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मेडिकल पीजी छात्र सुसाइड मामले में पिता ने लगाए सबूत मिटाने के आरोप, हाईकोर्ट ने दिए 15 दिन में FSL रिपोर्ट जांच पेश करने के आदेश

Medical PG Student Suicide Case: Rajasthan High Court Orders Strict Monitoring of Police Probe, Sets Deadlines for FSL and Final Report

जोधपुर। जोधपुर मेडीकल कॉलेज के छात्र आत्महत्या के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए FSL निदेशक को मृतक छात्र के विसरा जांच की FSL रिपोर्ट 15 दिन में जांच अधिकारी को देने के आदेश दिए हैं.

मृतक छात्र के पिता श्रीकृष्ण की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस फरजंद अली की एकलपीठ ने कहा कि एक युवा, होनहार डॉक्टर की मौत को “साधारण आत्महत्या” बताकर नहीं छोड़ा जा सकता, बल्कि हर एंगल से निष्पक्ष, पारदर्शी और बिना पूर्वाग्रह के जांच होनी चाहिए।

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि यह मामला दुखद, पीड़ादायक और संदेहास्पद परिस्थितियों से जुड़ा है। मृतक छात्र एमबीबीएस पूरा करने के बाद मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में रहकर पीजी कर रहा था।

पिता ने लगाए गंभीर आरोप

राजस्थान हाईकोर्ट में मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पिता की ओर से दायर कि गयी याचिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं.

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि समय बीतने के साथ सबूत नष्ट होने, छेड़छाड़ या दबाए जाने का खतरा है। इसी आधार पर जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने की मांग की गई।

सुनवाई के दौरान मृतक के पिता की ओर से कहा गया कि पुलिस ने पहले ही यह राय बना ली थी कि उकसाने के आरोप सिद्ध नहीं हुए और यह सामान्य आत्महत्या का मामला है।

लेकिन यह रिपोर्ट न तो मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश की गई और न ही न्यायिक जांच के स्तर पर परखी गई। इसे केवल वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष रखा गया

चार निर्णायक बिंदुओं पर पुनः जांच

याचिकाकर्ता पिता का आरोप है कि छात्र को मानसिक रूप से इस कदर प्रताड़ित किया गया कि उसे आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा।

कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए तथ्यों से मौत के तरीके और कारणों पर गंभीर संदेह उत्पन्न होता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

याचिकाकर्ता पिता की ओर से अदालत को बताया गया कि इस मामले में DCP ने खुद जांच में कमी हैंत्र. मामले की गंभीरता को देखते हुए डीसीपी जोधपुर (पश्चिम) ने खुद जांच अधिकारी को चार निर्णायक बिंदुओं पर पुनः जांच के आदेश दिए थे.

हाईकोर्ट ने भी कहा इन चार बिंदूओ पर विस्तृत जांच करने का आदेश दिया हैं. जिसमें

FSL रिपोर्ट – विसरा जांच से मौत का वास्तविक कारण स्पष्ट किया जाए

कॉलेज शिकायत रिकॉर्ड – क्या छात्र ने प्रिंसिपल या किसी अधिकारी को लिखित शिकायत दी थी

शैक्षणिक रिकॉर्ड – थ्योरी व प्रैक्टिकल अंकों की जांच, क्या किसी तरह का उत्पीड़न हुआ

जयपुर रेफर करने का कारण – AIIMS नहीं भेजा गया, इसके पीछे क्या वजह थी

जांच अधिकारी वही, लेकिन ACP की कड़ी निगरानी

मामले की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी से कराने के अनुरोध को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि मामले की जांच वर्तमान जांच अधिकारी शैतान सिंह चौधरी ही जांच जारी रखेंगे लेकिन पूरी जांच सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) की मोनिटरिंग में होगी.

मामले में ACP केस डायरी ओर जांच की दिशा पर लगातार नजर रखने के साथ ही जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी को निर्देश देने का पूरा अधिकार होगा

कोर्ट ने साफ किया कि यह व्यवस्था जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अनिवार्य है.

15 दिन में FSL रिपोर्ट, 2 माह में अंतिम रिपोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने मामले में एफएसएल निदेशक को सख्त आदेश दिया ​हैं कि मृतक छात्र की विसरा जांच 15 दिनों में पूरी करें और रिपोर्ट सीधे पुलिस कमिश्नर, जोधपुर को सौंपी जाए.

हाईकोर्ट ने यह भी आदेश दिया हैं कि इस मामले में जांच अधिकारी पूरी जांच बिना किसी पूर्वाग्रह के करते हुए अंतिम जांच रिपोर्ट 2 महीने के भीतर संबंधित अदालत में पेश करे.

साथ ही हाईकोर्ट मृतक छात्र के पिता को छूट दी हैं कि जरूरत होने पर वे फिर से कोर्ट में याचिका दायर कर सकते हैं.

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