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Veterinary Officer भर्ती परीक्षा : CM ऑफिस और वेटरनरी यूनिवर्सिटी की सिफारिशें भी नहीं मानीं RPSC सचिव ने, परीक्षा तिथि विवाद पर हाईकोर्ट ने जारी किया नोटिस

RPSC Ignores CM Office, Veterinary University Recommendations; Rajasthan High Court Issues Notice in Veterinary Officer Exam Row

जयपुर। राजस्थान में पशु चिकित्सा अधिकारी (Veterinary Officer) भर्ती परीक्षा को लेकर अब बड़ा प्रशासनिक और कानूनी विवाद सामने आया है।

राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) पर गंभीर आरोप लगे हैं कि परीक्षा तिथि में बदलाव के मामले में न केवल अभ्यर्थियों की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया, बल्कि मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) और राजस्थान वेटरनरी यूनिवर्सिटी की सिफारिशों को भी अनदेखा कर दिया गया।

इस पूरे मामले में अब राजस्थान हाईकोर्ट में जस्टिस रवि चिरानिया की एकलपीठ ने Animal Husbandry Department के प्रमुख सचिव, RPSC सचिव और वेटरनरी यूनिवर्सिटी RAJUVAS के रजिस्ट्रार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

एकलपीठ ने याचिकाकर्ता अभ्यर्थी नरेन्द्र कुमार दुलेत सहित दर्जनों अभ्यर्थियों द्वारा परीक्षा तिथि आगे बढ़ाने की मांग को लेकर दायर याचिका पर यह आदेश दिया है।

याचिका में 19 अप्रैल 2026 की परीक्षा तिथि को स्थगित कर नई परीक्षा तिथि निर्धारित करने की मांग की गई है।

भर्ती प्रक्रिया और विवाद की पृष्ठभूमि

RPSC द्वारा 17 जुलाई 2025 को Veterinary Officer के 1100 पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया गया था।

इस भर्ती में उन अभ्यर्थियों को भी आवेदन की अनुमति दी गई थी, जो अंतिम वर्ष में थे या इंटर्नशिप पूरी कर रहे थे।

लेकिन विवाद तब शुरू हुआ जब RPSC ने परीक्षा की तिथि 19 अप्रैल 2026 तय कर दी, जबकि बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की इंटर्नशिप उस समय तक पूरी नहीं हो रही थी।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह निर्णय न केवल अव्यावहारिक है, बल्कि उनके भविष्य के साथ अन्याय भी है।

CM ऑफिस का पत्र भी हुआ नजरअंदाज

याचिका में यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार और पशुपालन विभाग द्वारा RPSC को परीक्षा तिथि आगे बढ़ाने के लिए पत्र भेजा गया था, लेकिन आयोग ने उस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की।

रिकॉर्ड के अनुसार, 09.01.2026 को पशुपालन विभाग ने स्पष्ट रूप से परीक्षा तिथि बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन RPSC ने इसे अनदेखा कर दिया।

इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस मुद्दे पर हस्तक्षेप किया गया था, लेकिन आयोग ने उस सिफारिश को भी दरकिनार कर दिया—जिससे प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े हो गए हैं।

वेटरनरी यूनिवर्सिटी की अपील भी बेअसर

राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ वेटरनरी एंड एनिमल साइंसेज (RAJUVAS), बीकानेर ने भी RPSC को पत्र लिखकर बताया कि कोविड-19, युद्ध जैसी परिस्थितियों और अकादमिक देरी के कारण छात्रों की इंटर्नशिप में विलंब हुआ है।

यूनिवर्सिटी ने स्पष्ट रूप से कहा कि इंटर्नशिप जुलाई 2026 तक पूरी होगी, ऐसे में अप्रैल 2026 में परीक्षा लेना छात्रों के साथ अन्याय होगा। (Annexure-20, पेज 87)

इसके बावजूद RPSC ने कोई बदलाव नहीं किया, जिससे छात्रों में भारी आक्रोश है।

अन्य परीक्षाओं में मिल चुकी है राहत

राजस्थान से बाहर इसी तरह की भर्ती में गुजरात और पंजाब-हरियाणा में परीक्षा की तारीखें आगे बढ़ाई गई थीं।

याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि RPSC ने पहले भी कई परीक्षाओं की तिथियां बदली हैं।

जिसमें खासतौर से राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) परीक्षा की तिथि बढ़ाई गई और RUHS द्वारा मेडिकल ऑफिसर भर्ती में भी तिथि विस्तार दिया गया।

याचिका में RPSC के इस रवैये पर सवाल उठाया गया है कि जब अन्य परीक्षाओं में लचीलापन दिखाया गया, तो इस भर्ती में ऐसा क्यों नहीं किया गया?

अभ्यर्थियों का तर्क: नियमों के खिलाफ फैसला

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि:

भर्ती नियमों के अनुसार, अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले योग्यता पूरी करने का अवसर मिलना चाहिए। यदि परीक्षा तिथि आगे बढ़ाई जाती है, तो अधिक अभ्यर्थी पात्र हो सकते हैं। वर्तमान तिथि के कारण हजारों उम्मीदवार बाहर हो जाएंगे।

याचिका में यह भी कहा गया है कि RPSC का यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 16 (समान अवसर) का उल्लंघन है।

इस मामले में करीब 80 से अधिक अभ्यर्थियों ने संयुक्त रूप से याचिका दायर की है। इन सभी का कहना है कि उन्होंने समय पर आवेदन किया, लेकिन प्रशासनिक देरी के कारण उनकी इंटर्नशिप पूरी नहीं हो पाई।

जोधपुर की कुछ याचिकाए, अधिवक्ता की पहल की तारीफ

80 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ आया, जब याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता तनवीर अहमद ने कुछ समय तक बहस करने के बाद कुछ याचिकाओं को अलग करने और आंशिक रूप से वापस लेने की अनुमति मांगी।

अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिका में शामिल कई याचिकाकर्ताओं के संबंध में इस पीठ की जगह जोधपुर क्षेत्राधिकार है। ऐसे में कुछ याचिकाए अलग करते हुए वापस लेने की अनुमति मांगी।

साथ ही अधिवक्ता तनवीर अहमद ने बार हित में 50,000 रुपये जमा कराने का प्रस्ताव रखा, जिसमें से ₹25,000 एडवोकेट वेलफेयर फंड के लिए और ₹25,000 ऑफिस क्लर्क (मुंशी संघ) के लिए दिए जाने की बात कही.

अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए उक्त याचिकाकर्ताओं को जोधपुर स्थित प्रधान पीठ में पुनः याचिका दायर करने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी।

साथ ही अदालत ने अधिवक्ता तनवीर अहमद की इस सराहनीय पहल की खुले शब्दों में प्रशंसा की और इसे बार समुदाय के हित में एक सकारात्मक कदम बताया

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