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प्रदेश की अदालतों के इन्फ्रास्ट्रक्चर पर राजस्थान हाईकोर्ट सख्त, स्वतः संज्ञान लेकर शुरू की बड़ी कार्रवाई

Rajasthan High Court Takes Strict View on Court Infrastructure, Registers Suo Moto PIL Across State

वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली बने न्यायमित्र, प्रदेशभर की अदालतों की समस्याओं पर होगी व्यापक सुनवाई

जोधपुर। राजस्थान की अदालतों में आधारभूत सुविधाओं और इन्फ्रास्ट्रक्चर की बदहाल स्थिति को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है।

प्रदेश के विभिन्न जिलों में न्यायालय परिसरों में भवन, कोर्ट रूम, बैठने की व्यवस्था, डिजिटल सुविधाएं, सुरक्षा, पार्किंग और अन्य आवश्यक संसाधनों की कमी को गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लिया है।

इसके साथ ही अदालतों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए व्यापक स्तर पर सुनवाई शुरू करने का निर्णय लिया गया है।

राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने जिला अभिभाषक संघ द्वारा दायर याचिका सहित कई लंबित याचिकाओं की संयुक्त सुनवाई करते हुए यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किया।

कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि प्रदेशभर की अदालतों में लंबे समय से चली आ रही आधारभूत समस्याओं को अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और इनके समाधान के लिए संस्थागत स्तर पर ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।

स्थायी समाधान तलाश

खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि न्यायालय केवल न्याय देने का स्थान नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

ऐसे में यदि अदालतों में ही आवश्यक सुविधाओं का अभाव रहेगा तो इसका सीधा असर न्यायिक कार्यप्रणाली और आमजन को मिलने वाले न्याय पर पड़ेगा।

कोर्ट ने माना कि कई जिलों में अदालतें सीमित संसाधनों और अपर्याप्त भवनों में संचालित हो रही हैं, जिससे न्यायिक कार्य प्रभावित हो रहा है।

इसी गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान याचिका दर्ज करने के निर्देश दिए हैं, ताकि राजस्थान के सभी जिलों की अदालतों में मौजूद समस्याओं का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान तलाशा जा सके।

कोर्ट ने संकेत दिए कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार, न्यायिक प्रशासन, बार एसोसिएशन और अन्य संबंधित पक्षों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।

महाधिवक्ता हुए पेश, सरकार ने बताई तैयारी

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद अदालत में उपस्थित हुए।

उन्होंने कोर्ट को अवगत कराया कि प्रशासनिक स्तर पर मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के अधिकारियों की रजिस्ट्रार जनरल के साथ विस्तृत बैठक हो चुकी है।

सरकार न्यायालय रजिस्ट्री द्वारा चिन्हित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठा रही है।

महाधिवक्ता ने अदालत को यह भरोसा भी दिलाया कि विभिन्न जिलों की अदालतों से जुड़ी व्यक्तिगत और स्थानीय समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि सरकार संबंधित पक्षों और विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में काम कर रही है तथा अगली सुनवाई पर विस्तृत पक्ष रखा जाएगा।

वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली बने न्यायमित्र

हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता रवि भंसाली को Amicus Curiae (न्यायमित्र) नियुक्त किया है।

कोर्ट ने उनसे अपेक्षा जताई है कि वे हाईकोर्ट और बिल्डिंग कमेटी द्वारा राज्य सरकार से अपेक्षित अधोसंरचनात्मक सहायता से जुड़े मुद्दों का विस्तृत विवरण तैयार करें और अदालत के समक्ष व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करें।

खंडपीठ ने यह भी निर्देश दिए कि याचिका की प्रति न्यायमित्र को उपलब्ध कराई जाए, ताकि वे प्रदेशभर की अदालतों की वास्तविक स्थिति का अध्ययन कर अदालत की प्रभावी सहायता कर सकें।

13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई 2026 को निर्धारित की है।

माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में प्रदेशभर की अदालतों की समस्याओं, आवश्यक बजट, भवन निर्माण, सुविधाओं के विस्तार और डिजिटल न्यायिक ढांचे को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश सामने आ सकते हैं।

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