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राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति पर बड़ा सवाल! कब मिलेगा न्यायपालिका को नया बल?

Rajasthan Judiciary Faces Crisis: Delay in Judges’ Appointments and Chief Justice Post Raises Concerns

11 पद खाली, फाइलें अटकी-एक साल बाद भी केन्द्र का फैसला नहीं, 6 माह से मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति तक नहीं

जयपुर। राजस्थान की न्याय व्यवस्था इस समय एक निर्णायक दौर से गुजर रही है। राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति को लेकर लगातार हो रही देरी से लेकर रेगुलर मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं होना अब केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि न्यायिक संकट का रूप लेती जा रही है।

50 स्वीकृत पदों वाले इस हाईकोर्ट में वर्तमान में मात्र 39 जज कार्यरत हैं, जिससे 11 पद रिक्त पड़े हैं और इसका सीधा असर लंबित मामलों की सुनवाई पर पड़ रहा है।

राजस्थान हाईकोर्ट में जजों की कमी केवल एक संख्या नहीं, बल्कि यह लाखों मामलों की सुनवाई और आम जनता के न्याय के अधिकार से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

अगर नियुक्तियों में इसी तरह देरी जारी रही, तो लंबित मामलों का बोझ और बढ़ेगा और न्याय की प्रक्रिया और धीमी हो जाएगी।

दूसरी तरफ 6 माह से अधिक समय से रेगुलर मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं होना कई सवाल खड़े करता हैं.

विधि जगत में लगातार यह चर्चा हैं कि अगर वर्तमान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को मुख्य न्यायाधीश के पद पद पदोन्नति दी जानी है तो उने सेवानिवृत समय करीब आने का क्यों इंतजार किया जा रहा हैं.

एक साल से लंबित फाइल-केन्द्र की चुप्पी पर उठे सवाल

राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा भेजे गए नामों को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इसके बावजूद मामला केन्द्र सरकार के पास पिछले लगभग एक साल से लंबित है।

सबसे चर्चित नाम अधिवक्ता शीतल मिर्धा का है, जिन्हें अधिवक्ता कोटे से जज बनाने की सिफारिश की गई थी। 5 मई 2025 को कॉलेजियम ने उनके नाम पर मुहर लगाकर केन्द्र को भेज दिया था।

लेकिन हैरानी की बात यह है कि करीब 11 महीने बीत जाने के बाद भी केन्द्र सरकार की ओर से कोई निर्णय सामने नहीं आया।

कानूनी समुदाय में यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि जब देश के कानून मंत्री का सीधा संबंध राजस्थान से है, तो फिर इस महत्वपूर्ण नियुक्ति में इतनी देरी क्यों हो रही है?

11 पद रिक्त-कॉलेजियम की बैठक पर टिकी उम्मीदें

वर्तमान स्थिति में हाईकोर्ट के 11 पद खाली हैं, जिनमें से एक नाम पहले से ही केन्द्र के पास लंबित है। ऐसे में कॉलेजियम अधिकतम 10 नए नामों की सिफारिश कर सकता है।

पिछले एक महीने से कॉलेजियम बैठक को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सूत्रों के अनुसार—

जयपुर और जोधपुर दोनों पीठों में वरिष्ठ न्यायाधीशों की बैठकों का दौर चला
दर्जनों अधिवक्ताओं और 5 जिला एवं सत्र न्यायाधीशों के नामों पर विचार हुआ
लेकिन अब तक कोई आधिकारिक निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया

अंदरखाने खबर है कि कॉलेजियम अभी भी कुछ नामों पर सर्वसम्मति बनाने में जुटा हुआ है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लेकर भी असमंजस

इस पूरी प्रक्रिया में एक बड़ा संवैधानिक सवाल भी उभर कर सामने आया है-क्या कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश कॉलेजियम के माध्यम से नए जजों के नामों की सिफारिश कर सकते हैं?

सूत्रों के मुताबिक, इस पर सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।

हालांकि, देश में पहले भी ऐसे उदाहरण रहे हैं जब कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने ही सिफारिशें भेजी हैं।

सितंबर 2026 में रिटायर होंगे कार्यवाहक सीजे

वर्तमान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा सितंबर 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले हैं।

सूत्रों के अनुसार, इससे पहले उन्हें स्थायी मुख्य न्यायाधीश बनाए जाने की संभावनाएं भी जताई जा रही हैं।

ऐसे में आने वाले कुछ सप्ताह बेहद निर्णायक माने जा रहे हैं।

50 पदों का वर्गीकरण

राजस्थान हाईकोर्ट में स्वीकृत जजों के 50 पदों के लिए अधिवक्ता और न्यायिक अधिकारी कोटे का वर्गीकरण हैं.

प्रत्येक तीन अधिवक्ता पर 1 न्यायिक अधिकारी की नियुक्ति हाईकोर्ट जज के रूप में कि जाती हैं

इस आधार पर वर्तमान में राजस्थान हाईकोर्ट में 33 पद अधिवक्ता कोटे के लिए रखे गये हैं वही 17 पद न्यायिक अधिकारी कोटे के लिए रिजर्व हैं.

वर्तमान में न्यायिक अधिकारी कोटे से 12 जज कार्यरत हैं ऐसे में 5 न्यायिक अधिकारी कोटे से जजों के नाम कॉलेजियम भेजेगा.

न्यायिक कोटे के 5 पद

राजस्थान हाईकोर्ट कॉलेजियम के तीनों सदस्यों की पिछले दिनों जयपुर हाईकोर्ट में सिटिंग के दौरान न्यायिक अधिकारी कोटे के नामों को कंसीडर किये जाने की चर्चा सामने आयी.

जिला न्यायाधीश (डीजे) कैडर के खाली 5 पदों के लिए वरिष्ठता के आधार पर :— अभय जैन, नंदीनी व्यास, ज्ञानप्रकाश गुप्ता, चंचल मिश्रा, राघवेन्द्र काछवाल, अश्विनी विज, अतुल सक्सैना, बलजीतसिंह, विक्रांत गुप्ता, सत्यनारायण व्यास, ब्रजेन्द्र जैन के नाम कंसीडरेशन के लिए रखे जाने की चर्चा हैं.

कॉलेजियम इनमें से 5 नाम फाइनल कर आगे भेज सकता हैं.

अधिवक्ता कोटे के संभावित नाम

जयपुर पीठ :— अधिवक्ता सिद्धार्थ रांका, अलंकृता शर्मा, माही यादव, समित बिश्नोई, अश्वनी चौबीसा, विज्ञान शाह, शोभित तिवाड़ी, संदीप पाठक, तनवीर अहमद, सुरुचि कासलीवाल, प्रतीक कासलीवाल, गुंजन पाठक, राहुम कामरा,

जोधपुर मुख्यपीठ:— पंकज शर्मा, महावीर बिश्नोई, मृगराज सिंह, विवेक श्रीमाली, संजय नाहर, विकास जैन, हरीश पुरोहित, सपना वैष्णव, विनय जैन, शोभा प्रभाकर सहित कई नामों को लेकर चर्चा जारी हैं.

अधिवक्ता कोटे से जजों के नामों की सूची को लेकर फिलहाल संशय बना हुआ हैं जयपुर से लेकर दिल्ली तक फिलहाल पत्रों का आवागमन जारी हैं.

और मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति..

राजस्थान में वर्तमान में पिछले 6 माह से अधिक समय से जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश हैं।

संभवतः राजस्थान के इतिहास में लगातार 6 माह से अधिक समय तक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रहने वाले प्रथम न्यायाधीश हैं।

पिछले 6 माह से उनके नियमित मुख्य न्यायाधीश बनने की चर्चा हर माह होती है।

इस बीच सीजेआई के राजस्थान में दौरे इन चर्चाओं को फिर से मजबूती देते हैं।

इसके बावजूद अब तक राजस्थान में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति नहीं होने से राजस्थान की न्यायपालिका केवल इंतजार कर रही है।

CJI 25 को आएंगे जयपुर

अगले सप्ताह 25 अप्रैल को एक बार फिर देश के मुख्य न्यायाधीश राजस्थान में होंगे। वे यहां रिटायर्ड जजों की सालाना बैठक के पहले दिन आयोजित होने वाली एक कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे।

रालसा के सहयोग से होने वाली इस कॉन्फ्रेंस का मकसद वैसे तो सेवानिवृत्त जजों के अनुभव और विशेषज्ञता के उपयोग से न्याय व्यवस्था को मजबूती प्रदान करने की दिशा में बढ़ाया गया कदम है।

लेकिन हकीकत यह भी है कि इस कॉन्फ्रेंस के पीछे सीजेआई के दौरे के जरिए एक उम्मीद जताई जा रही है कि वे राजस्थान में मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति शीघ्र करेंगे।

इस दौरे के बाद राजस्थान में नियमित मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति होने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।

क्या जल्द मिलेगी न्यायपालिका को राहत?

अब 3 बड़े सवाल सबसे अहम हैं :

केन्द्र सरकार लंबित नामों पर कब फैसला लेगी?
हाईकोर्ट कॉलेजियम नए नामों की सिफारिश कब करेगा?

क्या राजस्थान को रेगलुर मुख्य न्यायाधीश मिलेंगे?

संभावना जताई जा रही है कि अगले एक महीने में नए नाम सामने आ सकते हैं, जिससे न्यायिक व्यवस्था को कुछ राहत मिल सकती है।

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