नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान असिस्टेंट प्रॉसिक्यूशन ऑफिसर (APO) भर्ती 2024 को लेकर एक बड़ा फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आवेदन की अंतिम तिथि तक आवश्यक योग्यता यानी लॉ डिग्री न होने पर उम्मीदवार अयोग्य माने जाएंगे।
बाद में डिग्री हासिल करने से पात्रता नहीं बनती। आवेदन की अंतिम तिथि तक आवश्यक योग्यता न रखने वाले उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।
हाईकोर्ट ने पहले ऐसे उम्मीदवारों को प्रारंभिक परीक्षा में बैठने की अनुमति दी थी, जिनके पास आवेदन के समय लॉ डिग्री नहीं थी।
क्या था विवाद और कहां थी टकराहट?
7 मार्च 2024 को जारी भर्ती विज्ञापन के तहत 181 पदों के लिए आवेदन मांगे गए थे, जिसमें लॉ डिग्री अनिवार्य योग्यता रखी गई थी।
कुछ उम्मीदवारों ने आवेदन तो कर दिया, लेकिन उनके पास अंतिम तिथि तक लॉ डिग्री नहीं थी। उन्होंने बाद में 22 अगस्त 2024 को डिग्री प्राप्त की और परीक्षा में बैठने की अनुमति के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
इन उम्मीदवारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी, जिसे सिंगल और डिवीजन बेंच ने मंजूरी दे दी थी। बाद में इसके खिलाफ RPSC ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
उम्मीदवारों का तर्क था कि उन्होंने बाद में योग्यता हासिल कर ली है, इसलिए उन्हें परीक्षा में बैठने दिया जाना चाहिए।
वहीं आयोग का कहना था कि नियम स्पष्ट हैं कि आवेदन की तारीख तक योग्यता होना जरूरी है, बाद की उपलब्धि को मान्यता नहीं दी जा सकती।
नियम बीच में नहीं बदलेंगे: SC
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि किसी भी भर्ती प्रक्रिया में पात्रता तय करने की निर्णायक तारीख आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि ही होती है।
पीठ ने स्पष्ट किया:
“विज्ञापन और नियमों को साथ पढ़ने पर साफ है कि योग्यता का आकलन आवेदन के समय उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर किया जाएगा। बाद में प्राप्त योग्यता को मान्यता नहीं दी जा सकती।”
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि बाद में योग्यता प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों को शामिल किया जाता है, तो इससे चयन प्रक्रिया में अनिश्चितता और प्रशासनिक समस्याएं उत्पन्न होंगी।
हाईकोर्ट ने दी राहत, SC ने पलटा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हाईकोर्ट ने इस महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज किया कि उम्मीदवार आवेदन के समय आवश्यक योग्यता नहीं रखते थे।
इस आधार पर कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला गलत ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया और RPSC की अपील को मंजूरी दे दी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नियमों में ढील देने से उन उम्मीदवारों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने समय पर सभी योग्यताएं पूरी की थीं।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: अयोग्य उम्मीदवार बाहर
सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतिम आदेश में हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए स्पष्ट किया कि जिन उम्मीदवारों के पास आवेदन की अंतिम तिथि तक लॉ डिग्री नहीं थी, वे APO परीक्षा 2024 के लिए पात्र नहीं हैं।
कोर्ट ने आयोग की अपील स्वीकार करते हुए चयन प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने का निर्देश दिया।
अदालत ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में पात्रता की कट-ऑफ तिथि आवेदन की अंतिम तिथि होती है और उसी आधार पर योग्यता तय की जाएगी। बाद में प्राप्त की गई योग्यता को मान्यता नहीं दी जा सकती और ऐसे उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया में शामिल करना नियमों के खिलाफ है।
इसी आधार पर कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और आयोग की अपील को स्वीकार कर लिया।
कोर्ट का यह फैसला स्पष्ट करता है कि सरकारी नौकरियों में आवेदन की अंतिम तिथि ही पात्रता का निर्णायक मानदंड होती है। बाद में प्राप्त की गई योग्यता को मान्यता नहीं दी जाएगी।