राजस्थान हाईकोर्ट की बड़ी टिप्पणी: संविधान में ‘क्रिमिनल रिट पिटीशन’ जैसी कोई अवधारणा नहीं; एफआईआर क्लबिंग की मांग वाली याचिका पर हाईकोर्ट ने कहा— पहले तय होगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं; एमिकस क्यूरी नियुक्त।
जोधपुर | राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि संविधान में “क्रिमिनल रिट पिटीशन” जैसी कोई अवधारणा नहीं है।
राजस्थान हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों की पोषणीयता (Maintainability) पर महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है और मामले की सहायता के लिए अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया है।
जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने राहुल मोदी की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है।
आदर्श को-ऑपरेटिव सोसायटी घोटाले से जुड़े मामले में राहुल मोदी की ओर से यह याचिका अनुच्छेद 226 के तहत दायर की गई है, जिसमें BNSS की धारा 528 का भी हवाला दिया गया है।
इस याचिका में याचिकाकर्ता ने आदर्श को-ऑपरेटिव सोसायटी मामले से जुड़ी सभी एफआईआर को “एकरूपता के सिद्धांत” (Principle of Oneness) के आधार पर एक साथ (Clubbing) सुनवाई करने का अनुरोध किया था।
खंडपीठ के पुराने आदेश का हवाला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 के जिया एवं अन्य बनाम राज्य सरकार मामले में पारित फैसले का हवाला देते हुए कहा कि संविधान में “क्रिमिनल रिट पिटीशन” जैसी कोई व्यवस्था नहीं है।
यदि कोई रिट याचिका आपराधिक विषय से संबंधित भी हो, तब भी उसका पंजीकरण केवल रिट पिटीशन के रूप में ही किया जाएगा।
साथ ही रजिस्ट्री को भविष्य में किसी भी मामले को “क्रिमिनल रिट पिटीशन” के रूप में दर्ज नहीं करने के आदेश दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश भी
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास बालिया ने दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट के मुकेश मोदी मामले तथा राजस्थान हाईकोर्ट के प्रियंका मोदी मामले में समान आरोपों वाले मामलों को एक साथ सुनने के सिद्धांत को स्वीकार किया जा चुका है।
इसी आधार पर वर्तमान मामले में भी सभी संबंधित एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की गई।
Maintainability पर फैसला बाद में, पहले नोटिस
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पूछा कि क्या वर्तमान रोस्टर के समक्ष इस प्रकार की याचिका सुनवाई योग्य है, क्योंकि यह रोस्टर अनुच्छेद 226 के अंतर्गत सिविल रिट याचिकाओं की सुनवाई के लिए निर्धारित है।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि पूर्व आदेशों के बाद सिविल और आपराधिक मामलों का अंतर समाप्त हो गया है, लेकिन हाईकोर्ट ने इस प्रश्न पर अंतिम निर्णय देने के बजाय Maintainability का मुद्दा खुला रखते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है।
एमिकस क्यूरी नियुक्त, 27 जुलाई को सुनवाई
मामले की जटिलता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने अधिवक्ता मुक्तेश माहेश्वरी को एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) नियुक्त किया है।
साथ ही याचिकाकर्ता को राज्य सरकार एवं अन्य पक्षों को याचिका की प्रति उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को तय की गई है।
क्या होगा असर?
यदि इस मामले में हाईकोर्ट पोषणीयता (Maintainability) के प्रश्न पर विस्तृत निर्णय देता है, तो यह भविष्य में राजस्थान हाईकोर्ट में दायर होने वाली उन सभी रिट याचिकाओं के लिए महत्वपूर्ण नज़ीर बन सकता है, जिनका संबंध आपराधिक मामलों से है।
फिलहाल, राजस्थान हाईकोर्ट ने केवल नोटिस जारी किया है और इस कानूनी प्रश्न को अंतिम निर्णय के लिए खुला रखा है।
