जयपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील और भावुक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए एनडीपीएस एक्ट में गिरफ्तार महिला को इस आधार पर जमानत दे दी है कि गिरफ्तार होने के बाद महिला ने जेल में ही बच्चे को जन्म दिया है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि एक नवजात बच्चे की देखभाल और सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मामला सिर्फ कानून का नहीं, बल्कि एक मां और उसके मासूम बच्चे की जिंदगी से जुड़ा हुआ था।
सीमा सांसी पिछले कई महीनों से जयपुर की महिला जेल में बंद थी। एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज मामले में उसे 20 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
लेकिन जेल की सलाखों के बीच उसकी जिंदगी ने उस समय नया मोड़ लिया, जब 12 मार्च 2026 को उसने एक बेटे को जन्म दिया।
एक तरफ जेल की दीवारें थीं, दूसरी तरफ मां की गोद में नवजात की मासूम सांसें। इसी परिस्थिति ने पूरे मामले को संवेदनशील बना दिया।
“जेल में मां है… लेकिन बच्चे का क्या?”
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत के सामने बेहद भावुक दलील रखी।
अधिवक्ता ने कहा कि याचिकाकर्ता 28 वर्षीय महिला है और उसकी एक छोटी बेटी भी है। अब जेल में ही उसने एक बेटे को जन्म दिया है।
बचाव पक्ष ने कहा कि जेल का माहौल किसी नवजात बच्चे के लिए सामान्य जीवन नहीं हो सकता। एक मां सलाखों के पीछे रह सकती है, लेकिन एक मासूम बच्चे को जिंदगी की शुरुआत कैद में नहीं मिलनी चाहिए।
अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि महिला के कब्जे से बरामद मादक पदार्थ की मात्रा “कमर्शियल क्वांटिटी” से कम थी और मामले में चार्जशीट भी पेश की जा चुकी है। ऐसे में लगातार जेल में रखना उचित नहीं होगा।
अभियोजन ने किया विरोध, लेकिन कोर्ट ने दिखाई संवेदनशीलता
सरकारी पक्ष ने महिला की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि महिला के खिलाफ पहले से 8 आपराधिक मामले दर्ज हैं। अभियोजन ने अदालत से जमानत याचिका खारिज करने की मांग की।
लेकिन हाईकोर्ट ने मामले के मानवीय पहलू को सबसे महत्वपूर्ण माना।
जस्टिस चंद्र प्रकाश श्रीमाली ने कहा कि अदालत कानून को नजरअंदाज नहीं कर सकती, लेकिन एक नवजात बच्चे की सुरक्षा और देखभाल भी न्याय का हिस्सा है।
कोर्ट ने माना कि महिला लंबे समय से न्यायिक हिरासत में है और जेल में ही उसने बच्चे को जन्म दिया है। ऐसे में बच्चे के हितों को प्राथमिकता देना जरूरी है।
हाईकोर्ट का बड़ा संदेश-“न्याय केवल सजा नहीं होता”
हाईकोर्ट ने महिला को एक लाख रुपये के निजी मुचलके और दो जमानतदारों के आधार पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।
साथ ही चेतावनी भी दी कि यदि भविष्य में महिला किसी समान अपराध में शामिल पाई जाती है तो उसकी जमानत रद्द की जा सकती है।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना केवल परिस्थितियों और मानवीय पहलुओं को ध्यान में रखते हुए महिला को सशर्त जमानत दी जा रही है।