जयपुर। राजधानी जयपुर में 19 मई को आयोजित क्रिकेट मैच केवल खेल तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके बहाने सत्ता, प्रोटोकॉल और संवैधानिक संस्थाओं के बीच असहज रिश्तों की चर्चा भी तेज हो गई।
सूत्रों के अनुसार मैच के वीआईपी पास वितरण को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि राजस्थान हाईकोर्ट के जजों ने कथित रूप से पास लेने से ही इनकार कर दिया।
देर शाम तक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से जुड़े लोग वीआईपी पास लेकर जजों के आवासों तक पहुंचते रहे, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी।
सूत्रों के अनुसार राजस्थान में लंबे समय से यह परंपरा रही है कि जयपुर या जोधपुर में होने वाले बड़े क्रिकेट मुकाबलों के दौरान संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों, न्यायपालिका के वरिष्ठ सदस्यों और उच्च अधिकारियों को सम्मानपूर्वक वीआईपी पास भेजे जाते हैं।
इसे केवल औपचारिकता नहीं बल्कि संस्थागत सम्मान का हिस्सा माना जाता रहा है।
लेकिन इस बार स्थिति बिल्कुल अलग नजर आई। बताया जा रहा है कि राजस्थान हाईकोर्ट के कई जजों सहित अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों तक समय पर पास नहीं पहुंचे।
इतना ही नहीं, देर शाम को जो पास भेजे गए, उनकी श्रेणी को लेकर भी असंतोष सामने आया। सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों को पारंपरिक रूप से शीर्ष श्रेणी के वीआईपी पास दिए जाते रहे हैं, उन्हें इस बार अपेक्षाकृत निम्न श्रेणी के पास भेजे गए।
इसी बात को लेकर न्यायपालिका के भीतर नाराजगी बढ़ गई। मामला इतना बढ़ा कि हाईकोर्ट के जजों ने पास स्वीकार करने से ही इनकार कर दिया।
बताया जा रहा है कि मैच शुरू होने से ठीक पहले पास लेकर पहुंचे अधिकारियों को भी वापस लौटा दिया गया। न्यायपालिका से जुड़े गलियारों में इसे “सम्मान और प्रोटोकॉल” से जुड़ा मुद्दा माना जा रहा है।
SMS स्टेडियम के बाहर सख्त चैकिंग, तीन मोबाइल कोर्ट सक्रिय
विवाद के बीच मैच के दौरान एसएमएस स्टेडियम के आसपास सुरक्षा और यातायात नियमों को लेकर भी बड़ी कार्रवाई देखने को मिली।
प्रशासन ने स्टेडियम के चारों ओर तीन मोबाइल कोर्ट सक्रिय किए थे। मोबाइल मजिस्ट्रेट और पुलिस टीमों ने मैच शुरू होने से पहले वीआईपी और सामान्य वाहनों की व्यापक जांच की।
जिन निजी वाहनों पर अवैध रूप से लाल बत्ती, सरकारी पट्टियां या नियमों के विरुद्ध मॉडिफिकेशन पाए गए, उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
सूत्रों के अनुसार दो दर्जन से अधिक वाहनों के चालान काटे गए। इनमें कुछ वीआईपी और जनप्रतिनिधियों से जुड़े वाहन भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई वाहन चालकों को चेतावनी देकर छोड़ा भी गया।
कार्रवाई के दौरान निजी वाहनों पर लगी सरकारी प्लेट, काले शीशे, बिना दस्तावेज वाले वाहन और मॉडिफाइड थार जैसी गाड़ियों पर विशेष फोकस रखा गया। पुलिस और परिवहन विभाग की संयुक्त कार्रवाई देर रात तक चलती रही।
मंत्री का वाहन भी रोका गया
चैकिंग अभियान के दौरान राज्य के एक मंत्री का वाहन भी पुलिस जांच के दायरे में आ गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पुलिसकर्मियों ने वाहन चालक से पूछताछ की, जबकि मंत्री स्वयं वाहन से उतरकर पैदल आगे बढ़ गए। इस घटनाक्रम की चर्चा मैच स्थल पर देर रात तक होती रही।
सूत्रों का दावा है कि कई मंत्रियों, विधायकों और प्रभावशाली व्यक्तियों से जुड़े वाहनों की भी जांच की गई तथा नियम उल्लंघन मिलने पर चालान बनाए गए।
हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए गए हैं।
डैमेज कंट्रोल के प्रयास
मैच शुरू होते-होते एसएमएस स्टेडियम के बाहर एक “दूसरा मैच” भी शुरू हो चुका था।
वीआईपी पास विवाद, जजों की नाराजगी और मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई की खबर कुछ ही देर में सरकार से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक पहुंच गई।
सूत्रों के अनुसार मामले को संभालने और डैमेज कंट्रोल के प्रयास भी किए गए, लेकिन तब तक स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी थी।
अब इस पूरे घटनाक्रम के दूरगामी असर और सत्ता-न्यायपालिका संबंधों पर इसके प्रभाव को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सत्ता और सिस्टम के बीच बढ़ी चर्चा
क्रिकेट मैच के पास वितरण को लेकर उत्पन्न इस पूरे विवाद ने सत्ता और संस्थागत प्रोटोकॉल पर नई बहस छेड़ दी है।
न्यायपालिका से जुड़े सूत्रों का कहना है कि मामला केवल पास का नहीं बल्कि संस्थागत सम्मान और व्यवहार का है।
वहीं राजनीतिक गलियारों में इसे “सरकार की क्रिकेट डिप्लोमेसी का घर में ही फेल होना” बताया जा रहा है।
राजधानी में बुधवार को भी इस घटनाक्रम की चर्चा प्रशासनिक और न्यायिक हलकों में होती रही। कई लोग इसे प्रोटोकॉल प्रबंधन की बड़ी चूक मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे केवल समन्वय की कमी बता रहे हैं।
हालांकि आधिकारिक स्तर पर किसी पक्ष ने खुलकर बयान नहीं दिया है।