रिपोर्ट के साथ जमा करानी होगी।
पहली बार: जमानत के साथ “कम्युनिटी सर्विस”
देश में संभवतः यह पहली बार है कि जब देश की किसी अदालत ने जमानत की शर्तों में एक विस्तृत कम्युनिटी सर्विस को अनिवार्य शर्त बनाते हुए कम्युनिटी सर्विस में शामिल सभी तत्वों का विस्तार से वर्णन किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत देते हुए पूरे एक माह यानी 30 दिन तक लगातार प्रत्येक दिन कम से कम 5 पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने की शर्त रखी है।
इसके साथ ही आरोपियों को निशुल्क पौधे उपलब्ध कराने के लिए राज्य के वन विभाग को भी आदेश दिया गया है।
कोर्ट ने क्यों दिया फैसला
राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली ने अपने फैसले में कहा कि केवल क्रिमिनल रिकॉर्ड के आधार पर जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि यदि आरोपी जमानत के योग्य है तो उसे मौका मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि
“Every saint has a past, every sinner has a future”
यानी हर अपराधी का भी भविष्य होता है
हाईकोर्ट ने कहा कि भारत एक कल्याणकारी राज्य (Welfare State) है, जहां न्याय प्रणाली को मानव गरिमा और सामाजिक न्याय के सिद्धांतों पर चलना चाहिए।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि अब वक्त आ गया है कि हमें कम्युनिटी सर्विस को सुधार का एक अंग बनाना होगा।
ये है पूरा मामला
यह मामला राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के खुनखुना थाना क्षेत्र का है, जहां SBI के ATM को गैस कटर से काटकर चोरी करने का आरोप सामने आया था। इस मामले में दो आरोपियों— वारिस उर्फ लाहकी और उस्मान उर्फ अंधा को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ATM मशीन को गैस कटर से काटा, चोरी के लिए फर्जी नंबर प्लेट लगी गाड़ी का उपयोग किया और योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया।
मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराएं लगाई गईं और आरोपियों को 9 जनवरी 2026 से जेल में रखा गया था।
जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट भी पेश कर दी थी और कोई बरामदगी शेष नहीं थी।
जिसके बाद दोनों आरोपियों ने राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिकाएं पेश कीं।
कम्युनिटी सर्विस: कानून में क्या है?
राजस्थान हाईकोर्ट ने कम्युनिटी सर्विस को अपराधियों के सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण अंग बताते हुए कहा कि जब हमारे देश के नए कानूनों ने इसका प्रावधान किया है तो इसका उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि
BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023) में कम्युनिटी सर्विस को सजा का विकल्प बनाया गया है।
जिसमें परिभाषा देते हुए कहा गया है कि
“ऐसा कार्य जो समाज के हित में हो और जिसके लिए कोई पारिश्रमिक न दिया जाए”
कम्युनिटी सर्विस क्यों जरूरी?
हाईकोर्ट ने कम्युनिटी सर्विस की आवश्यकता को लेकर जानकारी देते हुए कहा कि इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं।
हाईकोर्ट के अनुसार आरोपियों को जेल की कठोरता से बचाना, समाज के प्रति जिम्मेदारी विकसित करना और अपराधी का पुनर्वास तय करना।
जेल क्यों नहीं है समाधान?
हाईकोर्ट ने बेहद गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि जेल में छोटे अपराधी बड़े अपराधी बन सकते हैं, वहां अपराध की नई तकनीकें सीखने का खतरा होता है।
समाज में लौटने पर उन्हें रोजगार नहीं मिलता और सामाजिक कलंक उन्हें फिर अपराध की ओर धकेलता है।
कोर्ट ने कहा कि इसलिए सुधारात्मक उपाय जरूरी हैं।
कम्युनिटी सर्विस के संभावित कार्य
हाईकोर्ट ने बीएनएस के इस प्रावधान को लेकर अधिक विस्तार से बताते हुए कहा कि आरोपी से कम्युनिटी सर्विस के तहत कई संभावित कार्य कराए जा सकते हैं।
हाईकोर्ट के अनुसार वृक्षारोपण, स्वच्छ भारत अभियान, अस्पतालों में सहयोग, धार्मिक स्थलों पर सेवा, सरकारी स्कूलों की सफाई, NGO के साथ कार्य जैसे कार्य कम्युनिटी सर्विस में शामिल हैं।
किन मामलों में नहीं लागू होगी यह स्कीम?
राजस्थान हाईाकेर्ट ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया हैं कि यह सर्विस किन मामलो में लागू नही होगी.
कोर्ट के अनुसार महिला उत्पीड़न या यौन अपराध और गंभीर और जघन्य अपराध
जैसे मामलो में कम्युनिटी सर्विस लागू नहीं होगी.
राज्य सरकार- पुलिस को बड़ा आदेश
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में राज्य के मुख्य सचिव को आदेश दिया हैं कि वे इसे राज्य स्तर पर कम्युनिटी सर्विस स्कीम तैयार करें
हाईकोर्ट ने राज्य की पुलिस को भी आदेश दिया हैं कि इस मामले में वो SOP बनाए और हर जिले में नोडल अधिकारी नियुक्त करे.
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम लागू हो और अपराधियों का डेटाबेस तैयार किया जाए.
हर आरोपी की बनेगी “सोशल रिपोर्ट”
हाईकोर्ट ने बड़ा बदलाव करते हुए कहा कि हर आरोपी के लिए पुलिस को रिपोर्ट तैयार करनी होगी, जिसमें शामिल होगा कि अपराध के कारण, आर्थिक स्थिति
परिवार की पृष्ठभूमि, शिक्षा और सामाजिक स्थिति क्या हैं.
कोर्ट उसी आधार पर सुधारात्मक निर्णय लेगा और पुनर्वास की नई व्यवस्था करेगा.
