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BREAKING: हाईकोर्ट भवन की दुर्दशा पर जिम्मेदारों को राजस्थान की किसी अदालत से नहीं मिलेगा अग्रिम संरक्षण, हाईकोर्ट ने पुलिस को भी दिया सख्त आदेश

Rajasthan High Court Dome Safety Crisis: Top Officials and IIT Bombay Experts to Appear Before Court

2023 की FIR पर ‘कछुआ चाल’ से जांच से नाराज हाईकोर्ट; DG SOG को जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई के निर्देश

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट के नए भवन की कथित दुर्दशा और निर्माण में सामने आई गंभीर खामियों के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने अब तक का सबसे सख्त रुख अपनाया है।

वर्ष 2023 में दर्ज एफआईआर की जांच की धीमी रफ्तार पर गहरा असंतोष जताते हुए हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों को कानून के शिकंजे से बचने का मौका नहीं दिया जाएगा।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने राज्य के डायरेक्टर जनरल, एसओजी को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि न्यायालय भवन की इस स्थिति के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ त्वरित और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

कोर्ट ने मामले की जांच की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट आगामी 15 सितंबर को पेश करने के आदेश दिए हैं।

राजस्थान की अदालतें नहीं देंगी संरक्षण

मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने एक असाधारण आदेश पारित किया है।

कोर्ट ने राजस्थान के सभी न्यायालयों को निर्देश दिया है कि इस प्रकरण से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों को पुलिस की संभावित कार्रवाई के खिलाफ किसी भी प्रकार का अग्रिम संरक्षण नहीं दिया जाए।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी व्यक्ति को राहत या संरक्षण देने से संबंधित आदेश केवल राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ अथवा सुप्रीम कोर्ट ही पारित कर सकेगा।

हाईकोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि इस आदेश के उल्लंघन को गंभीरता से लिया जाएगा।

तीन साल पुरानी FIR, अब हाईकोर्ट ने पूछा-जांच कहां पहुंची?

नए हाईकोर्ट भवन में कथित निर्माण खामियों से जुड़े मामले में वर्ष 2023 में एफआईआर दर्ज हुई थी। लेकिन जांच की रफ्तार को लेकर हाईकोर्ट ने गंभीर नाराजगी जाहिर की है।

करोड़ों रुपये की लागत से बने न्यायालय भवन की संरचनात्मक सुरक्षा पर लगातार उठ रहे सवालों के बीच कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि जांच अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रह सकती।

15 सितंबर को होगी जवाबदेही की अगली परीक्षा

हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद अब जांच एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों की नजरें 15 सितंबर की सुनवाई पर हैं।

कोर्ट के समक्ष विस्तृत जानकारी रखनी होगी कि जांच में अब तक क्या कार्रवाई हुई और भवन की कथित दुर्दशा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए गए।

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