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PHOTO STORY: रालसा की ‘द बेंच बियॉन्ड रिटायरमेंट’ कॉन्फ्रेंस की एक्सक्लूसिव तस्वीरें‘

“‘The Bench Beyond Retirement’: Jaipur Conference Highlights Power of Retired Judges in Judicial Reforms”

जयपुर। राजधानी जयपुर में शनिवार का दिन बेहद अहम रहा। एक ओर जहां राजस्थान हाईकोर्ट में हाईकोर्ट की स्थापना के बाद पहली बार 39 जजों ने जयपुर पीठ में सुनवाई की।

वहीं दूसरी तरफ न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुलभ और आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अनुभव और मध्यस्थता प्रणाली को केंद्र में रखकर एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया गया।

यह सम्मेलन एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें न्यायपालिका, प्रशासन और विधिक क्षेत्र के अनेक वरिष्ठ व्यक्तित्व उपस्थित रहे।

समारोह में देशभर के 60 से अधिक सेवानिवृत जज, राजस्थान हाईकोर्ट के 39 जज और प्रदेशभर के 200 से अधिक अधिनस्थ अदालतों के जजों ने शिरकत की.

सम्मेलन में देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, पूर्व जज जस्टिस वी.एस. दवे सहित राजस्थान हाईकोर्ट के सभी 39 जज, देशभर से आए सेवानिवृत्त जज मौजूद रहे।

समारोह में 95 वर्षीय जस्टिस वी.एस. दवे के संबोधन के दौरान हॉल आधा दर्जन से अधिक बार तालियों से गूंज उठा। जस्टिस दवे की शेरो-शायरी के जवाब में सीजेआई ने भी एक शेर पढ़कर जवाब दिया।कार्यक्रम में जस्टिस दवे अपनी तीन पीढी के साथ नजर आए.

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सेवानिवृत्त न्यायाधीश केवल पूर्व पदाधिकारी नहीं, बल्कि अनुभव, विद्वता और न्याय-दृष्टि के जीवंत स्रोत हैं।

कार्यक्रम में प्रदेशभर के जिला एवं सत्र न्यायाधिशों ने शिरकत की. इस दौरान कई जिला एवं सत्र न्यायाधिशों ने अपने अनुभव साझा किए.

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने अधिनस्थ अदालतों के जजों से संबोधन में न्यायिक प्रणाली में लंबित मामलों की समस्या को रेखांकित करते हुए कहा कि हर विवाद का समाधान कोर्ट में ही हो, यह जरूरी नहीं है।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी विवाद को अदालत में ले जाने से पहले मध्यस्थता केंद्र या लोक अदालत का दरवाजा खटखटाएं।

CJI ने कहा – न्यायाधीश केवल कानून के संरक्षक ही नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक भी होते हैं।

समारोह में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत जजों का सम्मान किया गया. राजस्थान से जुड़े जस्टिस अजय रस्तोगी का सम्मान किया गया. उन्होने एक तकनीकी सत्र को भी संबोधित किया

इस अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट द्वारा एक नई पहल “यूनिफॉर्म रजिस्ट्रेशन नंबर सिस्टम” लॉन्च की गई। इस प्रणाली का उद्देश्य मामलों की पहचान और ट्रैकिंग को अधिक पारदर्शी और सरल बनाना है।

समारोह में राज्य की उपमुख्यमंत्री दीयाकुमारी ने भी शिरकत की. उन्हे जस्टिस नुपूर भाटी ने स्मृति चिन्ह प्रदान किया.

सम्मेलन के दौरान विधिक सेवाओं को आम जनता तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए राजस्थान के सभी जिलों के लिए “मल्टी यूटिलिटी वाहन” भी रवाना किए गए।

समारोह में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों द्वारा लिखे गए लेखों के संकलन की एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया, जो विधि के छात्रों और युवा वकीलों के लिए मार्गदर्शक साबित होगी।

सम्मेलन में वक्ताओं ने विशेष रूप से युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए कहा कि कानून एक निरंतर विकसित होने वाला क्षेत्र है, जिसमें हर दिन कुछ नया सीखना आवश्यक है।

समारोह के दौरान जस्टिस वी.एस. दवे से जुड़े 100 से अधिक विधि छात्रों ने भी शिरकत की। लीगल संस्थान के ऋषि अग्रवाल के नेतृत्व में इन छात्रों ने तकनीकी सत्रों में सवाल-जवाब में हिस्सा लिया।

कार्यक्रम का सफल आयोजन करने वाली रालसा की टीम का अंत में सम्मान किया गया। रालसा सदस्य सचिव हरिओम शर्मा, निदेशक नीरज भारद्वाज सहित पूरी टीम ने कई दिनों तक लगातार काम कर इसे सफल बनाया।

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