नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड (AOR) एग्जाम दिसंबर 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। एग्जाम 19, 20, 22 और 23 दिसंबर 2026 को नई दिल्ली में होगा।
एग्जाम पेन-एंड-पेपर मोड में होगा। आवेदन की प्रक्रिया 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर 2026 तक चलेगी। 15 अक्टूबर को शाम 5 बजे के बाद आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे। एग्जाम की फीस 750 रुपए है, जिसका पेमेंट ऑनलाइन करना होगा।
दिसंबर 2026 का AOR एग्जाम उन्हीं कैंडिडेट्स के लिए है, जो AOR एग्जाम के नियमों के तहत दोबारा परीक्षा देने के पात्र हैं। इसमें जून 2025 और उससे पहले हुई परीक्षाओं के आधार पर दोबारा परीक्षा देने के लिए पात्र कैंडिडेट शामिल हैं।
कौन दे सकता है दिसंबर 2026 का AOR एग्जाम?
सुप्रीम कोर्ट की नोटिफिकेशन के मुताबिक, दिसंबर 2026 की परीक्षा में वही कैंडिडेट शामिल हो सकते हैं, जो रेगुलेशन 11(i) या 11(ii) के तहत दोबारा परीक्षा देने के पात्र हैं।
ऐसे कैंडिडेट्स को अगर सिर्फ एक पेपर में दोबारा बैठने की अनुमति मिली है तो वे उस पेपर में परीक्षा दे सकते हैं। हालांकि, उनके पास विकल्प है कि वे चाहें तो पूरा AOR एग्जाम दोबारा दे सकते हैं। आवेदन जमा करते समय लिया गया यह विकल्प बाद में बदला नहीं जा सकेगा।
एक और महत्वपूर्ण नियम है। AOR एग्जाम में किसी उम्मीदवार को पांच से ज्यादा मौके नहीं मिल सकते। परीक्षा में किसी एक पेपर में बैठना भी एक पूरा अटेंप्ट माना जाता है।
हालांकि, दिसंबर 2021 में दिया गया एग्जाम पांच अटेंप्ट की गिनती में शामिल नहीं किया जाएगा। इसका मतलब है कि नियमों के तहत पात्र उम्मीदवारों को एक अतिरिक्त मौका मिल सकता है।
आवेदन कहां और कैसे जमा करना होगा?
आवेदन AOR एग्जामिनेशन सेल, रूम नंबर 308, तीसरी मंजिल, B-ब्लॉक, एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग्स कॉम्प्लेक्स, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, नई दिल्ली-110001 में जमा करना होगा।
आवेदन 1 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक ऑफिस टाइम में जमा किए जा सकते हैं। फीस का ऑनलाइन पेमेंट करने के बाद आवेदन की फिजिकल कॉपी भी जमा करनी होगी।
इसके साथ आवेदन फॉर्म, हाल की फोटो, एनरोलमेंट सर्टिफिकेट की सेल्फ-अटेस्टेड कॉपी और 750 रुपए फीस के पेमेंट की रसीद देनी होगी। आवेदन डाक या कूरियर से भी भेजा जा सकता है।
आवेदन फॉर्म साफ-साफ भरा और साइन किया हुआ होना चाहिए। हाल की फोटो लगाना और एनरोलमेंट सर्टिफिकेट की कॉपी देना जरूरी है। अधूरा या अस्पष्ट आवेदन सीधे खारिज किया जा सकता है।
चार पेपर में होगी AOR एग्जाम
AOR एग्जाम में चार पेपर होंगे- प्रैक्टिस एंड प्रोसीजर ऑफ द सुप्रीम कोर्ट, ड्राफ्टिंग, एडवोकेसी एंड प्रोफेशनल एथिक्स और लीडिंग केस। परीक्षा सिर्फ पेन-एंड-पेपर मोड में होगी।
ड्राफ्टिंग पेपर में स्पेशल लीव पिटीशन, स्टेटमेंट ऑफ केस, डिक्री और ऑर्डर, रिट और अपील से जुड़े ड्राफ्टिंग विषय शामिल हैं। इसके अलावा संविधान के आर्टिकल 131 के तहत प्लेंट और रिटन स्टेटमेंट, आर्टिकल 137 के तहत रिव्यू पिटीशन, CPC की धारा 25 के तहत ट्रांसफर पिटीशन, आर्टिकल 139 और BNSS की धारा 446 के तहत पिटीशन, कंटेम्प्ट पिटीशन और बेल जैसी इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन भी सिलेबस में हैं।
एडवोकेसी और प्रोफेशनल एथिक्स में ये विषय
इस पेपर में लीगल प्रोफेशन, प्रोफेशनल एथिक्स, वकीलों के कर्तव्य, प्रोफेशनल और दूसरे तरह के मिसकंडक्ट, विज्ञापन और क्लाइंट से काम मांगने से जुड़े नियम शामिल हैं।
इसके अलावा बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियम, वकील की अलग-अलग जिम्मेदारियां, कर्तव्यों और हितों के टकराव, गोपनीयता, क्रिमिनल केस में एडवोकेसी, प्रॉसिक्यूशन एथिक्स, क्लाइंट से संबंध, बातचीत और मध्यस्थता जैसे विषय भी शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट में AOR की भूमिका, एडजर्नमेंट, कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट और न्याय व्यवस्था के प्रति वकीलों की जिम्मेदारियां भी सिलेबस का हिस्सा हैं।
लीडिंग केस पेपर में 86 अहम फैसले
लीडिंग केस पेपर के लिए रजिस्ट्री ने 86 फैसलों की सूची जारी की है। इसमें केशवानंद भारती, मेनका गांधी, मिनर्वा मिल्स, विशाखा, नेशनल लीगल सर्विसेज अथॉरिटी और नवतेज सिंह जौहर जैसे फैसले शामिल हैं।
सूची में हाल के महत्वपूर्ण फैसले भी हैं, जिनमें आर्टिकल 370, इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम, मिनरल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और तेज प्रकाश पाठक बनाम हाईकोर्ट ऑफ राजस्थान शामिल हैं।
खास बात यह है कि लीडिंग केस पेपर में इन मामलों के हेड नोट्स रजिस्ट्री की ओर से परीक्षा हॉल में उपलब्ध कराए जाएंगे और परीक्षा खत्म होने पर इन्हें वापस करना होगा।
दिव्यांग कैंडिडेट्स के लिए स्क्राइब की सुविधा
जिन बेंचमार्क डिसेबिलिटी वाले कैंडिडेट्स को लिखने में परेशानी होती है, उन्हें नियमों के तहत स्क्राइब यानी लिखने में मदद करने वाले व्यक्ति की सुविधा मिल सकती है।
कुछ कैटेगरी में इसके लिए मेडिकल सर्टिफिकेट देना जरूरी होगा। 40% से कम डिसेबिलिटी वाले ऐसे कैंडिडेट्स जिन्हें लिखने में परेशानी है, वे भी तय मेडिकल सर्टिफिकेट के आधार पर इस सुविधा के पात्र हो सकते हैं।
स्क्राइब का इंतजाम उम्मीदवार को खुद और अपने खर्च पर करना होगा। स्क्राइब लॉ ग्रेजुएट या लॉ की पढ़ाई कर रहा व्यक्ति नहीं होना चाहिए और उसकी योग्यता परीक्षा देने वाले उम्मीदवार से एक स्तर कम होनी चाहिए।
संबंधित दस्तावेज परीक्षा से कम से कम 15 दिन पहले जमा करने होंगे। स्क्राइब लेने वाले उम्मीदवार को हर एक घंटे की परीक्षा के लिए 20 मिनट का अतिरिक्त समय मिलेगा।
परीक्षा में नहीं पहुंचे तो क्या होगा?
अगर उम्मीदवार को रोल नंबर जारी होने के बाद परीक्षा में शामिल नहीं होता, तो उसे पर्याप्त तैयारी नहीं करने वाला माना जाएगा। ऐसे मामले में उसे अगली परीक्षा में दोबारा बैठने का मौका तभी मिल सकता है, जब बोर्ड ऑफ एग्जामिनर्स अनुमति दे।
नोटिफिकेशन में यह भी कहा गया है कि जो उम्मीदवार परीक्षा के सभी पेपर में फेल हो जाता है, उसे अगली परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उत्तर पुस्तिका की री-इवैल्यूएशन नहीं होगी
नोटिफिकेशन के मुताबिक, उत्तर पुस्तिकाओं की री-इवैल्यूएशन के लिए कोई आवेदन या रिप्रेजेंटेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा। हालांकि, रिजल्ट जारी होने के बाद री-इवैल्यूएशन के अलावा किसी दूसरी तरह की राहत मांगने के लिए 30 दिन का समय दिया गया है।