5-6 बार गर्भपात, 10.5 लाख के लोन लेकर मदद, करोड़ों की वसूली और जेल में कथित दबाव-एक ही मामले में आमने-सामने दो बिल्कुल अलग कहानियां, अब सबकी नजर हाईकोर्ट पर।
जयपुर। प्रदेश के बहुचर्चित हनीट्रैप और कथित ब्लैकमेलिंग प्रकरण में अब घटनाक्रम नया मोड़ लेता दिखाई दे रहा है।
जिस मामले में एक युवती फिलहाल जयपुर जिला कारागार में बंद है, उसी मामले को लेकर अब ऐसे आरोप सामने आए हैं जिन्होंने पूरे घटनाक्रम पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या यह वास्तव में ब्लैकमेलिंग का मामला है, या फिर प्रेम संबंध, आर्थिक लेन-देन और व्यक्तिगत विवाद की ऐसी जटिल कहानी है जिसमें सच्चाई अभी पूरी तरह सामने आना बाकी है?
जमानत याचिका पर राजस्थान हाईकोर्ट में सोमवार को होने वाली सुनवाई से पहले युवती के परिवार ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराकर दावा किया है कि उन्हें समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि दो अज्ञात व्यक्ति युवती के अधिवक्ता के जूनियर बनकर जेल तक पहुंच गए और वहां बंद युवती को समझौते के लिए धमकाने का प्रयास किया।
जेल तक पहुंचे कथित दबाव बनाने वाले लोग, परिवार ने उठाए सवाल
शनिवार 13 जून को लालकोठी थाने में दर्ज शिकायत के अनुसार युवती के भाई ने आरोप लगाया है कि राजस्थान हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल होने के बाद से परिवार पर दबाव बढ़ गया है।
शिकायत में कहा गया है कि कुछ लोग लगातार समझौते के लिए संपर्क कर रहे हैं और युवती को भी जेल के भीतर प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वे लोग कौन थे जो स्वयं को वकील का जूनियर बताकर जेल तक पहुंच गए?
यदि शिकायत सही है तो जेल सुरक्षा व्यवस्था और मुलाकात प्रक्रिया पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
पुलिस अब इन आरोपों की जांच कर रही है, हालांकि अभी तक किसी व्यक्ति की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है।
सोमवार को हाईकोर्ट में जमानत पर सुनवाई
कथित ब्लैकमेलिंग मामले में गिरफ्तार युवती ने राजस्थान हाईकोर्ट में नियमित जमानत याचिका दायर की है। इससे पहले निचली अदालत ने 5 जून 2026 को उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
अब सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई प्रस्तावित है।
माना जा रहा है कि सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों और दस्तावेजों के आधार पर अदालत के समक्ष विस्तृत पक्ष रखेंगे।
याचिका में कारोबारी पर गंभीर आरोप: 5-6 बार गर्भपात
हाईकोर्ट में दायर जमानत याचिका में युवती ने शिकायतकर्ता कारोबारी पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं।
याचिका के अनुसार दोनों के बीच कई वर्षों तक निकट संबंध रहे और कारोबारी ने स्वयं को अविवाहित बताकर उसके साथ संबंध स्थापित किए।
युवती का आरोप है कि उसे विदेश ले जाया गया, जहां उसके साथ यौन शोषण किया गया। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि संबंधों के दौरान वह कई बार गर्भवती हुई और उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया।
जिसके चलते उसका 5-6 बार गर्भपात कराया गया.
युवती ने आरोप लगाया है कि करीब चार से पांच वर्षों तक उसका शोषण होता रहा और उसे विवाह का झूठा आश्वासन दिया जाता रहा।
इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।
10.5 लाख रुपये का लोन लेकर मदद करने का दावा
जमानत याचिका में युवती ने यह भी दावा किया है कि जब कारोबारी आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा था तब उसने बैंक से लगभग 10.5 लाख रुपये का ऋण लेकर उसकी मदद की थी।
याचिका के अनुसार बाद में जब उसने अपनी राशि वापस मांगी तो दोनों के संबंधों में तनाव उत्पन्न हो गया।
युवती का आरोप है कि वह अपना जीवन अलग तरीके से आगे बढ़ाना चाहती थी, लेकिन कारोबारी उसे छोड़ना नहीं चाहता था।
याचिका में कहा गया है कि बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड दोनों पक्षों के बीच गहरे आर्थिक विवाद की ओर संकेत करते हैं।
पहली में मिली जमानत तो दर्ज कि दूसरी FIR
युवती ने अपनी याचिका में दावा किया है कि शिकायतकर्ता पहले भी उसके खिलाफ महेश नगर थाने में एफआईआर दर्ज करवा चुका था। उस मामले में उसे अदालत से जमानत मिल चुकी है।
याचिका के अनुसार शिकायतकर्ता ने उसकी जमानत निरस्त करवाने के लिए High court का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन बाद में वह याचिका वापस ले ली गई। इसके बाद नई FIR दर्ज करवाई गई।
युवती का आरोप है कि नई एफआईआर भी उसी विवाद की निरंतरता है और उसे कानूनी दबाव में रखने के उद्देश्य से दर्ज करवाई गई।
यौन शोषण का आरोप
हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार युवती शिकायतकर्ता के पास इंटर्नशीप के लिए आयी थी, इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं।
याचिका में कहा गया है कि कारोबारी विवाहित होने के बावजूद उसके साथ संबंध में था और उसने अपने प्रभाव का उपयोग करते हुए उसका शोषण किया।
युवती का दावा है कि गर्भधारण के बाद उस पर गर्भपात कराने का दबाव बनाया गया तथा पूरे मामले को गोपनीय रखने की कोशिश की गई।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि उसने इस संबंध में जयपुर पुलिस आयुक्त को शिकायत भेजी थी।
बेंगलुरु और गुरुग्राम में दर्ज मामलों का भी हवाला
युवती ने अपनी जमानत याचिका में दावा किया है कि 20 अप्रैल 2025 को बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड थाने में शिकायतकर्ता के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। आरोप था कि शिकायतकर्ता ने युवती के होटल में जाकर छुप गया था और युवती के आने पर उसके मारपीट की.
याचिका के अनुसार इस मामले में पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट भी प्रस्तुत की।
इसके अतिरिक्त गुरुग्राम के डीएलएफ थाने में दर्ज एक अन्य मामले का भी हवाला दिया गया है। युवती का कहना है कि इन मामलों से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्षों के बीच विवाद लंबे समय से चल रहा था और वह लगातार विभिन्न मंचों पर शिकायतें दर्ज कराती रही है।
साइबर शिकायत और मीडिया ट्रायल के आरोप
युवती ने गुरुग्राम साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भी शिकायत दर्ज कराने का दावा किया है। याचिका के अनुसार उसे फोन कॉल, संदेश और अन्य माध्यमों से धमकियां दी जाती थीं।
उसने यह भी आरोप लगाया है कि उसके खिलाफ मीडिया में झूठी और मानहानिकारक खबरें प्रकाशित करवाई गईं, जिनके विरुद्ध कानूनी नोटिस जारी किया गया।
पुलिस जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल
जमानत याचिका में जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। युवती का आरोप है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और मोबाइल डेटा की निष्पक्ष जांच नहीं की गई तथा शिकायतकर्ता के प्रभाव में जांच की दिशा तय हुई।
याचिका में यह भी दावा किया गया है कि उसके मोबाइल फोन से कोई आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है और कई महत्वपूर्ण तथ्यों को जांच में नजरअंदाज किया गया।
क्या हैं युवती पर आरोप?
परिवादी कारोबारी विमल डागा ने शिकायत में आरोप लगाया है कि उसकी पूर्व इंटर्न आरोपी युवती और उसके सहयोगी युवक और अन्य लोगों ने मिलकर उसे हनी ट्रैप में फंसाया।
कारोबारी के आरोप है कि पीड़ित को एआई तकनीक से तैयार कथित आपत्तिजनक फोटो और वीडियो वायरल करने, झूठे मुकदमों में फंसाने तथा परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी देकर करोड़ों रुपये की मांग की गई।
पुलिस में कारोाबारी की दर्ज शिकायत के अनुसार, आरोपियों द्वारा पीड़ित से अब तक करीब 90 लाख रुपये वसूले जा चुके हैं, जबकि 50 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग भी की गई थी।
पुलिस ने इस मामले में आरोपी युवती और युवक को गिरफतार किया था, जिसके बाद से दोनो जेल में हैं.
सुनवाई पर टिकी निगाहें
इस हाईप्रोफाइल मामले में अब सभी की निगाहें सोमवार को राजस्थान हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।
एक ओर पुलिस और शिकायतकर्ता इसे गंभीर ब्लैकमेलिंग प्रकरण बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर युवती का दावा है कि वह खुद लंबे समय से शोषण, आर्थिक विवाद और दबाव का शिकार रही है।
जेल में कथित रूप से पहुंचकर समझौते के लिए धमकाने के आरोपों ने मामले को और अधिक रहस्यमय बना दिया है।
यदि ये आरोप सही साबित होते हैं तो यह केवल एक ब्लैकमेलिंग केस नहीं बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के प्रयास का भी गंभीर मामला बन सकता है।
अब देखना होगा कि हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और अदालत इस पूरे विवाद को किस नजरिये से देखती है।
