कोर्ट ने कहा- गिरफ्तारी के दौरान संवैधानिक अधिकारों और बीएनएसएस प्रावधानों का हुआ पूर्ण पालन, परिजनों को व्हाट्सएप कॉल से सूचना देना पर्याप्त
जयपुर। जल जीवन मिशन (JJM) घोटाले में गिरफ्तार राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री महेश जोशी को बड़ा कानूनी झटका लगा है।
जयपुर की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अदालत संख्या-2 ने एसीबी की ओर से की गई महेश जोशी की गिरफ्तारी की प्रक्रिया को उचित ठहराया है।
कोर्ट ने महेश जोशी के बेटे की ओर से दायर याचिका को खारिज करते हुए गिरफ्तारी को पूरी तरह वैध और कानूनसम्मत माना है।
मंगलवार को महेश जोशी द्वारा दायर प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए विशेष न्यायाधीश राजेश कुमार दड़िया ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि गिरफ्तारी के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों का पूर्ण रूप से पालन किया गया।
एसीबी कोर्ट ने माना कि परिजनों को गिरफ्तारी की सूचना व्हाट्सएप कॉल के जरिए समय पर तकनीकी एवं मौखिक माध्यमों से दे दी गई थी, इसलिए केवल लिखित सूचना नहीं दिए जाने के आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं ठहराया जा सकता।
गौरतलब है कि महेश जोशी की ओर से दावा किया गया था कि गिरफ्तारी के समय उनके परिजनों को लिखित सूचना नहीं दी गई, इसलिए गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जाए।
गौरतलब है कि जल जीवन मिशन परियोजना में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में एसीबी ने 7 मई को पूर्व मंत्री महेश जोशी को गिरफ्तार किया था।
गिरफ्तारी के बाद उन्हें अदालत में पेश कर पांच दिन के पुलिस रिमांड की मांग की गई थी। इसी प्रक्रिया को चुनौती देते हुए महेश जोशी ने अदालत में प्रार्थना पत्र दायर किया था।
क्या था महेश जोशी का तर्क?
महेश जोशी की ओर से उनके अधिवक्ता ने अदालत में कहा कि गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों और कानून के अनिवार्य प्रावधानों का पालन नहीं किया गया।
गिरफ्तारी के आधारों की लिखित सूचना उनके परिजनों अथवा अधिवक्ता को उपलब्ध नहीं कराई गई और न ही उसकी कोई पावती ली गई।
याचिका में कहा गया कि जब तक गिरफ्तारी की सूचना विधिवत लिखित रूप में परिजनों को नहीं दी जाती, तब तक गिरफ्तारी की प्रक्रिया अधूरी और गैर-कानूनी मानी जानी चाहिए।
इस आधार पर महेश जोशी को तत्काल रिहा करने की मांग की गई थी।
एसीबी का पक्ष: परिजनों को दी गई सूचना
प्रार्थना पत्र का विरोध करते हुए एसीबी की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी की कार्रवाई पूरी पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी।
एसीबी के अनुसार अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भूपेन्द्र सिंह अपनी टीम के साथ पूर्व मंत्री के आवास पर पहुंचे थे।
उस समय महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी, पुत्रवधू और उनकी बड़ी बहन घर पर मौजूद थे। टीम ने अपना परिचय-पत्र दिखाया और महेश जोशी को ब्यूरो मुख्यालय ले जाने के कारणों और प्रक्रिया की जानकारी भी दी।
इसके बाद ब्यूरो मुख्यालय में औपचारिक गिरफ्तारी की गई।
गिरफ्तारी की सूचना रोहित जोशी को पहले सामान्य फोन कॉल के माध्यम से और बाद में व्हाट्सएप कॉल के जरिए दी गई।
एसीबी ने कहा कि इतना ही नहीं, जब महेश जोशी को अदालत ले जाया जा रहा था और अदालत परिसर में पहुंचाया गया, तब भी व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से परिजनों को सूचित किया गया।
एसीबी ने इन दावों के समर्थन में व्हाट्सएप कॉल के स्क्रीनशॉट और अन्य तकनीकी रिकॉर्ड भी अदालत में प्रस्तुत किए।
कोर्ट ने कहा- सूचना का उद्देश्य पूरा हुआ
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि बीएनएसएस की धारा 48 का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गिरफ्तार व्यक्ति के परिवारजन या उसके द्वारा नामित व्यक्ति को गिरफ्तारी की जानकारी मिल सके, ताकि आरोपी अपने बचाव का अधिकार प्रभावी ढंग से प्रयोग कर सके।
कोर्ट ने माना कि इस मामले में परिजनों को समय पर गिरफ्तारी की सूचना मिल चुकी थी। सूचना देने का उद्देश्य पूरा हो चुका था, इसलिए केवल इस आधार पर गिरफ्तारी को अवैध नहीं माना जा सकता कि सूचना लिखित रूप में नहीं दी गई।
रिमांड सुनवाई के समय मौजूद थे अधिवक्ता
अदालत ने यह भी महत्वपूर्ण टिप्पणी की कि जब महेश जोशी को पुलिस रिमांड के लिए अदालत में पेश किया गया, उस समय उनके अधिवक्ता पहले से ही अदालत में मौजूद थे। उन्होंने रिमांड आवेदन पर विस्तृत बहस भी की थी।
कोर्ट के अनुसार यह तथ्य स्वयं साबित करता है कि गिरफ्तारी और रिमांड की जानकारी परिजनों और वकील तक समय पर पहुंच चुकी थी। यदि सूचना नहीं मिली होती तो अधिवक्ता अदालत में उपस्थित होकर प्रभावी बहस नहीं कर सकते थे।
हाईकोर्ट में बुधवार को होगी सुनवाई
इस बीच महेश जोशी के पुत्र रोहित जोशी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में बुधवार को सुनवाई होगी।
इस याचिका में रोहित जोशी ने अपने पिता महेश जोशी की गिरफ्तारी प्रक्रिया को चुनौती दी है।
अब एसीबी कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी को वैध ठहराए जाने के बाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।