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विदेश यात्रा करना मौलिक अधिकार, केवल लंबित FIR के आधार पर पासपोर्ट रिन्यू करने से नहीं किया जा सकता इनकार: राजस्थान हाईकोर्ट

Rajasthan High Court Rules Passport Renewal Cannot Be Denied Solely Due to Pending FIR

जयपुर। Rajasthan High Court ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी व्यक्ति के खिलाफ केवल आपराधिक मामला लंबित होने या FIR दर्ज होने के आधार पर उसका पासपोर्ट रिन्यू करने से इनकार नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्रा करना और वैध पासपोर्ट रखना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत नागरिक का मौलिक अधिकार है।

यह अहम फैसला Justice Anoop Kumar Dhand की एकलपीठ ने त्रिविक्रम सिंह राठौड़ की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

इसके साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, जयपुर के 5 जनवरी 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केवल पुलिस रिपोर्ट और लंबित FIR के आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन खारिज कर दिया गया था।

ये है मामला

याचिकाकर्ता त्रिविक्रम सिंह राठौड़ एक होटल व्यवसायी हैं और व्यवसायिक कारणों से उन्हें अक्सर विदेश यात्रा करनी पड़ती है।

उनका पासपोर्ट समाप्त होने के बाद उन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन पुलिस रिपोर्ट में उनके खिलाफ महिला थाना, जयपुर पूर्व में धारा 498A और 406 IPC के तहत FIR दर्ज होने का हवाला देते हुए आवेदन अस्वीकार कर दिया गया।

याचिकाकर्ता की दलीलें

याचिकाकर्ता त्रिविक्रम सिंह राठौड़ की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि उनका पासपोर्ट पहले से वैध था और केवल उसकी अवधि समाप्त होने के कारण उन्होंने नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था।

अधिवक्ता ने कहा कि क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने केवल इस आधार पर आवेदन खारिज कर दिया कि उनके खिलाफ FIR दर्ज है।

याचिकाकर्ता का कहना था कि केवल FIR या लंबित आपराधिक मामले के आधार पर किसी नागरिक को पासपोर्ट सुविधा से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने दलील दी कि विदेश यात्रा करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार है और पासपोर्ट उस अधिकार का आवश्यक माध्यम है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे पेशे से होटल व्यवसायी हैं और व्यवसायिक कारणों से उन्हें बार-बार विदेश यात्रा करनी पड़ती है। यदि पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा, तो उनके व्यवसाय और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया गया, जिनमें कहा गया है कि:

हर व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक अपराध सिद्ध न हो जाए। केवल लंबित मुकदमा पासपोर्ट रद्द या नवीनीकरण रोकने का आधार नहीं हो सकता। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में निर्धारित विशेष परिस्थितियों में ही पासपोर्ट रोका जा सकता है।

सरकार और पासपोर्ट प्राधिकरण का जवाब

राज्य सरकार और पासपोर्ट प्राधिकरण की ओर से याचिका के जवाब में कहा गया कि मुख्य आधार पुलिस रिपोर्ट थी। पुलिस सत्यापन रिपोर्ट में बताया गया था कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है। इसी आधार पर पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन अस्वीकार किया गया।

सरकार की ओर से यह आशंका भी जताई गई कि यदि किसी ऐसे व्यक्ति को पासपोर्ट दे दिया जाए, जिसके खिलाफ आपराधिक मामला लंबित है, तो उसके विदेश जाकर वापस नहीं लौटने की संभावना हो सकती है। इससे ट्रायल प्रभावित हो सकता है और न्यायिक प्रक्रिया बाधित हो सकती है।

प्रतिवादी पक्ष का तर्क था कि पासपोर्ट प्राधिकरण को पुलिस रिपोर्ट और लंबित मामलों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का अधिकार है। इसलिए आवेदन अस्वीकार करना कानून के अनुरूप कार्रवाई थी।

हाईकोर्ट का फैसला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि केवल FIR दर्ज होना या ट्रायल लंबित होना किसी व्यक्ति को पासपोर्ट रखने के अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बन सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय कानून में हर व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक उसका अपराध सिद्ध नहीं हो जाता। इसलिए किसी लंबित मामले के आधार पर किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों को सीमित नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों का भी उल्लेख किया।

हाईकोर्ट ने कहा कि विदेश यात्रा का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा है और इसे केवल न्यायसंगत, उचित और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही सीमित किया जा सकता है।

हाईकोर्ट ने Maneka Gandhi v. Union of India, Satwant Singh Sawhney v. D. Ramarathnam और हालिया सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि पासपोर्ट सिर्फ एक सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि विदेश यात्रा के अधिकार का व्यावहारिक माध्यम है।

ट्रायल कोर्ट लगा सकता है शर्तें

हाईकोर्ट ने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 में स्पष्ट प्रावधान हैं कि किन परिस्थितियों में पासपोर्ट जारी करने या नवीनीकरण से इनकार किया जा सकता है। केवल लंबित आपराधिक मामला अपने आप में पूर्ण प्रतिबंध नहीं है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को विदेश जाने से रोकना आवश्यक हो, तो संबंधित ट्रायल कोर्ट उचित शर्तें लगा सकता है, जैसे कि पूर्व अनुमति लेना या यात्रा के बाद वापस लौटना।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार की आशंका यह हो सकती है कि आरोपी विदेश जाकर वापस न लौटे, लेकिन इसका समाधान पासपोर्ट पूरी तरह रोकना नहीं है। अदालत ने कहा कि न्यायालय संतुलन बनाते हुए ऐसी शर्तें लगा सकता है, जिससे आरोपी की उपस्थिति ट्रायल के दौरान सुनिश्चित रहे और उसके मौलिक अधिकारों का भी हनन न हो।

फैसले में कोर्ट ने पासपोर्ट अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे याचिकाकर्ता के आवेदन पर कानून के अनुसार दोबारा विचार करें। साथ ही याचिकाकर्ता को यह undertaking देने का निर्देश दिया गया कि वह अदालत की अनुमति के बिना विदेश यात्रा नहीं करेगा और आवश्यकता पड़ने पर ट्रायल में उपस्थित रहेगा। यदि वह शर्तों का उल्लंघन करता है, तो पासपोर्ट जब्त करने की कार्रवाई की जा सकेगी।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला उन हजारों लोगों के लिए राहत देने वाला साबित हो सकता है, जिनके खिलाफ मामूली या लंबित आपराधिक मामले होने के कारण पासपोर्ट संबंधी समस्याएं उत्पन्न होती रही हैं। अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल FIR दर्ज होना किसी नागरिक के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने का आधार नहीं बन सकता।

अंतिम आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी, जयपुर के 5 जनवरी 2023 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें केवल पुलिस रिपोर्ट और लंबित FIR के आधार पर याचिकाकर्ता का पासपोर्ट नवीनीकरण आवेदन खारिज कर दिया गया था।

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