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सबसे बड़े चुनाव की कहानी : 19 फरवरी से शुरू हुआ सफर, छह महीने बाद आज पूरा होगा राजस्थान बार काउंसिल चुनाव; 23 सदस्यों के परिणाम का आधिकारिक ऐलान आज

Rajasthan Bar Council Election 2026: 23 Members’ Results Likely Tomorrow After 3 Months of Counting

जोधपुर। करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई राजस्थान बार काउंसिल की चुनावी प्रक्रिया अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है।

19 फरवरी 2026 से शुरू हुई चुनावी कवायद करीब छह महीने बाद आज अपने निर्णायक मुकाम पर पहुंच गयी हैं.

करीब तीन माह तीन दिन तक चली लंबी और बेहद जटिल मतगणना प्रक्रिया गुरुवार को पूरी हो गई।

आज दोपहर 12 बजे सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित उच्चस्तरीय निर्वाचन समिति और निर्वाचन अधिकारी आधिकारिक रूप से 23 निर्वाचित सदस्यों के परिणाम घोषित करेंगे।

आधिकारिक घोषणा के साथ ही चुनावी प्रक्रिया का अंतिम चरण पूरा होगा।

इसके बाद निर्वाचित सदस्यों के नाम सरकार को भेजे जाएंगे और उनके नामों की राजपत्र अधिसूचना जारी की जाएगी।

राजपत्र में अधिसूचना जारी होने के बाद ही राजस्थान बार काउंसिल के सदस्यों का निर्वाचन विधिवत रूप से पूर्ण माना जाएगा।

सचिन आचार्य, रिटर्निंग अधिकारी

19 फरवरी से शुरू हुई चुनावी हलचल, 20 फरवरी को जारी हुआ कार्यक्रम

राजस्थान बार काउंसिल के चुनाव लंबे समय से लंबित थे। करीब आठ वर्ष के अंतराल के बाद चुनाव की प्रक्रिया को लेकर अधिवक्ता समुदाय में लंबे समय से इंतजार था।

19 फरवरी 2026 से चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत हुई, जबकि 20 फरवरी 2026 को चुनाव अधिसूचना जारी की गई।

यह पूरा चुनाव सुप्रीम कोर्ट के 18 नवंबर 2025 के आदेश की पालना में गठित उच्चस्तरीय कमेटी की निगरानी में राया गया।

7 मार्च को अनंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई। 8 से 14 मार्च तक आपत्तियां आमंत्रित की गईं और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 21 मार्च को अंतिम मतदाता सूची जारी की गई।

इसके बाद 22 से 28 मार्च तक नामांकन दाखिल हुए। 29 और 30 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच हुई। 31 मार्च को प्रत्याशियों की प्रारंभिक सूची जारी की गई और 2 अप्रैल शाम 5 बजे तक नाम वापस लेने का अवसर दिया गया। इसके बाद अंतिम प्रत्याशी सूची जारी हुई।

22 अप्रैल को हुआ मतदान, मैदान में थे 234 प्रत्याशी

चुनाव में कुल 234 प्रत्याशी मैदान में थे। प्रदेशभर में मतदान के लिए 258 मतदान केंद्र बनाए गए और 65 हजार से अधिक अधिवक्ताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया।

चुनाव से पहले राजस्थान में करीब 84 हजार से अधिक अधिवक्ता मतदाता सूची से जुड़े थे।

जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, अलवर, सीकर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मतदान केंद्र बनाए गए।

जयपुर क्षेत्र में ही 22 हजार से अधिक मतदाता होने के कारण राजधानी इस चुनाव का सबसे बड़ा केंद्र रही।

मतदान के बाद मतपेटियों का संकलन किया गया। इसके बाद मतगणना की लंबी प्रक्रिया शुरू हुई, जो करीब तीन माह तीन दिन तक चली।

क्यों इतनी लंबी चली मतगणना?

राजस्थान बार काउंसिल का यह चुनाव सामान्य चुनावों की तुलना में इसलिए बेहद जटिल रहा क्योंकि इसमें प्रेफरेंशियल वोटिंग सिस्टम अपनाया गया था।

234 प्रत्याशियों के बीच बड़े आकार के मतपत्रों पर मतदाताओं ने प्राथमिकता के आधार पर वोट दिए।

हर मतपत्र में दर्ज प्राथमिकता के अनुसार मतों की गणना, मतों का स्थानांतरण, कोटा पूरा होने के बाद प्रत्याशी के निर्वाचन की प्रक्रिया और प्रत्येक चरण का सत्यापन किया गया। यही वजह रही कि मतगणना में लंबा समय लगा।

निर्वाचन अधिकारी डॉ. सचिन आचार्य के अनुसार प्रक्रिया को केवल एक बार गिनकर परिणाम घोषित करने के बजाय बार-बार भौतिक सत्यापन और टैली का मिलान किया गया, ताकि मानवीय त्रुटि की संभावना को न्यूनतम किया जा सके और परिणामों की विश्वसनीयता बनी रहे।

रिटर्निंग अधिकारी डॉ सचिन आचार्य इस संपूर्ण चुनावी प्रक्रिया को एक बड़ी सफलता बताते हैं

2614.21 मतों का कोटा, आखिर में कपिल प्रकाश माथुर ने हासिल की जीत

प्रथम वरीयता मतों की गणना के बाद प्रत्येक प्रत्याशी के निर्वाचन के लिए 2614.21 मतों का कोटा निर्धारित किया गया था।

गुरुवार को मतगणना के अंतिम चरण में राजस्थान बार काउंसिल के पूर्व उपाध्यक्ष कपिल प्रकाश माथुर ने निर्धारित कोटा हासिल कर अपना निर्वाचन सुनिश्चित किया। वे अंतिम चरण में निर्वाचित होने वाले प्रत्याशी बने।

इससे पहले जीत की शुरुआत राजस्थान सरकार के पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता नीरज गुर्जर से हुई। उन्होंने निर्धारित कोटा हासिल कर सबसे पहले जीत सुनिश्चित की।

इसके बाद वर्ष 2018 से लगातार बार काउंसिल में अधिवक्ताओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हरेंद्र सिंह सिनसिनवार ने भी आवश्यक कोटा हासिल किया।

इसके बाद क्रमशः रतन सिंह राव (उदयपुर), अतिरिक्त महाधिवक्ता भुवनेश शर्मा, बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह-अध्यक्ष सुरेश चंद्र श्रीमाली, प्रशांत शर्मा, पूर्व उपाध्यक्ष योगेंद्र सिंह शक्तावत, राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट एसोसिएशन जोधपुर के अध्यक्ष रणजीत जोशी, पूर्व अध्यक्ष रामप्रसाद सिंगारिया, पूर्व अध्यक्ष कुलदीप कुमार शर्मा, उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह राठौड़, पूर्व अध्यक्ष सैयद शाहिद हसन, पूर्व अध्यक्ष रतनाराम ठोलिया, देवीलाल रावला, पूर्व अध्यक्ष राजेश पंवार, सतीश खांडल, रजनीश गुप्ता और कपिल प्रकाश माथुर ने भी निर्धारित कोटा हासिल कर निर्वाचन सुनिश्चित किया।

पांच महिला सीटों पर भी तस्वीर लगभग साफ

इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक महिला प्रतिनिधित्व के लिए पांच सीटों का प्रावधान रहा।

उपलब्ध मतगणना के आधार पर अंजली कौशिक, आरजू खान, हेमा तिवारी, शशिबाला जैन और अनामिका सांदू का निर्वाचन तय माना जा रहा है। हालांकि इन नामों की अंतिम और आधिकारिक पुष्टि शुक्रवार दोपहर 12 बजे निर्वाचन अधिकारी द्वारा परिणाम घोषित किए जाने के बाद ही होगी।

कुल 234 प्रत्याशियों में 57 महिला प्रत्याशी मैदान में थीं। पहली बार पांच सीटों पर महिला प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किए जाने से चुनाव में महिला अधिवक्ताओं की भागीदारी को नया आयाम मिला।

54 साल की वकालत से लेकर कुछ महीने पुराने पंजीयन वाले प्रत्याशी तक

इस चुनाव की सबसे दिलचस्प तस्वीर वरिष्ठ और युवा अधिवक्ताओं के बीच दिखाई दी।

संतोष कुमार जैन सबसे वरिष्ठ प्रत्याशियों में प्रमुख रहे। उनका पंजीयन 11 सितंबर 1972 का है और उनके पास करीब 54 वर्ष का वकालती अनुभव है।

वहीं रणजीत जोशी का पंजीयन 27 अक्टूबर 1979 का है। करीब 47 वर्षों से विधि पेशे में सक्रिय जोशी राजस्थान एडवोकेट एसोसिएशन, जोधपुर के 19 बार अध्यक्ष रह चुके हैं।

दूसरी ओर चुनाव में ऐसे युवा चेहरे भी मैदान में उतरे जिनका पंजीयन चुनाव की घोषणा से कुछ ही महीने पहले हुआ था।

बीकानेर की माया मेघवाल का पंजीयन 21 दिसंबर 2025 का है और वे सबसे युवा प्रत्याशी के रूप में चर्चा में रहीं। खास बात यह रही कि उन्होंने दो पृष्ठ का विजन डॉक्युमेंट भी प्रस्तुत किया।

अलवर की पूनम यादव का पंजीयन 4 अक्टूबर 2025 का है। इसके अलावा जयपुर की भावना शर्मा, जिनका पंजीयन 18 दिसंबर 2022 का है, भी युवा महिला चेहरों में प्रमुख रहीं।

इस तरह 234 प्रत्याशियों वाला चुनाव अनुभव और युवा ऊर्जा के बीच एक दिलचस्प मुकाबले के रूप में सामने आया।

पूर्व जिला जज की उम्मीदवारी ने भी खींचा ध्यान

चुनाव में पूर्व न्यायिक अधिकारी लक्ष्मण दत्त किराडू की उम्मीदवारी भी चर्चा का विषय रही। वे राजस्थान न्यायिक सेवा में जिला जज कैडर से सेवानिवृत्त हुए थे और पॉक्सो कोर्ट से सेवानिवृत्ति के बाद वकालत कर रहे हैं।

उनकी उम्मीदवारी ने चुनावी मैदान में न्यायिक अनुभव और बार राजनीति का एक अलग समीकरण पेश किया।

तीन डेजिग्नेटेड सीनियर एडवोकेट

इस चुनाव में तीन डेजिग्नेटेड सीनियर एडवोकेट भी प्रत्याशी रहे—सैयद शाहिद हसन, राजीव सुराणा और राजेश पंवार।

सैयद शाहिद हसन का पंजीयन 7 सितंबर 1984, राजीव सुराणा का 5 दिसंबर 1993 और राजेश पंवार का 7 जुलाई 1997 का है।

इन वरिष्ठ अधिवक्ताओं की मौजूदगी ने चुनाव में अनुभव और प्रतिष्ठा का स्तर और बढ़ाया।

हालाकि इनमें से सैयद शा​हिद हसन और राजेश पंवार ही निर्वाचित हो पाए.

अब सिर्फ आधिकारिक घोषणा का इंतजार

करीब छह महीने तक चली चुनावी प्रक्रिया और तीन माह तीन दिन की लंबी मतगणना के बाद अब राजस्थान के अधिवक्ता समुदाय की निगाहें दोपहर 12 बजे होने वाली आधिकारिक घोषणा पर टिकी हैं।

मतगणना पूरी हो चुकी है। अधिकांश निर्वाचित प्रत्याशियों की तस्वीर सामने आ चुकी है और महिला सीटों की स्थिति भी लगभग स्पष्ट है। लेकिन अंतिम मुहर निर्वाचन अधिकारी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही लगेगी।

परिणाम घोषित होने के बाद सभी निर्वाचित सदस्यों के नाम सरकार को भेजे जाएंगे और राजपत्र अधिसूचना के जरिए उन्हें विधिवत अधिसूचित किया जाएगा।

इस घोषणा के साथ राजस्थान बार काउंसिल के करीब आठ साल बाद हुए चुनाव का लंबा सफर समाप्त होगा और 23 निर्वाचित सदस्यों के साथ नई परिषद के गठन की राह साफ हो जाएगी।

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