नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के नाम पर चल रही एक फर्जी वेबसाइट को लेकर कोर्ट ने लोगों को सावधान किया है।
यह साइट देखने में सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसी लग सकती है और इसके जरिए लोगों से निजी, बैंकिंग और लॉगिन से जुड़ी जानकारी मांगी जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने सार्वजनिक नोटिस जारी कर लोगों को सावधान किया है।
रजिस्ट्री ने बताया कि कुछ साइबर ठग सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसी दिखने वाली फर्जी वेबसाइट चला रहे हैं।
इसके जरिए लोगों को गुमराह कर उनकी निजी और वित्तीय जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा सकती है।
रजिस्ट्री ने sp-court-in.com नाम की वेबसाइट को फर्जी बताते हुए लोगों को इससे दूर रहने की सलाह दी है। यह वेबसाइट सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट जैसी ही दिखाई जा रही है।
लोगों को साफ तौर पर चेतावनी दी है कि वे ऐसी वेबसाइट या लिंक पर अपनी निजी जानकारी, बैंकिंग डिटेल या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।
रजिस्ट्री ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की आधिकारिक वेबसाइट का रजिस्टर्ड डोमेन sci.gov.in है।
लोगों को किसी भी लिंक पर जाने से पहले यह जरूर देख लेना चाहिए कि वेबसाइट का URL सही है या नहीं।
यानी सुप्रीम कोर्ट के नाम से कोई भी लिंक या वेबसाइट सामने आए तो उस पर जाने से पहले उसका वेब एड्रेस जरूर जांच लें।

सुप्रीम कोर्ट जैसी दिख रही फर्जी वेबसाइट
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री के मुताबिक, सामने आई फर्जी वेबसाइट लोगों को यह भरोसा दिला सकती है कि वे कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर ही हैं।
ऐसी वेबसाइट का इस्तेमाल फिशिंग के लिए किया जा सकता है।
इसमें लोगों को किसी लिंक, फॉर्म या दूसरे तरीके से अपनी निजी जानकारी भरने के लिए कहा जा सकता है।
इसके जरिए नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल, लॉगिन डिटेल या दूसरी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश हो सकती है।
रजिस्ट्री ने चेतावनी दी है कि ऐसी जानकारी शेयर करने से डेटा चोरी का खतरा बढ़ सकता है।
इसलिए सिर्फ वेबसाइट का नाम देखकर भरोसा करने के बजाय उसका पूरा वेब एड्रेस जांचना जरूरी है।
असली वेबसाइट का पता ऐसे पहचानें
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि उसकी आधिकारिक वेबसाइट का रजिस्टर्ड डोमेन sci.gov.in है। है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर केस स्टेटस, कॉज लिस्ट, ऑर्डर, जजमेंट और दूसरी ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी लिंक को खोलने से पहले उसके ऊपर कर्सर ले जाकर पूरा URL देख लें। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि लिंक वास्तव में किस वेबसाइट पर ले जा रहा है।
अगर पता संदिग्ध लगे या उसमें कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट से अलग कोई डोमेन हो, तो उस पर क्लिक नहीं करना चाहिए।
यानी वेबसाइट पर सुप्रीम कोर्ट का लोगो या नाम दिखाई देना ही उसकी असली पहचान नहीं है।
वेब एड्रेस की जांच करना सबसे जरूरी है।
पर्सनल और बैंकिंग जानकारी न दें
रजिस्ट्री ने लोगों को खास तौर पर निजी और वित्तीय जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी है।
अगर किसी वेबसाइट या लिंक पर सुप्रीम कोर्ट के नाम से लॉगिन करने, कोई फॉर्म भरने या बैंक से जुड़ी जानकारी देने के लिए कहा जाता है, तो पहले उसकी सही पहचान जांचनी चाहिए।
फर्जी वेबसाइट के पीछे मौजूद लोग ऐसी जानकारी का इस्तेमाल डेटा चोरी या दूसरे साइबर फ्रॉड में कर सकते हैं।
खासकर वकीलों, पक्षकारों और उन लोगों के लिए यह चेतावनी अहम है जो कोर्ट की ऑनलाइन सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
किसी केस की जानकारी, ऑर्डर या दूसरी कोर्ट सर्विस के लिए सीधे आधिकारिक वेबसाइट पर जाना ज्यादा सुरक्षित है।
खास तौर पर अगर किसी व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट के नाम से कोई ई-मेल, मैसेज या लिंक मिलता है और उसमें निजी जानकारी भरने, लॉगिन करने या किसी तरह की वित्तीय जानकारी देने के लिए कहा जाता है, तो बिना सत्यापन के उस पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
फर्जी वेबसाइट पर जानकारी दे दी तो तुरंत ये करें?
सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने कहा है कि अगर किसी व्यक्ति को लगता है कि वह फिशिंग का शिकार हो गया है, तो उसे तुरंत अपने ऑनलाइन अकाउंट के पासवर्ड बदल लेने चाहिए।
अगर बैंक से जुड़ी कोई जानकारी साझा हो गई है या खाते में बिना अनुमति के पहुंच का शक है, तो बैंक को भी तुरंत इसकी जानकारी देनी चाहिए।
यानी गलती से किसी संदिग्ध वेबसाइट पर जानकारी दे दी है तो इसे नजरअंदाज न करें।
तुरंत अपने अकाउंट और बैंकिंग जानकारी को सुरक्षित करने के कदम उठाएं।
पहले भी फर्जी वेबसाइट को लेकर चेतावनी
सुप्रीम कोर्ट की यह पहली चेतावनी नहीं है। रजिस्ट्री इससे पहले भी कोर्ट की वेबसाइट की नकल करने वाली फर्जी साइटों को लेकर लोगों को सावधान कर चुकी है।
नई एडवाइजरी से पहले 16 जुलाई 2025 और 28 अप्रैल 2026 को भी ऐसे नोटिस जारी किए गए थे।
इनमें फर्जी वेबसाइटों से सावधान रहने और संदिग्ध लिंक पर निजी जानकारी साझा नहीं करने की सलाह दी गई थी।
यानी सुप्रीम कोर्ट के नाम और वेबसाइट की नकल कर लोगों को निशाना बनाने की कोशिश पहले भी सामने आती रही है।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर लोगों से सावधानी बरतने को कहा है।
एक गलत क्लिक पड़ सकता है भारी
फर्जी वेबसाइट अक्सर देखने में असली वेबसाइट जैसी ही लगती है। ऐसे में सिर्फ नाम, लोगो या डिजाइन देखकर कोई भी उसे सही मान सकता है।
लेकिन एक गलत क्लिक के बाद आपकी निजी जानकारी, बैंकिंग डिटेल या लॉगिन की जानकारी गलत हाथों में जा सकती है। इसलिए किसी भी ऐसी वेबसाइट पर जानकारी देने से पहले उसका URL जरूर जांचें।
सीधी बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट की ऑनलाइन सेवाओं के लिए सिर्फ sci.gov.in का इस्तेमाल करें। अगर किसी दूसरे URL पर सुप्रीम कोर्ट का नाम या लोगो दिखे, तो पहले उसकी पूरी जांच करें और संदिग्ध लगे तो उसे न खोलें।