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पूर्व मंत्री महेश जोशी को बड़ा झटका: राजस्थान हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज की

Mahesh Joshi Arrest Case: Rajasthan High Court Dismisses Habeas Corpus Petition Challenging Arrest

बेटे रोहित जोशी ने ACB द्वारा गिरफ्तारी को बताया था अवैध, हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए विस्तृत आदेश अलग से जारी करने की कही बात

जयपुर। पूर्व मंत्री महेश जोशी को शुक्रवार को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा।

हाईकोर्ट जयपुर पीठ में अवकाशकालीन विशेष बेंच ने महेश जोशी के बेटे रोहित जोशी द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हैबियस कॉर्पस) याचिका को खारिज कर दिया है।

याचिका में महेश जोशी की गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए इसे संविधान के अनुच्छेद 22(1) के प्रावधानों के विपरीत बताया गया था।

जस्टिस उमा शंकर व्यास एवं जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस याचिका अपना फैसला सुनाते हुए याचिका को खारिज करने का आदेश दिया हैं.

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह इस मामले में याचिका खारिज करने के विस्तृत कारण की जानकारी देते हुए अलग से विस्तृत फैसला देगी.

क्या थी याचिका

याचिकाकर्ता रोहित जोशी ने अपनी याचिका में कहा था कि उनके पिता महेश जोशी को 7 मई 2026 को सुबह 7:45 बजे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) द्वारा गिरफ्तार किया गया था।

याचिका में आरोप लगाया गया था कि गिरफ्तारी के समय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत आवश्यक कानूनी प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया तथा परिवारजनों और मित्रों को गिरफ्तारी के आधारों की विधिवत जानकारी नहीं दी गई।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने गिरफ्तारी की वैधता पर प्रश्न उठाए.

जबकि राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने याचिका का विरोध किया। राज्य का पक्ष था कि गिरफ्तारी कानून के अनुसार की गई है और बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

याचिका खारिज, विस्तृत फैसला बाद में

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा कि हैबियस कॉर्पस याचिका निरस्त की जाती है तथा इससे संबंधित अन्य आवेदन भी निस्तारित किए जाते हैं।

गौरतलब है कि महेश जोशी के खिलाफ एसीबी थाना, जयपुर में FIR संख्या 245/2024 दर्ज है। इसी मामले में की गई गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए उनके पुत्र ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

अब हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद महेश जोशी को इस मामले में तत्काल राहत नहीं मिली है।

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