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जोधपुर सिर्फ बैठने की जगह नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ है: दो जजों के जयपुर तबादले पर बार एसोसिएशन का कड़ा ऐतराज, पुनर्विचार करने की मांग

Jodhpur Bar Objects to Transfer of Two Rajasthan High Court Judges to Jaipur, Seeks Review

जोधपुर की दोनों बार एसोसिएशन ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ से दो न्यायाधीशों को स्थायी रूप से जयपुर पीठ में बैठने के लिए भेजे जाने के फैसले पर अब जोधपुर की दोनों प्रमुख बार एसोसिएशनों ने कड़ा ऐतराज जताया है।

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन, जोधपुर ने संयुक्त रूप से गुरुवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इस व्यवस्था पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है।

एसोसिएशनों के अनुसार, जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस अरुण मोंगा को अगले आदेश तक जयपुर पीठ में स्थायी रूप से बैठने के लिए नामित किए जाने से अधिवक्ताओं में चिंता है।

बार का मानना है कि मुख्यपीठ में लंबित मामलों के भारी बोझ के बावजूद न्यायिक शक्ति बढ़ाने के बजाय उसमें कमी होना संस्थागत अपेक्षाओं के विपरीत है।

बार एसोसिएशनों ने साफ तौर पर कहा है कि जस्टिस फरजंद अली और जस्टिस अरुण मोंगा को अगले आदेश तक स्थायी रूप से जयपुर में बैठने के लिए नामित करने की मौजूदा व्यवस्था पर पुनर्विचार किया जाए।

राजस्थान हाईकोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन अध्यक्ष दीलीपसिंह उदावत-महासचिव अरूण झांझरिया

‘जोधपुर सिर्फ बैठने की जगह नहीं, राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ है’

एडवोकेट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रणजीत जोशी और लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीपसिंह उदावत की ओर से लिखे संयुक्त पत्र में दोनों बार एसोसिएशनों ने जोधपुर के संस्थागत महत्व को लेकर जोरदार पक्ष रखा है।

पत्र में कहा गया है कि जोधपुर केवल न्यायाधीशों के बैठने का एक अन्य स्थान नहीं, बल्कि राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ (Principal Seat) है।

इसकी ऐतिहासिक स्थिति, संस्थागत विरासत और भारी न्यायिक कार्यभार के अनुरूप यहां न्यायाधीशों की स्थायी संख्या होना जरूरी है।

बार ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि न्यायाधीशों की तैनाती, रोस्टर और बैठने की व्यवस्था तय करना मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र का विषय है और एसोसिएशन इस संवैधानिक अधिकार का पूरा सम्मान करती हैं।

लेकिन न्याय व्यवस्था के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में बार ने मुख्यपीठ के सामने आ रही व्यावहारिक और संस्थागत चिंताओं को रखना जरूरी बताया।

जयपुर से ज्यादा मजबूत रहे जोधपुर मुख्यपीठ, बार की मांग

दोनों एसोसिएशनों ने मांग की है कि जोधपुर मुख्यपीठ में स्थायी रूप से बैठने वाले न्यायाधीशों की संख्या जयपुर पीठ से उचित रूप से अधिक रखने के पारंपरिक और संस्थागत संतुलन को बहाल किया जाए।

बार ने जोधपुर में लंबित मामलों और हाईकोर्ट के बढ़ते कार्यभार का हवाला देते हुए मुख्यपीठ की स्थायी न्यायिक क्षमता बढ़ाने की भी मांग की है।

साथ ही कहा गया है कि मुख्यपीठ को मजबूत करने के लिए दोनों बार एसोसिएशनों की ओर से पहले दिए गए प्रतिनिधित्वों पर भी विचार किया जाए।

मुख्यपीठ का दर्जा बनाए रखने की अपील

बार एसोसिएशनों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को लिखे पत्र में कहा कि उन्होंने हमेशा राजस्थान हाईकोर्ट की संस्था को मजबूत करने के लिए बेंच के साथ सहयोग किया है।

ऐसे में उम्मीद है कि उनकी वास्तविक चिंताओं पर गंभीरता और सहानुभूति से विचार किया जाएगा और राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ के रूप में जोधपुर की ऐतिहासिक एवं संस्थागत स्थिति को भविष्य की व्यवस्थाओं में सुरक्षित रखा जाएगा।

दो जजों के जयपुर में स्थायी बैठने की नई व्यवस्था के खिलाफ जोधपुर बार का यह प्रतिनिधित्व ऐसे समय आया है, जब मुख्यपीठ की न्यायिक क्षमता और संस्थागत संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस संदीप मेहता के पत्र के बाद लगातार राजस्थान के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

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