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सीनियर अफसर से मारपीट करने वाले पूर्व नौसैनिक की बर्खास्तगी बरकरार, हाईकोर्ट ने कहा सेना में अनुशासन से कोई समझौता नहीं

Navy Sailor Dismissal Upheld: Rajasthan High Court Says ‘No Compromise on Discipline in Armed Forces’

13 साल पुराने केस में राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, INS सवित्री पर कार्यरत थे दोनो नौसेनाकर्मी

जयपुर। भारतीय नौसेना में अनुशासन और अधिकारों के टकराव से जुड़े एक अहम मामले में राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया है।

अनुशासन से जुड़े इस सनसनीखेज मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए पूर्व सैलर को बड़ा झटका दिया है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने करीब 13 साल पुराने मामले में आरोपी नौसेना के सैलर की बर्खास्तगी को बरकरार रखते हुए दायर याचिका को खारिज कर दिया है।

हाईकोर्ट ने अपने रिपोर्टेबल जजमेंट में स्पष्ट किया कि वर्दी में रहते हुए “गुस्सा” या “उकसावा” किसी भी तरह की हिंसा का बहाना नहीं बन सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि फोर्स में अनुशासन सर्वोपरि है और वरिष्ठ अधिकारी पर हमला किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस रवि चिरानिया की खंडपीठ ने नौसेना के पूर्व कर्मी यशपाल यादव की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए यह फैसला दिया है।

13 साल पहले, क्या हुआ था उस दिन?

27 मई 2013—INS सवित्री, विशाखापट्टनम।

ड्यूटी के दौरान सैलर यशपाल यादव को उनके सीनियर अधिकारी लेफ्टिनेंट कमांडर ब्रजेश कुमार ने अपने केबिन में बुलाया।

दोनों के बीच ड्यूटी को लेकर शुरू हुई बातचीत कुछ ही मिनटों में विवाद और मारपीट तक पहुंच गई।

जांच, कोर्ट मार्शल और बर्खास्तगी

इस मारपीट में सीनियर अधिकारी घायल हो गए और मेडिकल रिपोर्ट में नाक, चेहरे और कंधे पर गंभीर चोटों की पुष्टि हुई।

नौसेना ने इस मामले को फोर्स के अनुशासन के खिलाफ मानते हुए आरोपी याचिकाकर्ता के खिलाफ वन मैन इंक्वायरी की गई।

जांच के बाद कोर्ट मार्शल की कार्यवाही करते हुए बर्खास्तगी का आदेश दिया गया।

साथ ही याचिकाकर्ता से “गुड कंडक्ट बैज” छीनकर नौसेना से बर्खास्तगी और 90 दिन के कठोर कारावास की सजा दी गई।

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) का फैसला

नौसेना के बर्खास्तगी आदेश के खिलाफ याचिकाकर्ता यशपाल यादव ने आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (AFT) में अपील दायर की।

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल ने भी याचिकाकर्ता को दोषी मानते हुए नौसेना के बर्खास्तगी फैसले को सही ठहराया।

ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की।

हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता का दावा था कि उन्हें बिना वजह बुलाकर अपमानित किया गया, गाली-गलौज की गई और यहां तक कि उन पर शारीरिक हमला भी किया गया।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वे विवाद से बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उकसावे के चलते हाथापाई हो गई।

याचिकाकर्ता ने कहा कि उसे उकसाया गया था और उसका पहले का सेवा रिकॉर्ड बेदाग था तथा सजा असंगत (Disproportionate) है।

उन्होंने दो अन्य मामलों—आर. कार्तिक और नितेश राय—का हवाला देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों में अन्य सैलर्स को राहत मिली थी।

नौसेना और केंद्र सरकार का जवाब

दूसरी ओर, नौसेना का पक्ष था कि यशपाल यादव ने अपने वरिष्ठ अधिकारी पर हमला किया, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।

मेडिकल रिपोर्ट में भी अधिकारी के चेहरे, नाक और कंधे पर चोटों की पुष्टि हुई।

सरकार ने कहा कि मामला अत्यंत गंभीर है क्योंकि इसमें वरिष्ठ अधिकारी पर हमला शामिल है।

सेना ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर चोटें दर्ज हैं और यह सिर्फ अनुशासनहीनता नहीं बल्कि सैन्य संरचना पर सीधा हमला है तथा अन्य मामलों से इसकी तुलना नहीं की जा सकती।

सरकार ने यह भी बताया कि यशपाल का व्यवहार पहले भी आक्रामक और अनुशासनहीन रहा है, जिसके लिए उन्हें कई बार चेतावनी दी गई थी।

हाईकोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि—

“कार्यस्थल पर अनुशासन अनिवार्य है, और सशस्त्र बलों में यह और भी अधिक महत्वपूर्ण है।”

कोर्ट ने माना कि सीनियर अधिकारी को गंभीर चोटें आईं और सैलर का व्यवहार अनुशासनहीनता की चरम सीमा है।

कोर्ट ने कहा कि ऐसी घटनाएं सेना की संरचना को कमजोर करती हैं।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि मान भी लें कि गाली-गलौज हुई, फिर भी सीनियर पर हमला करना स्वीकार्य नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि -“डिसिप्लिन्ड फोर्स में प्रतिक्रिया भी नियंत्रित होनी चाहिए”-

अंतिम फैसला-कोई राहत नहीं

राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने अंतिम फैसले में याचिकाकर्ता सैलर की याचिका को खारिज करते हुए उसकी बर्खास्तगी के फैसले को बरकरार रखा है।

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