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जयपुर में आज ‘न्यायिक राजधानी’ जैसा माहौल: सभी 39 जज एक साथ जयपुर पीठ में करेंगे सुनवाई, लेकिन वकीलों का बहिष्कार

Jaipur Turns One-Day Judicial Capital: All 39 Rajasthan High Court Judges Sit Together Amid Lawyers’ Boycott

जयपुर, 25 अप्रैल 2026। आज राजस्थान हाईकोर्ट के इतिहास में एक असाधारण दिन दर्ज हो रहा है।

पहली बार हाईकोर्ट के सभी 39 न्यायाधीश जयपुर पीठ में एक साथ बैठकर मामलों की सुनवाई कर रहे हैं।

इस विशेष व्यवस्था के कारण जयपुर एक दिन के लिए ‘न्यायिक राजधानी’ जैसा स्वरूप ले चुका है।

एक साथ 39 जज, ऐतिहासिक सिटिंग

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर जारी विशेष रोस्टर के अनुसार आज सभी जज जयपुर में बैठकर सुनवाई कर रहे हैं।

इस विशेष सुनवाई के लिए 4 लार्जर बेंच, 6 डिवीजन बेंच और 15 एकलपीठ का गठन किया गया हैं.

विशेष बात यह है कि जोधपुर मुख्यपीठ के मामलों की सुनवाई भी जयपुर से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की जा रही है।

CJI के दौरे से बना विशेष माहौल

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत का जयपुर दौरा अहम माना जा रहा है।

सीजेआई आज संविधान क्लब में आयोजित एक महत्वपूर्ण सेमिनार को संबोधित करेंगे, जिसमें भजनलाल शर्मा की भी मौजूदगी रहेगी।

वकीलों का बहिष्कार, बार-बेंच टकराव

जहां एक ओर न्यायाधीशों की ऐतिहासिक सिटिंग हो रही है, वहीं दूसरी ओर अधिवक्ताओं ने आज न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन, जोधपुर, राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर और राजस्थान हाईकोर्ट बार एसोसिएशन, जयपुर तीनों बार एसोसिएशनों ने पहले ही 25 अप्रैल को बहिष्कार का निर्णय ले लिया था।

विवाद की जड़: वर्किंग शनिवार

वकीलों का विरोध मुख्य रूप से हाईकोर्ट द्वारा वर्ष 2026 में कई शनिवार को कार्यदिवस घोषित करने के फैसले को लेकर है।

बार का कहना है कि यह निर्णय अधिवक्ताओं के कार्य-जीवन संतुलन और पारंपरिक न्यायिक व्यवस्था के खिलाफ है, जबकि अदालत प्रशासन इसे लंबित मामलों के निस्तारण के लिए जरूरी कदम बता रहा है।

तकनीकी चुनौतियां भी चिंता का विषय

आज की सुनवाई का बड़ा हिस्सा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हो रहा है, लेकिन हाईकोर्ट परिसर में इंटरनेट और तकनीकी समस्याएं पहले से ही चिंता का विषय रही हैं।

ऐसे में अधिवक्ताओं का कहना है कि बिना मजबूत तकनीकी व्यवस्था के इस तरह की सुनवाई प्रभावित हो सकती है।

क्या होगा असर?

एक तरफ ऐतिहासिक पहल—जहां सभी जज एक साथ बैठकर सुनवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ वकीलों का बहिष्कार इस पूरे आयोजन की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है।

फिलहाल, यह दिन न्यायिक इतिहास में एक अनोखे प्रयोग के रूप में दर्ज हो गया है, जिसका प्रभाव आने वाले समय में न्यायिक व्यवस्था पर देखा जाएगा।

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