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दत्तक पुत्र को पारिवारिक पेंशन का अधिकार: प्रशासनिक संस्थाएं अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कानूनी दस्तावेजों की वैधता तय नहीं कर सकतीं – राजस्थान हाईकोर्ट

Adopted Son Entitled to Family Pension: Rajasthan High Court Sets Aside CAT Order

दत्तक पुत्र के पारिवारिक पेंशन मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पंजीकृत दत्तक पत्र तब तक वैध जब तक सक्षम न्यायालय निरस्त न कर दे, CAT का आदेश रद्द

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि विधिवत पंजीकृत (रजिस्टर्ड) दत्तक पत्र (Adoption Deed) को तब तक वैध माना जाएगा, जब तक कि किसी सक्षम न्यायालय द्वारा उसे निरस्त न किया जाए।

राजस्थान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि केवल इस आधार पर पारिवारिक पेंशन से इनकार करना कि दत्तक पत्र में धर्म का उल्लेख नहीं है, पूरी तरह से अवैध और अस्थिर (unsustainable) है।

यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता संजीव कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनाया।

क्या है मामला

यह मामला हरियाणा निवासी संजीव कुमार से जुड़ा है, जो दिवंगत रेलवे कर्मचारी माया राम के दत्तक पुत्र हैं। संजीव कुमार ने अपने दत्तक पिता की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया और इसके समर्थन में एक विधिवत पंजीकृत दत्तक पत्र रेलवे प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया।

लेकिन उत्तर पश्चिम रेलवे, बीकानेर ने 29 अप्रैल 2024 को जारी आदेश में उनका दावा खारिज कर दिया। रेलवे का तर्क था कि दत्तक पत्र में यह उल्लेख नहीं है कि गोद लेना हिंदू धर्म के तहत किया गया था, इसलिए इसे वैध नहीं माना जा सकता।

इसके बाद संजीव कुमार ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), जोधपुर में याचिका दायर की, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। CAT ने भी रेलवे के निर्णय को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।

संजीव कुमार ने अंततः राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

याचिकाकर्ता की ओर से पक्ष

याचिकाकर्ता संजीव कुमार की ओर से निम्न दलील दी गई कि याचिकाकर्ता दिवंगत रेलवे कर्मचारी माया राम के विधिवत दत्तक पुत्र हैं और दत्तक ग्रहण पंजीकृत दत्तक पत्र (Registered Adoption Deed) के माध्यम से किया गया है, जो कानूनन वैध है।

यह भी कहा गया कि उक्त दत्तक पत्र रेलवे प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किया गया था, फिर भी पारिवारिक पेंशन देने से इनकार कर दिया गया।

अधिवक्ता ने कहा कि केवल इस आधार पर दावा खारिज करना कि दत्तक पत्र में “हिंदू धर्म” का उल्लेख नहीं है, कानून के विपरीत है।

हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 16 के अनुसार पंजीकृत दत्तक पत्र को वैध मानने की बाध्यता है।

अधिवक्ता ने कहा कि जब तक किसी सक्षम न्यायालय द्वारा दत्तक पत्र को निरस्त नहीं किया जाता, तब तक उसकी वैधता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

अधिवक्ता ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि CAT और रेलवे के आदेशों को निरस्त कर पारिवारिक पेंशन देने की मांग की जाए।

प्रतिवादी रेलवे की ओर से पक्ष

रेलवे प्रशासन (उत्तर पश्चिम रेलवे, बीकानेर) की ओर से याचिका का विरोध करते हुए दलील दी गई कि

प्रस्तुत दत्तक पत्र में यह स्पष्ट उल्लेख नहीं है कि गोद लेना हिंदू विधि के तहत किया गया।

दत्तक ग्रहण की वैधता के लिए हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 6 के आवश्यक तत्वों का पालन होना जरूरी है।

चूंकि दत्तक पत्र में आवश्यक विवरणों का अभाव है, इसलिए इसे वैध दत्तक ग्रहण का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

इसी आधार पर पारिवारिक पेंशन का दावा खारिज किया गया और CAT ने भी इस निर्णय को सही ठहराया।

हाईकोर्ट का फैसला

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि हिंदू दत्तक और भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 16 के तहत पंजीकृत दत्तक पत्र को वैध माना जाता है, जब तक कि उसे किसी सक्षम न्यायालय में चुनौती देकर निरस्त न किया जाए।

हाईकोर्ट ने कहा कि दत्तक पत्र की वैधता को चुनौती देने का अधिकार केवल सक्षम सिविल कोर्ट के पास है। CAT या रेलवे अधिकारी इस पर सवाल नहीं उठा सकते।

इस मामले में दत्तक पत्र को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी गई थी।

CAT और रेलवे की कार्यवाही पर सवाल

हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि CAT और रेलवे प्रशासन ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर दत्तक पत्र को अमान्य ठहराया।

कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक संस्थाएं ऐसे दस्तावेजों की वैधता पर निर्णय नहीं ले सकतीं, जिन्हें कानून के तहत वैधता का अनुमान प्राप्त है।

पेंशन जारी करने का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में याचिकाकर्ता की याचिका को स्वीकार करते हुए CAT के 22 अक्टूबर 2024 और रेलवे के 29 अप्रैल 2024 के आदेश को रद्द कर दिया।

रेलवे को निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को पारिवारिक पेंशन और सभी देय सेवानिवृत्ति लाभ दिए जाएं।

साथ ही 9% वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान करने का आदेश दिया।

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