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सुप्रीम कोर्ट ने NCLT की देरी को कहा ‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’, 2 साल से लंबित रिजॉल्यूशन प्लान पर जताई नाराज़गी

Would Have Sold the State”: Supreme Court Denies Bail to RAS Exam Scam Accused
NCLT में रिजॉल्यूशन प्लान की मंजूरी में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त नाराज़गी जताई है। करीब 2 साल से लंबित मामलों को “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” बताते हुए कोर्ट ने NCLT और IBBI से देशभर का डेटा मांगा है।

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने दिवाला मामलों के निपटारे में हो रही देरी पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए National Company Law Tribunal (NCLT) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

अदालत ने कहा है कि रिजॉल्यूशन प्लान की मंजूरी में लगभग दो साल की देरी “बेहद दुर्भाग्यपूर्ण” है और यह Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) की मूल भावना के खिलाफ है।

जस्टिस J.B. Pardiwala और जस्टिस K.V. Viswanathan की बेंच ने स्पष्ट किया कि IBC का उद्देश्य समयबद्ध तरीके से दिवाला प्रक्रिया पूरी करना है, लेकिन इस तरह की देरी पूरे सिस्टम को कमजोर कर रही है।

मामले से सामने आई सिस्टम की बड़ी खामी

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि एक व्यापक समस्या का संकेत है। अदालत के संज्ञान में आया है कि देशभर में NCLT की विभिन्न बेंचों में कई रिजॉल्यूशन प्लान सालों से मंजूरी के इंतजार में पड़े हैं।

कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि अगर समय पर निर्णय नहीं होंगे, तो IBC के तहत तय समयसीमा का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।

क्या है पूरा मामला

यह मामला IIFL Finance Limited से जुड़े एक दिवाला विवाद का है। कंपनी का ₹85 करोड़ का दावा वर्ष 2020 में रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल द्वारा खारिज कर दिया गया था, जिसे बाद में NCLT और अपीलीय ट्रिब्यूनल ने 2023 में स्वीकार कर लिया।

इसी बीच, 4 जुलाई 2024 को कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) ने एक रिजॉल्यूशन प्लान को मंजूरी दी और 12 जुलाई 2024 को इसे NCLT के समक्ष अंतिम स्वीकृति के लिए दाखिल किया गया। लेकिन यह आवेदन अब तक लंबित है, जिससे पूरी प्रक्रिया अटक गई है।

आर्बिट्रेशन अवॉर्ड से बढ़ी जटिलता

इस मामले को और जटिल बनाता है 3 जुलाई 2024 का एक आर्बिट्रेशन अवॉर्ड, जिसमें IIFL Finance Limited के दावे पर सवाल उठाए गए और संबंधित लोन दस्तावेजों को संदिग्ध बताया गया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ संकेत दिया कि कानूनी जटिलता के बावजूद अनावश्यक देरी स्वीकार्य नहीं है।

NCLT और IBBI से मांगी देशभर की रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने NCLT Principal Bench और Insolvency and Bankruptcy Board of India (IBBI) को निर्देश दिया है कि वे दो सप्ताह के भीतर देशभर का विस्तृत डेटा प्रस्तुत करें। कोर्ट ने खास तौर पर यह जानकारी मांगी है-

  • कितने रिजॉल्यूशन प्लान मंजूरी के लिए लंबित हैं
  • वे कितने समय से लंबित हैं
  • अब तक उन पर निर्णय क्यों नहीं लिया गया

कोर्ट की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि “CoC द्वारा मंजूर प्लान का लगभग दो साल तक लंबित रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।”

अदालत ने यह भी कहा कि जब प्लान को मंजूरी मिल जाती है, तो NCLT की जिम्मेदारी है कि वह समय पर उस पर निर्णय ले, वरना IBC की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होती है।

अमिकस क्यूरी की नियुक्ति

मामले की सुनवाई में सहायता के लिए कोर्ट ने वरिष्ठ वकील Gopal Jain और Navin Pahwa को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।

संदेश साफ-देरी अब बर्दाश्त नहीं

इस पूरे मामले पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब दिवाला मामलों में देरी को लेकर कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

अदालत का सख्त रुख National Company Law Tribunal (NCLT) की कार्यप्रणाली में सुधार और मामलों के समयबद्ध निपटारे की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

क्यों अहम है यह फैसला?

यह आदेश स्पष्ट करता है कि IBC के तहत तय समयसीमा केवल कागजों तक सीमित नहीं रह सकती। अगर समय पर फैसले नहीं होंगे, तो निवेशकों का भरोसा और पूरी आर्थिक प्रक्रिया प्रभावित होगी।

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप सिस्टम में जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

अगली सुनवाई कब?

अदालत ने NCLT और IBBI को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 अप्रैल 2026 को होगी, जहां कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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