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NIA खुद FIR कैसे दर्ज करती है? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, केंद्र से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने NIA की स्वतः FIR दर्ज करने की शक्ति पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। बेंच ने पूछा कि बिना स्पष्ट कानूनी प्रावधान के NIA कैसे FIR दर्ज कर सकती है।

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (National Investigation Agency) की उस शक्ति पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिसके तहत एजेंसी धारा 6(5) के अंतर्गत स्वतः FIR दर्ज कर जांच शुरू करती है।

जस्टिस विक्रम नाथ (Justice Vikram Nath) और जस्टिस संदीप मेहता (Justice Sandeep Mehta) की खंडपीठ ने केंद्र सरकार से पूछा कि स्पष्ट कानूनी प्रावधान के बिना NIA किस आधार पर FIR दर्ज कर सकती है।

वादी बनाम प्रतिवादी

यह मामला केरल के एक हत्या कांड से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों ने NIA द्वारा दर्ज किए गए नए केस को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

किसने क्या दलील दी

याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि:

  • FIR दर्ज होना जांच की बुनियादी शर्त है।
  • राज्य पुलिस पहले ही जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर चुकी थी।
  • ऐसे में NIA द्वारा नया केस दर्ज करना राज्यों के अधिकारों का उल्लंघन है।

वहीं, केंद्र सरकार ने दलील दी कि NIA “रेगुलर केस (RC)” के रूप में मामलों को दर्ज करती है और इसके लिए अधिसूचना जारी की गई है।

कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान बेंच ने कई अहम सवाल उठाए:

क्या NIA को स्वतः FIR दर्ज करने का अधिकार है?

क्या NIA को ‘पुलिस स्टेशन’ माना जा सकता है?

बिना SHO के क्या जांच और चार्जशीट संभव है?

अदालत ने संकेत दिया कि बिना स्पष्ट वैधानिक ढांचे के FIR दर्ज करना गंभीर कानूनी मुद्दा है।

क्या है पूरा विवाद?

यह मामला 2022 में केरल में हुए एक हत्या कांड से जुड़ा है।

  • राज्य पुलिस ने जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी थी।
  • इसके बाद केंद्र सरकार के आदेश पर NIA ने मामला अपने हाथ में लिया।
  • NIA ने धारा 6(5) के तहत नया केस दर्ज किया।
  • आरोपियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।

मुख्य विवाद यह है कि क्या NIA बिना पारंपरिक पुलिस स्टेशन की तरह संरचना के, सीधे FIR दर्ज कर सकती है।

कानूनी सिद्धांत (Legal Principle)

यह मामला संघीय ढांचे (Federal Structure) और आपराधिक प्रक्रिया के मूल सिद्धांतों से जुड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट करना चाहता है कि:

  • क्या जांच एजेंसी के पास FIR दर्ज करने का वैधानिक अधिकार होना अनिवार्य है
  • और क्या केंद्र सरकार की एजेंसी राज्य पुलिस के अधिकार क्षेत्र में सीधे हस्तक्षेप कर सकती है

कोर्ट ने क्या दिया निर्देश?

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह इस मामले में संबंधित अधिसूचनाएं और दस्तावेज पेश करे, जिनके आधार पर NIA FIR दर्ज करती है।

कोर्ट ने केंद्र सरकार को अतिरिक्त दस्तावेज दाखिल करने का समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी है।

क्यों अहम है मामला?

कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा केवल एक मामले तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है, जिस पर स्पष्टता आवश्यक है।

यह मामला पूरे देश में NIA की शक्तियों और उनके दायरे को तय करेगा। कोर्ट का फैसला यह स्पष्ट कर सकता है कि जांच एजेंसियों के अधिकार कहां तक सीमित हैं और राज्यों के अधिकारों की रक्षा कैसे की जाएगी।

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