नई दिल्ली/जयपुर। बहुचर्चित सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती 2021 रद्द करने के राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट 27 अप्रैल को सुनवाई करेगा।
Supreme Court of India ने इस मामले में 27 अप्रैल को सुनवाई तय की है, जिससे हजारों अभ्यर्थियों की उम्मीदें और चिंताएं एक साथ बढ़ गई हैं।
बहुचर्चित मामले की सुनवाई Justice Dipankar Datta और Justice Satish Chandra Sharma की पीठ करेगी।
यह सुनवाई इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें भर्ती प्रक्रिया की वैधता, पारदर्शिता और न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे बड़े सवाल तय होंगे।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट की शरण
गौरतलब है कि Rajasthan High Court ने 4 अप्रैल को ही एसआई भर्ती 2021 को रद्द करते हुए एकलपीठ के फैसले पर मुहर लगा दी थी।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में पेपर लीक और अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए पूरी चयन प्रक्रिया को निरस्त कर दिया था।
एकलपीठ के बाद खंडपीठ ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा, जिससे चयनित अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा।
इसी फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों पायल शर्मा व अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर कर भर्ती को बचाने की अपील की है।
दूसरी तरफ अचयनित अभ्यर्थी कैलाश शर्मा व अन्य की ओर से भी मामले में कैवियट दायर की गई है।
याचिका में क्या कहा गया?
पायल शर्मा व अन्य चयनित अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता क्रिस्टी जैन ने याचिका दायर की है।
दायर याचिका में सुप्रीम कोर्ट में कहा गया है कि सभी अभ्यर्थियों को एक साथ दंडित करना न्यायसंगत नहीं है। जिनका चयन निष्पक्ष तरीके से हुआ है, उन्हें सेवा में बनाए रखा जाए। दोषियों के खिलाफ अलग से कठोर कार्रवाई की जाए।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि उन्होंने वर्षों की मेहनत के बाद परीक्षा पास की है और पूरी भर्ती रद्द करना उनके साथ अन्याय है।
अचयनित अभ्यर्थियों की कैवियट
इस मामले में अचयनित अभ्यर्थियों ने भी अपनी मजबूत कानूनी तैयारी कर ली है। उनकी ओर से अधिवक्ता ऋषभ संचेती और हरेन्द्र नील के जरिए कैवियट दायर की गई है।
कैवियट का अर्थ है कि अदालत बिना उनका पक्ष सुने कोई भी आदेश पारित नहीं कर सकती।
कैवियट दायर कर अचयनित अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि उन्हें बिना सुने कोई निर्णय नहीं किया जाए।
कैसे शुरू हुआ विवाद
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित SI भर्ती परीक्षा 2021 राज्य की महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक थी।
हजारों अभ्यर्थियों ने इसमें हिस्सा लिया, लेकिन परीक्षा के बाद ही अनियमितताओं की शिकायतें सामने आने लगीं।
धीरे-धीरे यह मामला केवल संदेह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ठोस साक्ष्यों के साथ सामने आया कि परीक्षा प्रश्नपत्र लीक हुआ था, संगठित तरीके से अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाया गया और कुछ चयनित उम्मीदवारों की भूमिका संदिग्ध थी।
जैसा कि अदालत के दस्तावेज़ में दर्शाया गया है, इस मामले में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाया गया, जिनमें कई चयनित उम्मीदवार भी शामिल थे।
SI भर्ती – 2021 पेपर लीक की तारीखें
सबसे पहले पेपर लीक का आरोप लगाते हुए कैलाश चन्द्र शर्मा के साथ कई अभ्यर्थियों ने नवंबर 2024 में याचिकाएं दायर कीं।
राज्य सरकार ने मंत्रिमंडलीय उप समिति की अनुशंसा, एसआईटी के चेयरमैन की 26 जून की संशोधित रिपोर्ट और 27 जून 2025 की सांख्यिकी विभाग की रिपोर्ट पर अपना जवाब पेश किया।
राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट में शपथ पत्र दायर कर कहा कि वह भर्ती रद्द नहीं कर रही।
एकलपीठ ने सभी पक्षकारों की बहस सुनने के बाद 14 अगस्त 2025 को फैसला सुरक्षित रखा।
28 अगस्त 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की एकपीठ ने अपना फैसला सुनाते हुए भर्ती को रद्द कर दिया।
एकलपीठ के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों और राज्य सरकार ने अपील दायर की।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 8 सितंबर 2025 को एकलपीठ के भर्ती रद्द करने वाले आदेश पर रोक लगाई, लेकिन चयनित अभ्यर्थियों को फील्ड ट्रेनिंग कराने की छूट दी थी।
खंडपीठ के अंतरिम आदेश को मूल याचिकाकर्ता कैलाश चन्द्र शर्मा सहित अन्य ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2025 के आदेश से चयनित अभ्यर्थियों की ट्रेनिंग पर रोक लगाते हुए हाईकोर्ट को तीन महीने में अपीलों का निपटारा करने के लिए कहा था।
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य सरकार, प्रार्थी पक्ष व चयनित अभ्यर्थियों की बहस 19 जनवरी 2026 को पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा।
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने 4 अप्रैल 2026 को फैसला सुनाते हुए एकलपीठ के आदेश को बरकरार रखा और भर्ती को रद्द कर दिया।
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