टॉप स्टोरी

चर्चित खबरें

जीरो नंबर लाकर नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी: राजस्थान हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी भर्ती की मेरिट लिस्ट रद्द की, कहा- ‘बेसिक स्टैंडर्ड’ जरूरी

Rajasthan High Court Cancels Zero Cut-Off Merit List in Class IV Recruitment 2024

जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भर्ती-2024 को लेकर बड़ा और अहम फैसला सुनाते हुए उन सभी श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द कर दी है, जिनकी कटऑफ लगभग शून्य या जीरो रही थी।

जस्टिस आनंद शर्मा की एकलपीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी सरकारी भर्ती में न्यूनतम योग्यता और “बेसिक स्टैंडर्ड” होना अनिवार्य है।

बिना न्यूनतम अंक तय किए भर्ती करना संविधान के सिद्धांतों के खिलाफ माना जाएगा।

राजस्थान हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह फैसला विनोद कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनाया।

24 लाख 75 हजार अभ्यर्थी प्रभावित

हाईकोर्ट ने राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSMSSB) और कार्मिक विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे न्यूनतम अंक निर्धारित कर संबंधित श्रेणियों की नई मेरिट सूची जारी करें।

राजस्थान की इस सबसे बड़ी भर्ती प्रक्रिया में 53 हजार 749 पदों के लिए करीब 24 लाख 75 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था, जबकि परीक्षा में 21 लाख से अधिक उम्मीदवार शामिल हुए थे।

ऐसे में हाईकोर्ट का यह फैसला हजारों अभ्यर्थियों और पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सीधा असर डालेगा।

सरकारी नौकरी के लिए न्यूनतम स्तर जरूरी

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि भले ही पद चतुर्थ श्रेणी का क्यों न हो, लेकिन सरकारी सेवा में नियुक्ति के लिए एक न्यूनतम योग्यता स्तर होना जरूरी है।

हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि किसी भर्ती में न्यूनतम अंक तय ही नहीं किए जाते और लगभग शून्य अंक पाने वाले उम्मीदवारों का चयन कर लिया जाता है, तो यह पूरी चयन प्रक्रिया की गुणवत्ता और संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े करता है।

कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार और भर्ती एजेंसियों का दायित्व है कि वे भर्ती प्रक्रिया में एक न्यूनतम मानक सुनिश्चित करें ताकि योग्य उम्मीदवारों का चयन हो सके।

याचिकाकर्ता ने उठाया था ‘माइनस नंबर’ का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हरेंद्र नील ने अदालत में दलील दी कि उनके मुवक्किल ने एक्स-सर्विसमैन (ओबीसी) श्रेणी में आवेदन किया था और परीक्षा में उसे निगेटिव यानी माइनस अंक मिले थे।

उन्होंने तर्क दिया कि भर्ती नियमों और विज्ञापन में न्यूनतम अंक का कोई प्रावधान नहीं था।

दूसरी ओर कई श्रेणियों में कटऑफ 0.0033 तक गई और ऐसे उम्मीदवारों का चयन भी कर लिया गया। ऐसे में जब जीरो या लगभग जीरो अंक लाने वालों को नियुक्ति दी जा सकती है, तो माइनस अंक पाने वालों को भी मौका मिलना चाहिए क्योंकि दोनों की योग्यता में कोई बड़ा अंतर नहीं है।

याचिका में यह भी कहा गया कि कई श्रेणियों में पर्याप्त योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने के कारण सैकड़ों पद खाली पड़े हैं।

बोर्ड का तर्क खारिज

सुनवाई के दौरान कर्मचारी चयन बोर्ड और कार्मिक विभाग की ओर से कहा गया कि भर्ती नियमों में न्यूनतम अंक का कोई उल्लेख नहीं है।

इसलिए शून्य अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवारों का चयन किया गया। हालांकि, निगेटिव अंक लाने वालों को अत्यंत कमजोर श्रेणी मानते हुए चयन से बाहर रखा गया।

लेकिन हाईकोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने कहा कि यदि न्यूनतम अंक का प्रावधान नहीं था, तो भर्ती एजेंसी को चयन प्रक्रिया में तार्किक और संवैधानिक मानकों का पालन करना चाहिए था।

केवल शून्य और निगेटिव अंकों के बीच अंतर बताकर चयन प्रक्रिया को उचित नहीं ठहराया जा सकता।

इन कैटेगरी की मेरिट लिस्ट रद्द

हाईकोर्ट ने जिन श्रेणियों की मेरिट सूची रद्द की है, उनमें कई ऐसी कैटेगरी शामिल हैं जिनकी कटऑफ लगभग शून्य रही थी।

NON-TSP क्षेत्र की श्रेणियां
सामान्य (एक्स सर्विसमैन) – 0.0033
एससी (विडो) – 0.0033
एसटी (विडो) – 0.0033
सामान्य ईडब्ल्यूएस (विडो) – 0.2585
ओबीसी (विडो) – 0.0033
एमबीसी (विडो) – 0.0033
सहरिया वर्ग (सामान्य, महिला, विधवा, तलाकशुदा) – 0.0143, 0.0033
दिव्यांग वर्ग – LD/CP को छोड़कर अन्य सभी श्रेणियां
TSP क्षेत्र की श्रेणियां
एससी (विडो) – 0.2731
एसटी (विडो) – 0.0033
दिव्यांग वर्ग – LD/CP को छोड़कर अन्य सभी श्रेणियां

भर्ती प्रक्रिया पर पड़ेगा बड़ा असर

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड को अब संबंधित श्रेणियों में न्यूनतम अंक तय करने होंगे और उसके बाद नई मेरिट सूची जारी करनी होगी।

इससे चयनित उम्मीदवारों की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है।

कानूनी जानकारों का मानना है कि यह फैसला भविष्य की सभी सरकारी भर्तियों के लिए भी महत्वपूर्ण मिसाल बनेगा। अब भर्ती एजेंसियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी परीक्षा में न्यूनतम योग्यता मानक तय किए जाएं, ताकि चयन प्रक्रिया की गुणवत्ता बनी रहे।

सबसे अधिक लोकप्रिय