जज और कमांडो के बीच बने एक रिश्ते की अनोखी कहानी: रिश्ता,कर्तव्य, दोस्ती और विश्वास की मिसाल, नम आंखों के बीच सुरेन्द्र सिंह परमार को अंतिम विदाई
जयपुर/किशनगढ़ बास। राजस्थान पुलिस के जांबाज हेड कांस्टेबल सुरेन्द्र सिंह परमार ने 21 अप्रैल 2026 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया, लेकिन अपने पीछे वह एक ऐसी कहानी छोड़ गए हैं, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जाती हैं।
यह सिर्फ एक पुलिसकर्मी के कर्तव्य और बहादुरी की कहानी नहीं, बल्कि एक जज और कमांडो के बीच बने उस अनोखे रिश्ते की दास्तान है, जो इंसानियत, भरोसे और समर्पण की मिसाल बन गया।

सुरेन्द्र सिंह परमार, जो राजस्थान हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस अशोक कुमार गौड़ के साथ कमांडो के रूप में ड्यूटी पर तैनात रहे, समय के साथ उनके और जज साहब के बीच ऐसा रिश्ता बन गया, जो खून का नहीं, लेकिन उससे भी ज्यादा गहरा था।
यह रिश्ता सिर्फ सुरक्षा और कर्तव्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि परिवार जैसा बन गया।
अपनी बीमारी के दौरान जब सुरेन्द्र सिंह जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे थे, तब जस्टिस अशोक गौड़ हर कदम पर उनके साथ खड़े रहे।
दिल्ली से बार-बार आकर उन्होंने न सिर्फ उनका हाल जाना, बल्कि बेहतर इलाज के लिए अलग-अलग चिकित्सकों से परामर्श दिलवाया।
यहां तक कि अपने डॉक्टर भाई को भी उन्होंने सुरेन्द्र सिंह की देखभाल में लगा दिया।

लेकिन शायद सुरेन्द्र सिंह को अपने अंत का आभास हो चुका था।
एक दिन वे अपने पूरे परिवार को जज साहब के पास लेकर गए और भावुक होकर कहा—”ये मेरे भगवान हैं, कभी भी इनका दर मत छोड़ना।” यह सुनकर वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।
लंबे इलाज और प्रयासों के बावजूद आखिरकार 21 अप्रैल को सुरेन्द्र सिंह जिंदगी की जंग हार गए। उनके निधन की खबर से राजस्थान हाईकोर्ट के साथी जवानों से लेकर राजस्थान पुलिस का हर जवान शौक में रहा.

विगत बुधवार को दिवंगत सुरेन्द्रसिंह के पैतृक गांव किशनगढ़ बास में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
राजस्थान पुलिस के जवानों ने अपने साथी को बंदूकों से अंतिम सलामी दी। माहौल इतना भावुक था कि हर आंख नम थी और हर दिल भारी।
इस दौरान सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब जस्टिस अशोक कुमार गौड़ ने अपने इस कमांडो मित्र को अंतिम सलामी दी।
यह सिर्फ एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक ऐसे रिश्ते की विदाई थी, जिसमें विश्वास, सम्मान और अपनापन हर सीमा से परे था।
सुरेन्द्र सिंह परमार ने अपने सेवाकाल में कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और अनुशासन की जो मिसाल पेश की, वह हमेशा याद रखी जाएगी।
वर्ष 2023 में जयपुर में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया था।

सुरेन्द्र सिंह परमार का जीवन अनुशासन, ईमानदारी और सेवा भाव का प्रतीक था। उन्होंने अपने सेवाकाल में हर जिम्मेदारी को पूरी निष्ठा के साथ निभाया। साथी उन्हें एक सख्त लेकिन दिल से बेहद सरल इंसान के रूप में याद करते हैं।
आज भले ही सुरेन्द्र सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी—एक सच्चे सिपाही, एक जिम्मेदार इंसान और एक अनोखे रिश्ते की—हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगी।
सुरेन्द्र सिंह अपने पीछे एक पूरा परिवार छोड़ गए हैं—पत्नी, बच्चे और अपने प्रियजन, जो इस दुखद घड़ी में गहरे सदमे में हैं। लेकिन उनके परिवार को यह सुकून जरूर है कि सुरेन्द्र सिंह ने अपनी जिंदगी सम्मान, ईमानदारी और कर्तव्य के साथ जी।

एक कहानी, जो हमेशा जिंदा रहेगी
सुरेन्द्र सिंह परमार की जिंदगी सिर्फ एक पुलिसकर्मी की कहानी नहीं है-यह एक सच्चे इंसान की कहानी है, एक ऐसे सिपाही की कहानी है, जिसने कर्तव्य को पूजा माना, और एक ऐसे रिश्ते की कहानी है, जिसने यह साबित किया कि इंसानियत हर पद और सीमा से ऊपर होती है।
आज भले ही सुरेन्द्र सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी यादें, उनका समर्पण और जज व कमांडो के बीच बना यह अनोखा रिश्ता हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा।
उनकी जिंदगी यह सिखा गई कि कर्तव्य निभाते-निभाते बने रिश्ते कभी खत्म नहीं होते, वे हमेशा यादों और भावनाओं में जीवित रहते हैं।
अपने साथी कमांडो की याद में राजस्थान हाईकोर्ट के पुलिस के जवानों, वाहनचालको से लेकर हर एक कर्मचारी ने हाईकोर्ट में श्रद्धांजलि दी हैं.
मेरे लिए एक फरिश्ते जैसा
राजस्थान पुलिस के जांबाज हेड कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह परमार के निधन पर जस्टिस अशोक कुमार गौड़ ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि “सुरेंद्र सिंह सिर्फ एक पुलिसकर्मी नहीं थे, बल्कि हमारे परिवार का अभिन्न हिस्सा थे।” उनके शब्दों में दर्द, सम्मान और गर्व तीनों साफ झलकते हैं।
जस्टिस गौड़ बताते हैं कि सुरेंद्र सिंह अलवर जिले के किशनगढ़ बास क्षेत्र के रहने वाले थे और शुरू से ही अपने कर्तव्य के प्रति बेहद समर्पित थे।
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में ही अपनी ईमानदारी, अनुशासन और विनम्र व्यवहार से सभी का दिल जीत लिया था। इससे पहले वे जस्टिस प्रशांत अग्रवाल के साथ गनमैन के रूप में तैनात रह चुके थे।

जस्टिस गौड़ ने याद करते हुए कहा कि जब वे स्वयं जज बने, तब सुरेंद्र सिंह सबसे पहले उनके साथ तैनात हुए।
उन्होंने कहा,
“उनका काम करने का तरीका बेहद अनुशासित, समर्पित और स्नेहपूर्ण था। वह कभी भी पुलिस की सामान्य छवि के विपरीत व्यवहार नहीं करते थे, बल्कि एक सच्चे सज्जन और जिम्मेदार इंसान की तरह पेश आते थे।”
उन्होंने आगे कहा कि सुरेंद्र सिंह का व्यवहार इतना मधुर था कि न्यायमूर्ति गौड़ के परिवार, मित्रों और परिचितों ने उन्हें एक कर्मचारी नहीं बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में स्वीकार कर लिया था।
परिवार से बढ़कर रिश्ता
सुरेंद्र सिंह का अपने वरिष्ठों और उनके परिवार के प्रति समर्पण असाधारण था।
जस्टिस गौड़ कहते हैं कि सेवानिवृत्ति के बाद भी सुरेंद्र सिंह लगातार उनके परिवार के संपर्क में रहे और हमेशा यह कहते थे कि “मैं साहब की सेवा जिंदगी भर करता रहूंगा।”
उनकी यह निष्ठा सिर्फ शब्दों तक सीमित नहीं थी। चाहे आधी रात हो या कोई भी परिस्थिति, एक फोन पर वे तुरंत उपस्थित हो जाते थे। यह उनके कर्तव्य और इंसानियत दोनों का परिचायक था।
बीमारी और असमय निधन से गहरा आघात
जस्टिस गौड़ सुरेन्द्रसिंह की बिमारी को लेकर कहते हैं कि अचानक बीमारी की खबर ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। उन्होंने हर संभव उपचार करवाने की कोशिश की, लेकिन ईश्वर की इच्छा के आगे सब असहाय रहे।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा,
“एक ऐसा व्यक्ति जो शारीरिक रूप से बेहद मजबूत, आकर्षक व्यक्तित्व वाला और लगभग 6 फुट 2 इंच लंबा था, उसे इस तरह कमजोर होते देखना अत्यंत पीड़ादायक था।”
“उसकी छाप हमेशा जिंदा रहेगी”
जस्टिस गौड़ कहते हैं कि सुरेंद्र सिंह के जाने से न केवल उनका परिवार, बल्कि उनके सहयोगी, मित्र और पूरे कार्यालय के लोग खुद को एक सदस्य खोने जैसा महसूस कर रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“उसकी ईमानदारी, लगन, स्नेह और सेवा भाव हम सभी के लिए प्रेरणा है। उन्होंने यह सिखाया कि कोई भी व्यक्ति अपने कार्य को पूरी निष्ठा और समर्पण से करते हुए समाज में अमिट छाप छोड़ सकता है।”
अंतिम शब्द: भावुक विदाई
सुरेंद्र सिंह के अंतिम शब्दों को याद करते हुए जस्टिस गौड़ बेहद भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि सुरेंद्र सिंह ने अपने बच्चों से कहा था कि “अशोक गौड़ साहब हमारे लिए सबकुछ हैं, उनका और उनके परिवार का ध्यान रखना।”
ये शब्द मेरे लिए बहुत मायने रखते है शायद किसी की जिंदगी का सबसे बड़ा उपहार हो, मेरे लिए ईश्वर के एक फरिश्ते जैसा था