2007 में पिता के स्थान पर मिली थी अनुकंपा नियुक्ति; दस्तावेजों की जांच के बाद उठे सवाल, हाईकोर्ट के आदेश से करीब दो दशक तक जारी रही नौकरी
नई दिल्ली। वर्ष 2007 में पिता के स्थान पर अनुकंपा आधार पर नियुक्त किए गए कर्मचारी की करीब दो दशक पुरानी नौकरी और बर्खास्तगी का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।
नियुक्ति के दौरान दिए गए शपथ पत्र को लेकर उठे विवाद के बाद विभाग ने कर्मचारी को सेवा से हटा दिया था। इसके खिलाफ शुरू हुई कानूनी लड़ाई अब देश की शीर्ष अदालत तक पहुंच गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में राजस्थान सरकार सहित संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। प्रार्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता अंकुर रस्तोगी ने पैरवी की।
2007 में पिता के स्थान पर मिली थी अनुकंपा नियुक्ति
मामले के अनुसार, प्रार्थी को वर्ष 2007 में उसके पिता के स्थान पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की गई थी। नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान प्रार्थी की ओर से विभाग के समक्ष शपथ पत्र भी प्रस्तुत किया गया था।
बताया गया है कि प्रार्थी की मां उस समय डेली वेजेज पर कार्यरत थीं और उनकी नियमित नियुक्ति नहीं हुई थी। बाद में विभाग की ओर से नियुक्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई और शपथ पत्र को लेकर सवाल उठाए गए।
इसके बाद विभाग ने प्रार्थी को सेवा से हटा दिया। विभाग की ओर से आरोप लगाया गया कि प्रार्थी ने गलत/झूठा शपथ पत्र प्रस्तुत किया था।
विभागीय कार्रवाई को हाईकोर्ट में दी चुनौती
बर्खास्तगी की कार्रवाई के खिलाफ प्रार्थी ने राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रार्थी को नौकरी में बने रहने का अवसर मिला और वह करीब 20 वर्षों तक विभाग में सेवा करता रहा।
हालांकि, मामले के अंतिम निर्णय में प्रार्थी को राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट के समक्ष यह सवाल भी उठा कि यदि परिवार का कोई सदस्य पहले से सेवा में है तो क्या उसी परिवार के दूसरे सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जा सकती है।
इसी आधार पर प्रार्थी की याचिका को सिंगल बेंच और डिवीजन बेंच दोनों स्तरों पर राहत नहीं मिल सकी।
हाईकोर्ट के बाद अब सुप्रीम कोर्ट में दस्तक
हाईकोर्ट के फैसले के बाद प्रार्थी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। शीर्ष अदालत में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अंकुर रस्तोगी ने मामले से जुड़े तथ्यों और नियुक्ति की परिस्थितियों को न्यायालय के समक्ष रखा।
मामले पर सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार सहित संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अब संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना होगा।
20 साल पुराना विवाद
इस मामले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि 2007 में मिली अनुकंपा नियुक्ति के बाद कर्मचारी करीब दो दशक तक सेवा में रहा, लेकिन नियुक्ति की वैधता को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।
दस्तावेजों की जांच और शपथ पत्र को लेकर शुरू हुआ विवाद विभागीय कार्रवाई से होते हुए राजस्थान हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद अब मामले में संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। इसके बाद शीर्ष अदालत इस विवाद से जुड़े कानूनी पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी।