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इस बिल्डिंग का कोई श्रेय नहीं लेता!”-220 करोड़ की हाईकोर्ट बिल्डिंग, उद्घाटन के महज 3 साल में शुरू हुई जर्जर होने की कहानी

Rajasthan High Court File Mystery: 5 Criminal Case Files Missing, Deleted from Cause List; FIR Registered

राजस्थान हाईकोर्ट ने लिया स्वप्रेणा प्रसंज्ञान, 24×7 निगरानी, कंट्रोल रूम और मॉक ड्रिल के आदेश

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ का नया भवन, जिसका उद्घाटन वर्ष 2019 में देश के राष्ट्रपति सहित देश की शीर्ष संवैधानिक हस्तियों की मौजूदगी में हुआ था, अब अपनी संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है।

दूसरी तरफ जोधपुर के भीतर पावटा पर बना राजस्थान हाईकोर्ट का दशकों पूर्व बना हेरिटेज बिल्डिंग आज भी अपनी मजबूती का दंभ भरता है।

करीब 220 करोड़ रुपये की लागत से तैयार राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन के कब्जा मिलने के कुछ ही वर्षों बाद छत, फॉल्स सीलिंग, प्लास्टर और अन्य हिस्सों के गिरने की घटनाएं सामने आने लगीं।

अब मामला सेंट्रल डोम तक पहुंच गया है, जिसे लेकर IIT बॉम्बे की विशेषज्ञ रिपोर्ट ने बेहद गंभीर खतरे की आशंका जताई है।

राजस्थान हाईकोर्ट ने सोमवार 10 अगस्त को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए इसे सुओ मोटू जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।

जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि भवन में मौजूद मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की प्रशासनिक उदासीनता या जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी।

2019 में हुआ भव्य उद्घाटन, कुछ ही साल में शुरू हो गईं समस्याएं

लंबे समय के इंतजार के बाद राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन की नींव 20 अप्रैल 2007 को रखी गई थी।

बाद में 23 दिसंबर 2010 को RSRDC लिमिटेड के साथ एमओयू हुआ और 20 अप्रैल 2011 को मुख्य भवन का निर्माण कार्य शुरू किया गया।

वर्ष 2013 के अंत तक भवन का स्ट्रक्चरल कार्य पूरा हो गया और 6 दिसंबर 2019 को भवन को हैंडओवर किया गया।

इसके बाद राष्ट्रपति, केंद्रीय कानून मंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, राजस्थान के मुख्यमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों सहित कई गणमान्य व्यक्तियों की मौजूदगी में इसका उद्घाटन हुआ।

लेकिन भवन को अस्तित्व में आए कुछ ही वर्षों बाद इसकी संरचनात्मक गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे।

छत गिरने से लेकर प्लास्टर और फॉल्स सीलिंग गिरने तक

राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन के दिसंबर 2019 में उद्घाटन के तीन साल बाद ही घटनाओं का क्रम शुरू हो गया।

हाईकोर्ट के आदेश में दर्ज घटनाओं की सूची बताती है कि भवन में समस्याएं एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं रहीं।

20 फरवरी 2023 को शाम 06.05 बजे चैंबर नंबर 14 की छत गिर गई, जिससे चैंबर की फॉल्स सीलिंग और अन्य फर्नीचर क्षतिग्रस्त हो गए। इससे पहले कोर्ट नंबर 02, 09, 16 एवं चैंबर नंबर 16 और परिसर में विभिन्न स्थानों पर इसी तरह की घटनाएं घटित हो चुकी थीं।

29 अप्रैल 2023 को डोम एरिया की छत का कुछ हिस्सा गिर गया।

23 जून 2023 को सिविल विविध अपील अनुभाग की छत से फॉल्स सीलिंग गिर गई।

28 जून 2023 को बिल अनुभाग की छत और 12 सितंबर 2024 को बारिश के कारण हाईकोर्ट की कक्ष संख्या 02 में छत से पानी टपकने तथा कोर्ट कक्ष का प्लास्टर उखड़कर गिरने के कारण फॉल्स सीलिंग भी गिर गई।

कोर्ट संख्या 16 में छत व खिड़की से पानी अंदर आने के कारण कोर्ट का नियमित कार्य रोका गया और अन्य कमरे में शिफ्ट किया गया।

सितंबर माह, 2024 में ही लेखा (संस्थापन) शाखा में फॉल्स सीलिंग का जिप्सम बोर्ड गिर गया।

12 सितंबर 2024 को न्यायालय कक्ष संख्या 19 की छत से पानी के रिसाव के कारण फॉल्स सीलिंग में पानी भर गया और फॉल्स सीलिंग गिर गई।

18 सितंबर 2024 को सुबह कोर्ट कक्ष संख्या 02 में भीषण आग लग गई, जबकि एक दिन पूर्व ही RSRDC द्वारा इस तथ्य का प्रमाण पत्र दिया गया था कि न्यायालय कक्ष संख्या 02 उपयोग में लिए जाने के योग्य है।

24 सितंबर 2024 को भूतल पर स्थित गेट संख्या 03 पर मीडिएशन सेंटर के सामने स्थित लिफ्ट के पास छत गिर गई।

इन घटनाओं के अलावा भवन का कब्जा लिए जाने के बाद ही न्यायालय कक्ष संख्या 02, 09, 16 व 19, न्यायाधीश चैंबर संख्या 14 व 16, लोक अदालत के सामने सहित भवन के डोम, कई सेक्शनों व क्षेत्रों की छत गिर चुकी है।

13 अप्रैल 2025 को डोम एरिया का प्लास्टर गिरा।

1 अक्टूबर 2025 को स्टेटिस्टिक्स सेक्शन में प्लास्टर का हिस्सा गिरा।

29 नवंबर 2025 को रजिस्ट्रार जनरल कार्यालय की ओर जाने वाले कॉरिडोर की फॉल्स सीलिंग गिर गई।

निरीक्षण में चीफ जस्टिस के चैंबर की ओर जाने वाला कॉरिडोर भी जर्जर स्थिति में पाया गया।

2024 में कोर्ट नंबर 2 में लगी भीषण आग, फायर सेफ्टी सिस्टम पर भी सवाल

18 सितंबर 2024 को सुबह करीब 5:36 बजे कोर्ट नंबर 2 में भीषण आग लग गई थी।

खास बात यह रही कि आग लगने से एक दिन पहले ही RSRDC लिमिटेड की ओर से कोर्ट नंबर 2 को उपयोग के योग्य होने का प्रमाण पत्र दिया गया था।

हालांकि आग के दौरान स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम काम करता हुआ नहीं पाया गया।

IIT जोधपुर के निरीक्षण में भी फायर सेफ्टी सिस्टम में कई कमियां सामने आईं और इसे निर्धारित मानकों के अनुरूप स्थापित एवं अनुरक्षित नहीं पाया गया।

इस घटना के संबंध में 12 नवंबर 2024 को कुड़ी भगतासनी पुलिस थाने में FIR दर्ज की गई थी।

IIT जोधपुर की रिपोर्ट में स्टील में भारी जंग का खुलासा

भवन की स्थिति की जांच के लिए IIT जोधपुर की एक्सपर्ट कमेटी ने निरीक्षण किया।

कमेटी ने 20 मार्च 2023 को प्रारंभिक रिपोर्ट और 19 अप्रैल 2023 को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट में स्लैब के कंक्रीट कवर के टूटने और गिरने, स्टील रिइन्फोर्समेंट में भारी जंग, कंक्रीट में दरारों तथा रूफ-टॉप के आसपास के कॉलम में गंभीर रूप से जंग लगे स्टील रिबार की जानकारी सामने आई। साथ ही वॉटरप्रूफिंग से जुड़ी कमियां भी बताई गईं।

IIT जोधपुर ने भवन का व्यापक थर्ड-पार्टी स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने की सिफारिश की थी।

Structural Audit में M18.40 तक कंक्रीट स्ट्रेंथ

इसके बाद M/s P.T. Mase & Associates ने भवन का स्ट्रक्चरल ऑडिट किया और 9 मई 2024 को अंतिम रिपोर्ट प्रस्तुत की।

रिपोर्ट में किए गए परीक्षणों में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए। Ultrasonic Pulse Velocity Test में 5.64 प्रतिशत रीडिंग doubtful पाई गईं।

Rebound Hammer Test में अधिकांश स्थानों पर कंक्रीट ग्रेड M25 पाई गई, जबकि Core Test में विभिन्न स्थानों पर compressive strength M18.40 से M32.75 के बीच मिली।

पानी के नमूनों में chloride content भी permissible limit से अधिक पाया गया। रिपोर्ट में बोरवेल के पानी को purification के बिना construction और gardening में इस्तेमाल नहीं करने की बात कही गई।

मरम्मत और रेट्रोफिटिंग पर 57.65 करोड़ रुपये का अनुमान

भवन की समस्याओं को देखते हुए RSRDC ने IIT जोधपुर और P.T. Mase & Associates की रिपोर्टों के आधार पर structural repair और retrofitting का अनुमान तैयार किया। इसकी कुल अनुमानित लागत 57.65 करोड़ रुपये बताई गई।

इसे High, Medium और Low Intensity Criticality के स्तरों में बांटा गया। बीम, कॉलम, स्लैब और जॉइंट गैप जैसी गंभीर संरचनात्मक खामियों के लिए 10.39 करोड़ रुपये, seepage और दीवारों की खराब स्थिति के लिए 9.06 करोड़ रुपये तथा settlement, cracks और paint से संबंधित खामियों के लिए 25.09 करोड़ रुपये का अनुमान लगाया गया।

अब सबसे बड़ा सवाल-सेंट्रल डोम कितना सुरक्षित?

भवन के शेष untreated areas का Structural Audit & Capacity Assessment IIT बॉम्बे से कराया गया। IIT बॉम्बे की 18 जुलाई 2026 की बैठक के आधार पर 20 जुलाई 2026 को हाईकोर्ट के समक्ष interim presentation/report रखी गई।

IIT बॉम्बे के अनुसार भवन में deterioration मुख्य रूप से reinforcement corrosion, carbonation और localized chloride contamination के कारण हो रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक कई structural members में active corrosion पाया गया और निरीक्षित क्षेत्रों में लगभग 40 प्रतिशत क्षेत्र concrete spalling के प्रति vulnerable पाया गया।

कई स्थानों पर concrete quality doubtful से poor पाई गई।

Carbonation reinforcement cover depth तक पहुंच चुकी थी, जिससे corrosion का खतरा बढ़ गया है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि IIT बॉम्बे ने कहा कि नमी और humidity बढ़ने पर corrosion की प्रक्रिया तेज हो सकती है और concrete cover अचानक टूटकर गिर सकता है, यहां तक कि सतह पर पहले से स्पष्ट crack या warning sign दिखाई न दे।

डोम को किया गया Cordoned Off

खतरे को देखते हुए IIT बॉम्बे ने Central Dome के circular open portion को cordon off करने की अंतरिम सुरक्षा व्यवस्था सुझाई। साथ ही पूरे हाईकोर्ट भवन में केवल dry mopping की अनुमति, seepage और plumbing leakages को तत्काल दूर करने की सिफारिश की गई।

इसके बाद डोम क्षेत्र को cordon off कर दिया गया है और RSRDC के Project Director को retrofitting plan प्रस्तुत करने तथा seepage और plumbing leakages को तत्काल ठीक करने के निर्देश दिए गए हैं।

हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान, जिम्मेदारी तय करने के संकेत

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने इसे स्वतः संज्ञान लेकर “Suo Motu: In Re: Structural integrity, safety and imminent peril to human lives arising from the Central Dome and allied defects in the Building of the Rajasthan High Court, Principal Seat, Jodhpur” शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है।

मामले में राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव, PWD के Principal Secretary, वित्त विभाग के Principal Secretary, Law & Legal Affairs Department के Principal Secretary, केंद्र सरकार के Department of Justice, RSRDC, राजस्थान के DGP और हाईकोर्ट के Registrar General को पक्षकार बनाया गया है।

मुख्य सचिव समेत वरिष्ठ अधिकारी होंगे कोर्ट में पेश

हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को 24 अगस्त 2026 तक comprehensive affidavits दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।

इसके साथ ही अगली सुनवाई पर राजस्थान के मुख्य सचिव, वित्त विभाग और PWD के Principal Secretary, RSRDC के Managing Director, राजस्थान के DGP तथा IIT जोधपुर और IIT बॉम्बे के नामित प्रतिनिधियों सहित P.T. Mase & Associates के प्रतिनिधि को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

24×7 निगरानी, कंट्रोल रूम और मॉक ड्रिल के आदेश

हाईकोर्ट ने Central Dome सहित सभी critical structural elements की 24×7 structural health monitoring के निर्देश दिए हैं।

Qualified structural engineers की टीम को निगरानी करनी होगी और दैनिक लिखित रिपोर्ट Registrar General को प्रस्तुत करनी होगी।

Affected zones में अनावश्यक आवाजाही रोकने, physical barriers और access-control लगाने तथा सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

इसके अलावा 48 घंटे में comprehensive safety और evacuation protocol तैयार करने तथा 72 घंटे के भीतर mock drills कराने के निर्देश दिए गए हैं। हाईकोर्ट परिसर में 24×7 dedicated Control Room स्थापित करने और Central Dome सहित critical areas की photographic एवं video documentation कराने के भी आदेश दिए गए हैं।

“मानव जीवन की सुरक्षा सर्वोपरि”-हाईकोर्ट की सख्त चेतावनी

राजस्थान हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि मामले में किसी भी प्रकार की देरी, bureaucratic inertia, विभागों के बीच जिम्मेदारी टालना या स्थिति की गंभीरता को कम करके दिखाने का प्रयास गंभीरता से लिया जाएगा।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संवैधानिक न्यायालय के परिसर में मौजूद मानव जीवन की सुरक्षा non-negotiable और absolute है।

आवश्यक urgency, transparency, completeness और personal accountability के साथ कार्रवाई नहीं होने पर कोर्ट व्यक्तिगत उपस्थिति, व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने और अन्य कठोर आदेश पारित कर सकता है।

सवाल सिर्फ यह नहीं कि बिल्डिंग में खराबी क्यों आई-जिम्मेदार कौन?

करीब 220 करोड़ रुपये की लागत से बनी और 2019 में सुपुर्द की गई इस इमारत में कुछ ही वर्षों में छत गिरने, प्लास्टर उखड़ने, पानी के रिसाव, फॉल्स सीलिंग गिरने, आग लगने और अब सेंट्रल डोम की संरचनात्मक सुरक्षा पर गंभीर खतरे की स्थिति सामने आना कई सवाल खड़े करता है।

एक ऐसी इमारत, जो न्याय देने वाली संस्था का प्रमुख परिसर है, उसकी संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर IIT स्तर की विशेषज्ञ रिपोर्ट में खतरे की आशंका जताई जाना सामान्य प्रशासनिक समस्या नहीं मानी जा सकती।

अब हाईकोर्ट की निगरानी में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है-निर्माण में कहां चूक हुई, रखरखाव में कहां कमी रही, इतने वर्षों तक समस्याओं का स्थायी समाधान क्यों नहीं हुआ और इस पूरी स्थिति के लिए आखिर जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

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