नई दिल्ली/जयपुर। बहुचर्चित राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले के मास्टरमाइंड आरोपी जगदीश विश्नोई को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने जगदीश विश्नोई को जमानत दे दी थी। हाईकोर्ट द्वारा मिली हुई जमानत को रद्द कराने को लेकर राजस्थान सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की है।
सरकार की इस याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मास्टरमाइंड जगदीश विश्नोई को नोटिस जारी किया है।
राजस्थान सरकार ने राजस्थान हाईकोर्ट के 16 जनवरी 2026 के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत एसआई भर्ती परीक्षा पेपर लीक प्रकरण के मुख्य आरोपी जगदीश विश्नोई को जमानत प्रदान की गई थी।
“मास्टरमाइंड” और “किंगपिन”
राज्य सरकार का आरोप है कि गंभीर अपराध, संगठित साजिश और ठोस साक्ष्यों के बावजूद आरोपी को राहत देना न्यायहित के विपरीत है।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.डी. संजय तथा अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत को बताया कि जगदीश विश्नोई वर्ष 2021 की एसआई भर्ती परीक्षा से जुड़े संगठित पेपर लीक रैकेट का “मास्टरमाइंड” और “किंगपिन” रहा है।
उन्होंने दावा किया कि आरोपी लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और अभ्यर्थियों से अवैध वसूली जैसे आपराधिक नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
राजस्थान एटीएस एवं एसओजी की जांच के अनुसार, आरोपी ने सेंटर सुपरिंटेंडेंट राजेश खंडेलवाल सहित अन्य सह-आरोपियों के साथ मिलकर कथित रूप से व्हाट्सएप के जरिए ₹10 लाख में गोपनीय प्रश्नपत्र पहले से हासिल किए।
इसके बाद प्रश्नपत्र हल करवाकर भारी रकम लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए।
लिखावट जगदीश विश्नोई
जांच में यह भी सामने आया कि जिन 25 अभ्यर्थियों को कथित रूप से लीक प्रश्नपत्र उपलब्ध करवाए गए थे, उनका बाद में चयन भी हो गया।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि जांच के दौरान आरोपी के पास से एक अकाउंट डायरी बरामद हुई, जिसमें अभ्यर्थियों के नाम और धन-लेनदेन का पूरा विवरण दर्ज था।
सरकार ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि डायरी में लिखावट जगदीश विश्नोई की ही है।
सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि आरोपी वर्ष 2008 से इसी प्रकार की गतिविधियों में शामिल रहा है और उसके खिलाफ समान प्रकृति के 13 अन्य आपराधिक मामले दर्ज हैं।
सरकार ने उसे “हिस्ट्रीशीटर” बताते हुए कहा कि उसकी भूमिका केवल एक आरोपी की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क के संचालनकर्ता की रही है।
यह एफआईआर 3 मार्च 2024 को पुलिस थाना एटीएस एवं एसओजी में भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420 और 120-बी, राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 1992 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66डी के तहत दर्ज की गई थी।
150 गवाहों के बयान
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह भी कहा कि इस व्यापक साजिश में अब तक कुल 139 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
मुकदमा वर्तमान में आरोपों पर बहस के चरण में लंबित है और लगभग 150 गवाहों के बयान अभी शेष हैं।
सरकार ने तर्क दिया कि आरोपी का प्रभाव, आपराधिक रिकॉर्ड और संगठित नेटवर्क में उसकी भूमिका जांच एवं ट्रायल को प्रभावित कर सकती है, इसलिए हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत को रद्द किया जाना आवश्यक है।
राजस्थान सरकार की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी पक्ष को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब तलब किया है। अब इस बहुचर्चित पेपर लीक मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।