जयपुर। कानोरिया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वूमेन में सत्र 2026-27 की नवागंतुक छात्राओं के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम 2026 का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में कानून और न्याय के मूल्यों के साथ छात्राओं को उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों, व्यक्तित्व विकास और विधि शिक्षा के महत्व से रूबरू कराया गया।
कार्यक्रम में राजस्थान विश्वविद्यालय के विधि विभाग की डीन डॉ. संजुला थानवी, डॉ. भीमराव अंबेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर के रजिस्ट्रार वीरेन्द्र कुमार वर्मा, और कानोरिया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वूमेन की सचिव डॉ. रेखा भटनागर बतौर अतिथि मौजूद रहीं।
वकील उस संरचना की रक्षा करता है, जिस पर पूरा समाज टिका है
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. संजुला थानवी ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि एक डॉक्टर शरीर का उपचार करता है और एक इंजीनियर इमारतों का निर्माण करता है, लेकिन एक वकील उस संरचना की रक्षा करता है, जिस पर पूरा समाज टिका हुआ है।
उन्होंने छात्राओं को आलोचनात्मक सोच विकसित करने और अपने विचारों को लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि विधि की पढ़ाई केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और संविधान के प्रति जिम्मेदारी को समझने का माध्यम भी है।
डॉ. थानवी ने छात्राओं को संदेश दिया कि उन्हें अपने अधिकारों से पहले अपने कर्तव्यों को याद रखना चाहिए।

विषम परिस्थितियां ही व्यक्ति को महान बनाती हैं
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि वीरेन्द्र कुमार वर्मा ने नवप्रवेशित छात्राओं का स्वागत करते हुए उन्हें जीवन में चुनौतियों से घबराने के बजाय उनका सामना करने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि विषम परिस्थितियां ही व्यक्ति को महान बनाती हैं। सामान्य परिस्थितियों में व्यक्ति सामान्य ही रह सकता है, लेकिन महान बनने के लिए चुनौतियों और कठिन परिस्थितियों का सामना करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि कानून हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है और जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कानून का ज्ञान व्यक्ति की सहायता करता है।
उन्होंने छात्राओं को अपने व्यक्तित्व के समग्र विकास पर ध्यान देने तथा मानसिक और शारीरिक दोनों प्रकार के विकास के लिए निरंतर प्रयास करने की सलाह दी।

समाज के वंचित वर्ग की आवाज बनना वकील की सबसे बड़ी जिम्मेदारी
महाविद्यालय की निदेशक डॉ. रश्मि चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के वंचित वर्ग की आवाज बनना एक वकील की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने छात्राओं और उनके अभिभावकों द्वारा शिक्षा के लिए कानोरिया स्कूल ऑफ लॉ फॉर वूमेन को चुनने की सराहना की और सभी का स्वागत किया।
उन्होंने छात्राओं को नियमित अध्ययन की आदत विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि पुस्तकों का अध्ययन केवल ज्ञानवर्धन नहीं करता, बल्कि विधि विद्यार्थियों में तार्किक और आलोचनात्मक चिंतन की क्षमता भी विकसित करता है।
उन्होंने छात्राओं को रीडिंग क्लब बनाने तथा सामूहिक अध्ययन और विचार-विमर्श की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए
प्रोत्साहित किया।

मानव गरिमा, सामाजिक कल्याण और न्याय को सर्वोच्च प्राथमिकता
कार्यक्रम की शुरुआत में प्राचार्या डॉ. वर्तिका अरोड़ा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य ऐसी कुशल और सक्षम विधि विशेषज्ञों की पीढ़ी तैयार करना है, जो मानव गरिमा, सामाजिक कल्याण और न्याय के मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।
उन्होंने छात्राओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सभी छात्राओं में प्रतिभा और क्षमता होती है, लेकिन निरंतर मेहनत, समर्पण, अनुशासन और उत्कृष्टता की भावना के साथ आगे बढ़ने वाली छात्राएं ही श्रेष्ठ विधि विशेषज्ञ बनती हैं।
उन्होंने छात्राओं को अपने ज्ञान और कौशल का निरंतर विकास करने तथा समाज में न्याय और सकारात्मक बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

क्लब, समितियों और गतिविधियों की दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान डॉ. सुरभि पारख, सहायक आचार्य ने महाविद्यालय में संचालित विभिन्न क्लबों, समितियों और नियमों के संबंध में छात्राओं को विस्तार से जानकारी दी।
इसके माध्यम से नवप्रवेशित छात्राओं को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ महाविद्यालय की विभिन्न सह-पाठ्यक्रम और विकासात्मक गतिविधियों से परिचित कराया गया।
कार्यक्रम का संचालन महाविद्यालय की छात्राओं निहारिका सिंह राजावत और मिष्ठी अग्रवाल ने किया।
कार्यक्रम के अंत में पूर्णिमा गौतम, सहायक आचार्य ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, छात्राओं और उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम ने नई छात्राओं के लिए विधि शिक्षा की नई यात्रा की मजबूत शुरुआत की, जहां उन्हें केवल एक बेहतर विधि पेशेवर बनने के बजाय न्याय, कर्तव्य और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रति संवेदनशील नागरिक बनने का संदेश भी दिया गया।