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रिश्ते बचाने हैं तो मीडिएशन अपनाइए, मध्यस्था से 2.3 करोड़ मामले सुलझ सकते हैं-जस्टिस विक्रम नाथ, श्रीलंकाई जज पर मजाकिया टिप्पणी से गूंजा सभागार

Justice Vikram Nath: 2.3 Crore Pending Cases Can Be Resolved Through Mediation, Jaipur Peace Declaration Adopted

जयपुर। जयपुर में आयोजित कॉमनवेल्थ पीस, मेडिएशन एंड रूल ऑफ लॉ कॉन्फ्रेंस के समापन समारोह में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस विक्रम नाथ ने मध्यस्थता (Mediation) को भारत की न्याय व्यवस्था और समाज के भविष्य का सबसे प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि देशभर में वर्ष 2026 तक लंबित लगभग 2.3 करोड़ मामले ऐसे हैं, जिन्हें मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता केवल मुकदमे खत्म नहीं करती, बल्कि टूटते रिश्तों को भी बचाती है।

समारोह की शुरुआत में जस्टिस विक्रम नाथ ने अपने संबोधन से पहले श्रीलंका के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए.एच.एम. दिलीप नवाज की जमकर सराहना की।

उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि अभी-अभी सभी ने एक बेहद प्रभावशाली वक्ता का संबोधन सुना है और उन्हें देखकर लगता है कि सेवानिवृत्ति के बाद वे राजनीति में भी सफल हो सकते हैं।

उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि “श्रीलंका के प्रधानमंत्री को सावधान और सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि जस्टिस नवाज किसी भी समय उनकी जगह ले सकते हैं।”

इस टिप्पणी पर पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा और स्वयं जस्टिस नवाज भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके।

अदालतें विवाद की शुरुआत नहीं, अंत का स्थान हों”

अपने संबोधन में जस्टिस विक्रम नाथ ने अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला न्यायाधीश सैंड्रा डे ओ’कॉनर के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि अदालतें वह स्थान होनी चाहिए जहां सभी वैकल्पिक प्रयासों के बाद विवाद समाप्त हों, न कि जहां विवाद शुरू हों।

उन्होंने कहा कि यही दर्शन मध्यस्थता की मूल भावना है।

उन्होंने कहा कि यदि मध्यस्थता जैसी व्यवस्था न होती तो बातचीत और आपसी समझ से सुलझने वाले छोटे-छोटे विवाद भी अदालतों तक पहुंच जाते और न्यायपालिका पर बोझ कई गुना बढ़ जाता।

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि अदालत का फैसला कई बार अपीलों के कारण वर्षों तक विवाद को जीवित रखता है, जबकि मध्यस्थता से हुआ समझौता दोनों पक्षों की स्वैच्छिक सहमति पर आधारित होता है और अधिक स्थायी साबित होता है।

उन्होंने कहा “लोग उसी समाधान का सबसे अधिक सम्मान करते हैं, जिसे उन्होंने स्वयं मिलकर तैयार किया हो।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज रिश्तों को बचाने का सबसे प्रभावी माध्यम मीडिएशन है। शांति ही मजबूत और भरोसेमंद समाज की नींव है और विश्वास के आधार पर ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण संभव है।

2.3 करोड़ मामलों में मध्यस्थता की अपार संभावना

जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि वर्ष 2026 तक देशभर में लंबित लगभग 2.3 करोड़ मुकदमों में ऐसे मामले में मौजूद हैं जो मध्यस्थता के लिए उपयुक्त हैं।

उन्होंने कहा कि विशेष रूप से वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस के मामले, मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण, समझौता योग्य आपराधिक मामले में मध्यस्थता की सफलता दर अत्यंत उत्साहजनक रही है।

उन्होंने कहा कि मध्यस्थता में कोई पक्ष जीतता या हारता नहीं है, बल्कि दोनों पक्ष संवाद और सहमति से समाधान तक पहुंचते हैं। इससे समय, धन और न्यायिक संसाधनों-तीनों की बचत होती है।

उन्होंने यह भी कहा कि मामला राजस्थान के किसी छोटे गांव का हो या कॉमनवेल्थ देशों के बीच सीमा-पार विवाद का, संवाद और मध्यस्थता स्थायी समाधान का सबसे प्रभावी रास्ता है।

जयपुर पीस मीडिएशन डिक्लेरेशन-2026 पारित

सम्मेलन के समापन पर ‘जयपुर पीस मीडिएशन डिक्लेरेशन-2026’ को सर्वसम्मति से पारित किया गया.

घोषणा-पत्र में मध्यस्थता को न्याय प्रणाली का प्रभावी, सुलभ और मानवीय विकल्प बनाने, सीमा-पार विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने तथा कॉमनवेल्थ देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की गई।

घोषणा-पत्र में कहा गया कि न्याय तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने, अदालतों में लंबित मामलों का बोझ कम करने और विवादों के शीघ्र निस्तारण के लिए मध्यस्थता को संस्थागत रूप से मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

AI और डिजिटल तकनीक से मजबूत होगी मध्यस्थता व्यवस्था

घोषणा-पत्र में यह भी तय किया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक का उपयोग कर मध्यस्थता व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा।

साथ ही मध्यस्थों के प्रशिक्षण, अनुसंधान, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

‘न्यायायन’ प्लेटफॉर्म का शुभारंभ

समारोह के दौरान राजस्थान की जिला अदालतों को पेपरलेस बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए ‘न्यायायन’ डिजिटल प्लेटफॉर्म का शुभारंभ भी किया गया।

समापन समारोह में राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, श्रीलंका सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस ए.एच.एम. दिलीप नवाज, बहामास कोर्ट ऑफ अपील के न्यायाधीश जस्टिस वशीष्ट कोकाराम, जाम्बिया सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस आभा नायर पटेल सहित देश-विदेश के न्यायाधीश, वरिष्ठ अधिवक्ता और कॉमनवेल्थ देशों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

समापन सत्र के अंत में जस्टिस विक्रम नाथ ने ‘जयपुर पीस मीडिएशन डिक्लेरेशन-2026’ पर हस्ताक्षर भी किए, जिसके साथ यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शांति, संवाद और न्याय के साझा संकल्प के साथ संपन्न हुआ।

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